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तुझे तो देख के जोरों से मेरा दिल धडकता है

तुझे तो देख के जोरों से मेरा दिल धडकता है

जिये पानी बिना मछली के जैसे मन तडपता है

जिगर को थाम के बैठूं मैं अक्सर सामने तेरे

के हाले दिल सुनाने को ये पागल दिल मचलता है

मैं चातक सा फिरूँ राहों में स्वाती बूँद का प्यासा

अगर तुम ना दिखो तो हो के व्याकुल दिल तरसता है

बड़ा बेचैन होता हूँ तू मेरे साथ में जब हो

किसी के साथ देखूं तो कोई शोला भड़कता है

दिवाने घूमते हैं बस तेरा दीदार पाने को

हवाएँ भी हैं थम जाती दुपट्टा जब सरकता है

मेरे सागर से दिल में उठ रहीं हैं इश्क की मौजें

तुझे पाने की खातिर आँखों से सागर छलकता है

तेरे आने से रंगत बढ़ गयी बीमार चेह्रे की

किसी बंजर में जिस तरह कोई बादल बरसता है

संदीप कुमार पटेल "दीप"

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Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 23, 2012 at 7:14pm

बढ़िया प्रयास है संदीप बाबू, दाद कुबूल करें |

Comment by Nilansh on May 17, 2012 at 10:05pm

तेरे आने से रंगत बढ़ गयी बीमार चेह्रे की

किसी बंजर में जिस तरह कोई बादल बरसता है


bahut sunder  sandeep  ji

Comment by Rekha Joshi on May 17, 2012 at 9:24pm

बड़ा बेचैन होता हूँ तू मेरे साथ में जब हो

किसी के साथ देखूं तो कोई शोला भड़कता हैsandip ji bahut badhiya panktiyaan 

Comment by AjAy Kumar Bohat on May 17, 2012 at 9:14pm

बड़ा बेचैन होता हूँ तू मेरे साथ में जब हो

किसी के साथ देखूं तो कोई शोला भड़कता है
waah bahut khoob....

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 17, 2012 at 7:53pm

आदरणीय प्रदीप  KUMAR SINGH KUSHWAHA सर जी

सादर वन्दे

आपकी इस अनमोल प्रतिक्रिया से मन प्रसन्न् हो गया सर

अपना स्नेह ऐसे ही बनाये रखिये

आपका बहुत बहुत धन्यवाद और सादर आभार

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 17, 2012 at 7:49pm

मैँ अपनी अगली गज़ल मेँ इस बात का ध्यान रखुंगा आदरणीय डॉ. सूर्या बाली "सूरज" सर जी

इस उत्साह वर्धन और मार्ग्दर्शन के लिये आपका आभार

सादर वन्दे

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 17, 2012 at 7:47pm

श्रध्येय गुरुवर Saurabh Pandey  सर आपका चरण वन्दन

आपकी इस प्रतिक्रिया से मन उत्साहित हो गया

अपना स्नेह और आशीर्वाद ऐसे ही बनाए रखिये

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 17, 2012 at 7:44pm
Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 17, 2012 at 7:42pm

aapka bahut bahut aabhari hun aadarniyaa rajesh kumari ji

apne jo meri is ghazal ko padha aur haushalafajai ki uske liye tahe dil se shukriya aapka

aapki pratkriya se utsaah doguna ho jata hai apna sneh banaye rakhiye

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 17, 2012 at 7:40pm

aapka hriday se dhanyvaad Bhawesh Rajpal ji ........saadar aabhar is utsaah-wardhan ke liye

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