For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मैं एकलव्य नहीं (लघुकथा)

परीक्षाएं निकट थीं लेकिन टीचर पिछले कई दिनों से क्लास से गायब थे. पढ़ाई का बहुत हर्जा हो रहा था जिसे देखकर उसे बेहद गुस्सा आता. रह रह कर उसके सामने अपनी विधवा बीमार माँ का चेहरा घूम जाता, जो लोगों के घरों में झाड़ू पोछा कर उसे पढ़ा रही थी. आखिर उस से रहा न गया और वह शिकायत लेकर प्रधानाचार्य के पास जा पहुंचा।

 “उस कक्षा में और भी तो विद्यार्थी है, सिर्फ तुम्हें ही शिकायत क्यों है।”
“क्योंकि मैं एकलव्य नहीं हूँ सर।”

(मौलिक और अप्रकाशित)    

Views: 1088

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vandana on December 9, 2013 at 5:54am

बिलकुल..  शिक्षक की यह अकर्मण्यता बिलकुल सहनीय नहीं होनी चाहिए .... सार्थक प्रहार आदरणीय 

Comment by Vindu Babu on December 8, 2013 at 5:56am
समसामयिक शैक्षिक स्थिति को कम शब्दों में अच्छी तरह प्रस्तुत किया है आपने आदरणीय। सच में शोचनीय स्थितियां हैं।
सद्र्ट
सादर

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 8, 2013 at 3:05am

भाई रविजी, आपकी प्रस्तुत लघुकथा शिक्षा के क्षेत्र में वेतनभोगियों की अकर्मण्यता पर सार्थक प्रहार करती हुई है. शिक्षक की लापरवाह अनुपस्थिति के कारण विद्यार्थियों की ऊहापोह प्रस्तुत करती इस कथा के लिए हार्दिक बधाइयाँ.

आपका प्रयास सतत हो और हमारे बीच आप बने रहें.. . शुभेच्छाएँ

Comment by Shubhranshu Pandey on December 5, 2013 at 1:46pm

आदरणीय रवि प्रभाकर जी, 

एकलव्य को एक सर्वथा नये रुप में प्रस्तुत कर कथा को एक नया रुप् दिया है. बधाई..

सादर.

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 5, 2013 at 9:03am

बेहतरीन लघु कथा ..सच है एकलव्य ने उस शख्स के लिए कीमत चुकाई जो गुरु कहलाने लायक नहीं था ..गुरु तो द्रोणाचार्य ही बने रहे उन्होंने कुछ नहीं सीखा ..तो कम से कम शिष्य ही सीख लें ..बेहतरीन बिचार ..सादर 

Comment by Neelam Upadhyaya on December 4, 2013 at 5:51pm

आदरणीय रवि जी, गूढ़ता को उकेरती हुयी बहुत ही सुंदर कथा के लिए बधाई.

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 4, 2013 at 4:22pm

आदरणीय लघुकथा के जरिये बहुत ही गहरी बात कह दी आपने बहुत ही सार्थक लघुकथा आदरणीय बहुत बहुत बधाई

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on December 4, 2013 at 9:52am

लघु कथा सार्थक है | अब प्रश् है की छत्रों को एकलव्य बनाना होगा या अध्यापको को द्रोनाचार्य | न सब एकलव्य बन सकते है और न सब गुरु ग्रोनाचार्य | केवल व्यवस्था ही सुधारनी होगी | लघु कथा के लिए बधाई 

Comment by वेदिका on December 4, 2013 at 3:33am

एकलव्य बनने से शिष्य तत्व का नाश होता है और गुरुता की स्थापना पर संदेह! इस वचनबद्धता के जाल से निकलने के लिए आवाज उठानी ही होगी! बधाई आ० रवि भाई जी!

बहुत बहुत 

Comment by annapurna bajpai on December 3, 2013 at 11:22pm

आ0 रवि प्रभाकर जी बहुत सुंदर लघु कथा , अपने शीर्षक को पूरा न्याय देती हुई , बहुत बधाई आपको । 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post अनसुने अनकहे के बीच
"आ. भाई विजय जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . झोला
"आ. भाई सुनील जी सुंदर कुंडलियां हुई हैं हार्दिक बधाई।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
Wednesday
sushil yadav posted blog posts
Oct 26
Sushil posted blog posts
Oct 26
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Oct 26
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service