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ग़ज़ल ( सोचता हूँ आज तक ग़ज़लों से क्या हासिल हुआ..)

(2122 2122 2122 212)

सोचता हूँ आज तक ग़ज़लों से क्या हासिल हुआ
पहले से बीमार था दिल दर्द भी शामिल हुआ

जब तलक घुटनों के बल चलता रहा था ख़ुश बहुत
आ पड़ा ग़म सर पे जब से दौड़ के क़ाबिल हुआ

ज़िंदगी में तुम नहीं थे इक अधूरापन-सा था
जब से आए हो ये लगता है कि मैं कामिल हुआ

चलते-चलते लोग कहते हैं सफ़र आसान है
ज़िंदगानी में सरकना भी बहुत मुश्किल हुआ

वो शरीक-ए-ग़म है अब मैं क्या कहूँ तारीफ़ में
चोट लगती है मुझे वो जब कभी घाइल हुआ

जब कभी आया है सुख भी घर की चौखट पर मेरे
चोरी-चोरी दुख भी 'सालिक' चुपके से दाखिल हुआ

*मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by सालिक गणवीर on July 30, 2020 at 12:55pm

भाई सुरेंद्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
आदाब
ग़ज़ल पर आपकी मौजूदगी और हौसला अफजाई के लिए आपका तह-ए-दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ.

Comment by नाथ सोनांचली on July 30, 2020 at 11:19am

आद0 सालिक गणवीर जी सादर अभिवादन। शानदार ग़ज़ल के लिए दिली मुबारकबाद पेश करता हूँ।

Comment by सालिक गणवीर on July 27, 2020 at 3:24pm

आदरणीया डिंपल शर्मा जी
नमस्कार

ग़ज़ल पर आपकी मौजूदगी और हौसला अफजाई के लिए आपका तह-ए-दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ.

Comment by Dimple Sharma on July 27, 2020 at 11:57am

आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्ते, बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है आदरणीय बधाई स्वीकार करें विशेषकर पाँचवा शेर तो कमाल हुआ है वाह क्या कहने।

Comment by सालिक गणवीर on July 22, 2020 at 6:41am

आदरणीय भाई बसंत कुमार शर्मा जी
आदाब
ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी और सराहना के लिए ह्रदय से आभार.

Comment by सालिक गणवीर on July 22, 2020 at 6:40am

आदरणीय अमीरूद्दीन 'अमीर'साहिब
आदाब
ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी और सराहना के लिए ह्रदय से आभार.

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on July 22, 2020 at 12:27am

जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, इस शानदार ग़ज़ल पर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 21, 2020 at 8:39pm

आदरणीय सालिक गणवीर जी सादर नमस्कार 

बेहतरीन ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद आपको 

Comment by सालिक गणवीर on July 21, 2020 at 3:25pm

आदरणीय रवि शुक्ला जी

सादर अभिवादन

ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी और हौसला अफ़जाई के लिए आपका हार्दिक आभार.

Comment by सालिक गणवीर on July 21, 2020 at 3:23pm

भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

सादर अभिवादन

ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी और सराहना के लिए सादर आभार.

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