For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

वो शह्र-ए-दिल सदा के लिए छोड़ क्या गया

बह्र-221/2121/1221/212

वो शह्र-ए-दिल सदा के लिए छोड़ क्या गया
आँखों से मेरी प्यार का मौसम चला गया [1]

उस को ख़बर थी ख़ौफ़ मुझे तीरगी से है
जलते हुए चराग़ तभी तो बुझा गया [2]

आँखों में था मलाल वो रुख़सत हुआ था जब
मुड़ मुड़ के दूर तक वो मुझे देखता गया [3]

अपने बदन से उस को रिहा करने के लिए
खंज़र से हाथों की नसों को चीरता गया [4]

हम रो रहे हैं और उन्हें कोई ग़म नहीं
अल्लाह हमारे प्यार में क्या मोड़ आ गया [5]

पैदा किया था प्यार से मैं ने जो फूल को
सींचा नहीं जो वक़्त पे तो सूखता गया [6]

आँखों में जिसकी 'मीत' मैं रहता था रात दिन
मुझ को वो आज अपनी नज़र से गिरा गया [7]

रूपम कुमार 'मीत'

"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 200

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rupam kumar -'मीत' on July 17, 2020 at 12:36pm

आदरणीय अमरुद्दीन 'अमीर' साहब जी, आपकी मौजूदगी देख कर बहुत ख़ुशी हुई,,, बहुत दिन के बाद जवाब लिख रहा हूँ इस के लिए माज़रत, क्यों कि मैं यहाँ गाँव में हूँ और यहाँ नेटवर्क का मअसला है, कुछ दिन पहले से ठीक है अब।। आपका बहुत शुक्रिया आपने मेरे हौसला बढ़ाया। मैं आदरणीय रवि साहब के इस्लाह पर जरूर अलम करूँगा।। आपका दिन शुभ हो।।

Comment by Rupam kumar -'मीत' on July 17, 2020 at 12:35pm

आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह  साहब, आदाब, बहुत दिन के बाद जवाब लिख रहा हूँ इस के लिए माज़रत, क्यों कि मैं यहाँ गाँव में हूँ और यहाँ नेटवर्क का मअसला है, कुछ दिन पहले से ठीक है अब।। आपका बहुत शुक्रिया आपने मेरे हौसला बढ़ाया। मैं आदरणीय रवि साहब के इस्लाह पर जरूर अलम करूँगा।। आपका दिन शुभ हो।।

Comment by Rupam kumar -'मीत' on July 17, 2020 at 12:34pm

आदरणीय तेजवीर सिंह साहब, आदाब, क़ुबूल कीजिए इस बालक का, बहुत दिन के बाद जवाब लिख रहा हूँ इस के लिए माज़रत, क्यों कि मैं यहाँ गाँव में हूँ और यहाँ नेटवर्क का मअसला है, आपका बहुत शुक्रिया आपने मेरे हौसला बढ़ाया।। आपका दिन शुभ हो।।

Comment by Rupam kumar -'मीत' on July 17, 2020 at 12:32pm

आदरणीय सालिक गणवीर साहब, आदाब, बहुत दिन के बाद जवाब लिख रहा हूँ इस के लिए माज़रत, क्यों कि मैं यहाँ गाँव में हूँ और यहाँ नेटवर्क का मअसला है, कुछ दिन पहले से ठीक है अब।। आपका बहुत शुक्रिया आपने मेरे हौसला बढ़ाया। मैं आदरणीय रवि साहब के इस्लाह पर जरूर अलम करूँगा।। आपका दिन शुभ हो।।

Comment by Rupam kumar -'मीत' on July 17, 2020 at 12:30pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी साहब, आदाब, बहुत दिन के बाद जवाब लिख रहा हूँ इस के लिए माज़रत, क्यों कि मैं यहाँ गाँव में हूँ और यहाँ नेटवर्क का मअसला है, आपका बहुत शुक्रिया आपने मेरे हौसला बढ़ाया। मैं आदरणीय रवि साहब के इस्लाह पर कायम हूँ।। आपका दिन शुभ हो।।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on July 12, 2020 at 4:01pm

जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। 

जनाब रवि भसीन जी की बातों का संज्ञान लें।

Comment by नाथ सोनांचली on July 12, 2020 at 1:06pm

आद0 रूपम कुमार जी सादर अभिवादन

ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है। बधाई स्वीकार कीजिये। आद0 रवि भसीन साहिब की बातों का संज्ञान लीजिएगा।

Comment by TEJ VEER SINGH on July 11, 2020 at 6:26pm

हार्दिक बधाई आदरणीय रूपम कुमार 'मीत' जी।बेहतरीन गज़ल।

लगता है उसकी आंख में थोड़ा मलाल है
जब जा रहा था दूर मुझे देखता गया[5]

Comment by सालिक गणवीर on July 11, 2020 at 9:42am

प्रिय रूपम

आदाब

अच्छी ग़ज़ल हुई है, और बेहतरी के लिए गुणीजनों की इस्लाह पर अमल करो.सस्नेह.

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 11, 2020 at 6:45am

आ. भाई रुपम कुमार जी, गजल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई स्वीकारे । आ. भाई रवि जी के मसविरे से गजल और बेहतर होगी । सादर...

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Atul Saxena replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"पहली दौड़ घर से स्कूल डेढ़ दो किलोमीटर था और उससे विपरीत था तीन किलोमीटर वर्धमान कॉलेज। छठी में आ…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

जग मिटा कर दुख सुनाने- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२१२२/२१२२मत निकल तलवार लेकरजय  मिलेगी  प्यार लेकर।१।*युद्ध  नित   बर्बाद  करताजी तनिक यह सार…See More
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"आ. बबीता जी, सादर अभिवादन। सुन्दर रचना हुई है ।हार्दिक बधाई।"
4 hours ago
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71
"हाशिये की दौड़... पंचायत सभा में रेवती दीदी का सम्मान महिलाओं के उत्थानपरक क्षेत्र में योगदान देने…"
10 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आप सभी हाजरात का गज़ल तक आने और हौसला अफजाई करने का बहुत बहुत शुक्रिया "
12 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय कृष जी गज़ल का उम्दा प्रयास  हुआ बधाई स्वीकारें प्रयासरत रहें ..."
12 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीया राजेश कुमारी जी उम्दा गज़ल की बधाई गिरः भी खूब लगाई बहुत मुबारकबाद "
12 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
""ओबीओ लाइव तरही मोशाइर:" अंक-128 को सफल बनाने के लिये सभी ग़ज़लकारों का हार्दिक आभार व…"
12 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"संजय शुक्ला जी बहुत खूब "
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chetan Prakash's blog post तरही ग़जलः
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन । तरही मुसायरे में प्रस्तुत गजल को यहाँ पोस्ट करना मंच के नियम विरूद्ध…"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chetan Prakash's blog post तरही ग़जलः
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन । तरही मुसायरे में प्रस्तुत गजल को यहाँ पोस्ट करना मंच के नियम विरूद्ध…"
13 hours ago
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय दण्डपाणि जी"
14 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service