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हर सम्त अँधेरा है इसे दूर भगाओ...(ग़ज़ल-सालिक गणवीर)

221 1221 1221 122

हर सम्त अंँधेरा है इसे दूर भगाओ
है कोई मुनव्वर तो मिरे सामने आओ

क़ातिल हो तो क़ातिल की तरह पेश भी आओ
घायल हूँ मिरे ज़ख़्म पे मरहम न लगाओ

कोई न उठाएगा यहाँ बोझ तुम्हारा
शानों को ज़रा और भी मजबूत बनाओ

कश्ती को सँभालो न रहो चूर नशे में
गर डूबना है डूबो हमें तो न डुबाओ

काँटों की तो तासीर है वो चुभते रहेंगे
तुम फूल हो ख़ुशबू की तरह फैलते जाओ

ऐसे भी वो करता है सर-ए-आम फ़ज़ीहत
पर काट के कहता है मुझे उड़ के दिखाओ

मुमकिन तो न था फिर भी तुम्हें दे दी मुआफ़ी
अब छूट है तुमको नया इल्ज़ाम लगाओ

'सालिक' तो चला जाएगा दुनिया से किसी दिन
आएगा नहीं लौट के कितना भी बुलाओ

*मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by सालिक गणवीर on September 11, 2020 at 5:03pm

भाई हर्ष महाजन जी
सादर अभिवादन
ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ.

Comment by Harash Mahajan on September 11, 2020 at 12:53pm

बहुत ही बेहतरीन अशआर आदरणीय सालिक जी । अच्छी पेशकश के लिए बहुत बहुत बधाई ।

सादर

Comment by सालिक गणवीर on September 11, 2020 at 12:45pm

भाई लक्ष्मण धामी जी
सादर अभिवादन
ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभारी हूँ.

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 11, 2020 at 8:27am

"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"

Comment by सालिक गणवीर on August 22, 2020 at 9:41pm

मुहतरमा डिंपल शर्मा जी
सादर अभिवादन
ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हृदयतल से आभार व्यक्त करता हूँ. सादर .

Comment by सालिक गणवीर on August 22, 2020 at 9:40pm

भाई आशीष यादव जी.
सादर अभिवादन
ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हृदयतल से आभार व्यक्त करता हूँ. सादर एवं सप्रेम. इस मंच पर  आपकी उपस्थिती से प्रसन्नता हुई.

Comment by सालिक गणवीर on August 22, 2020 at 9:37pm

भाई ब्रजेश कुमार 'ब्रज' जी
सादर अभिवादन
ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हृदयतल से आभार व्यक्त करता हूँ. सादर एवं सप्रेम.

Comment by Dimple Sharma on August 22, 2020 at 7:58pm

आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्ते, वाह वाह बहुत ख़ूब "पर काट के कहता है मुझे उड़ के दिखाओ" क्या कहने,हर शेर कमाल, खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।

Comment by आशीष यादव on August 22, 2020 at 6:51pm

बहुत अच्छी ग़ज़ल बनी है।सारे शेर बहुत अच्छे लगे। मुबारकबाद स्वीकार कीजिए।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 22, 2020 at 10:03am

अच्छी ग़ज़ल कही है ज़नाब सालिक जी बधाई

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