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क्या जाने किस जनम का सिला दे गया मुझे..( ग़ज़ल : सालिक गणवीर)

221 2121 1221 212

क्या जाने किस जनम का सिला दे गया मुझे
था बेगुनाह फिर भी सज़ा दे गया मुझे

कैसे यक़ीन कीजिए ग़ैरों की बात का
समझा था जिसको अपना दगा दे गया मुझे

लम्बी हो उम्र मेरी दुआ मांँगता रहा
मरने की मुफ़्त में जो दवा दे गया मुझे

उसके इशारों को मैं समझ ही नहीं सका
गूंँगा था आदमी जो सदा दे गया मुझे

ग़ज़लें पुरानी ले गया आया था ख़्वाब में
इनके इवज में घाव नया दे गया मुझे

भीगा था जिस्म मेरा दिसम्बर की रात में

तुहफ़े में धूप की वो रिदा दे गया मुझे

*मौलिक एवं अप्रकाशित.

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Comment by सालिक गणवीर on September 13, 2020 at 6:26pm

आदरणीय भाई बसंत कुमार शर्मा जी
सादर अभिवादन
ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ.

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 11, 2020 at 6:55pm

आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर नमस्कार ।

अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by सालिक गणवीर on September 11, 2020 at 5:36pm

भाई लक्षण धामी 'मुसाफ़िर' जी
सादर अभिवादन
ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ.

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 11, 2020 at 5:27pm

आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by सालिक गणवीर on September 10, 2020 at 10:54pm

भाई आशीष यादव जी
सादर अभिवादन
ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ.

Comment by आशीष यादव on September 10, 2020 at 10:46pm

आदरणीय श्री सालिक गणवीर साहब अच्छी गजल बनी है। बधाई स्वीकार कीजिये। 

Comment by सालिक गणवीर on September 8, 2020 at 9:20pm

उस्ताद-ए-मुहतरम समर कबीर साहिब

आदाब

करेक्शन कर दिया और आपके सौजन्य से नया शैर भी जोड़ दिया मुहतरम. बहुत शुक्रिय:,नवाज़िशें.

Comment by Samar kabeer on September 8, 2020 at 8:07pm

'मैं उसके इशारों को समझ ही नहीं सका'

ये मिसरा बह्र में नहीं है, मेरी टिप्पणी ध्यान से पढ़ें ।

Comment by Samar kabeer on September 8, 2020 at 11:49am

आमीन !

बहुत बहुत धन्यवाद प्रिय ।

Comment by सालिक गणवीर on September 8, 2020 at 11:39am

आदरणीय समर कबीर साहिब
आदाब
ग़ज़ल पर आपकी मौजूदगी और हौसला अफजाई के लिए आपका तह-ए-दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ.इस्लाह पर अमल करने के बाद ग़ज़ल  पुनः पोस्ट करता हूँ,मुहतरम. साथ ही साथ आपको जन्मदिन की अशेष शुभकामनाएंँ.ईश्वर आपको लंबी उम्र और  अच्छी सेहत अताा करेंं.

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