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देने वाला दाता ही,  ताप है संताप है 
तुझे मिल रहा जो, कर्मो  का ही श्राप है 
 
मत समझ वे कमजोर, और तू बलवान है 
उनके बल पर ही बना, आज तू धनवान है 
 
भीड़ देखी हीन भाव से, वह मनुज शैतान है 
छीनकर सारा इनसे, कर रहा अभिमान है
 
चापलूसी धूर्तता से, हराभरा यह लॉन है
पानी के लिए है जमा, भीड़ को यह भान है 
 
दिन उनका  भी आएगा, नहीं तुझको ज्ञान है 
सोच आखिर इंसान से, इंसान का ही काम है 
 
उसके यहाँ न गरीब कोई, न कोई  धनवान है
गरीब और अमिर का, वहां एकही विधान है | 
 
 
 
 

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 12, 2012 at 11:00am

हार्दिक धन्यवाद भाई श्री अशोक कुमार शर्मा 'भ्रमर'जी. और अरुण शर्मा 'अनंत'जी  आप दोनों से दाद पाकर मै धन्य हुआ 

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on August 12, 2012 at 7:22am

दिन उनका  भी आएगा, नहीं तुझको ज्ञान है 

सोच आखिर इंसान से, इंसान का ही काम है 
बहुत सुन्दर संदेश देती प्यारी रचना 
आदरणीय लडीवाला जी सुप्रभात ....आप को भी ढेर सारी शुभ कामनाएं रक्षाबंधन , कृष्ण जन्माष्टमी और स्वतंत्रता दिवस की .
.भ्रमर 5
Comment by अरुन 'अनन्त' on August 8, 2012 at 11:57am
उसके यहाँ न गरीब कोई, न कोई  धनवान है
गरीब और अमिर का, वहां एकही विधान है |
 वाह सर वाह क्या बात , तहे दिल से दाद कुबूल कीजिये
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 7, 2012 at 9:19am
आदरणीय रेखा जोशीजी, श्री अशोक कुमार रक्तालेजी और 
श्री योगी सारस्वत जी रचना पसंद आई हार्दिक आभारी हूँ 
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला
Comment by Ashok Kumar Raktale on August 6, 2012 at 9:28pm

आदरणीय

             सादर प्रणाम,

चापलूसी धूर्तता से, हराभरा यह लॉन है
पानी के लिए है जमा, भीड़ को यह भान है 
सम सामयिक परिस्थिति पर लिखी सुन्दर रचना.
Comment by Rekha Joshi on August 6, 2012 at 7:24pm

मत समझ वे कमजोर, और तू बलवान है 

उनके बल पर ही बना, आज तू धनवान है ,अतिसुन्दर प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई लक्ष्मण जी 
Comment by Yogi Saraswat on August 6, 2012 at 4:21pm
चापलूसी धूर्तता से, हराभरा यह लॉन है
पानी के लिए है जमा, भीड़ को यह भान है
bahut khoob

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