For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बोझ ...(250 वीं रचना )

बोझ ...

हम
कहाँ जान पाते हैं
चेतन या अवचेतन में
अटकी हुई कुंठाओं की
मूक भाषा को

उनींदी सी अवस्था में
कुछ सिमटी हुई
आशाओं को

मन में उबलते
एक असीमित बोझ की
पहचान को

साँसों की थकान
अश्रु की व्यथा
और
रुदन के आह्वान को

तुम्हारे
स्पर्श की अनुभूति में लिप्त
क्षणों की
परिणिती के आभास ने
यूँ तो
अंजाने संताप से
मुक्ति का ढाढस दिया
किन्तु
जागृति बोध से
हृदय की कंदराओं में
क्यूँ रह रह के
ये विचार आता है
कि कहीं
ये किंचित मात्र सा आभास भी
किसी स्वप्न-रेख सा
ओझल हो गया तो
शायद
जीना भी
इक बोझ
न बन जाए

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 742

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on May 8, 2017 at 4:15pm

आदरणीया कल्पना भट्ट जी रचना के भावों को सहमति देती आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार। अपरिहार्य कारणों से आभार व्यक्त करने में विलम्ब हेतु क्षमा प्रार्थी हूँ।

Comment by Sushil Sarna on May 8, 2017 at 4:15pm

आदरणीय समर कबीर साहिब रचना के भावों को अपनी मधुर प्रशंसा से अलंकृत करने का हार्दिक आभार। अपरिहार्य कारणों से आभार व्यक्त करने में विलम्ब हेतु क्षमा प्रार्थी हूँ।

Comment by Sushil Sarna on May 8, 2017 at 4:15pm

आदरणीय गिरिराज जी भाई साहिब प्रस्तुति के भावों मान देती आपकी स्नेहिल प्रशंसा का दिल से आभार। अपरिहार्य कारणों से आभार व्यक्त करने में विलम्ब हेतु क्षमा प्रार्थी हूँ।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 7, 2017 at 9:21am
Bhavpurn rachna hui hai adarniya Sushil ji.
Comment by Samar kabeer on May 6, 2017 at 9:54pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,आपकी हर कविता सोचने पर मजबूर करती है,बहुत ख़ूब वाह, इस बहतरीन प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 5, 2017 at 8:08pm

आदरनीय सुशील भाई , एक् और अच्छी कविता के लिये आपको हार्दिक बधाई ।

Comment by Sushil Sarna on May 5, 2017 at 6:55pm

आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'  जी प्रस्तुति को अपनी मधुर प्रतिक्रिया से अलंकृत करने का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on May 5, 2017 at 6:55pm

आदरणीय  Mohammed Arif साहिब प्रस्तुति में निहित भावों को सहमति देती आपकी प्रशंसात्मक प्रतिक्रिया का दिल शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on May 5, 2017 at 6:55pm

आदरणीय  narendrasinh chauhan जी प्रस्तुति को आत्मीय मान देने का हार्दिक आभार।

Comment by नाथ सोनांचली on May 5, 2017 at 3:42am
आद0 सुशील सरना जी बेहद भावपूर्ण रचना, बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post अनसुने अनकहे के बीच
"आ. भाई विजय जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . झोला
"आ. भाई सुनील जी सुंदर कुंडलियां हुई हैं हार्दिक बधाई।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
Wednesday
sushil yadav posted blog posts
Oct 26
Sushil posted blog posts
Oct 26
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Oct 26
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service