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स्मृति पृष्ठ ...

स्मृति पृष्ठ ...

रजनी के
श्यामल कपोलों पर
मेघों की बूंदों ने
व्यथित यादों के
पृष्ठों पर जैसे
सान्तवना का
आभासीय श्रृंगार कर डाला

दृग कलशों से
सजल वेदना
प्रीत की
पराकाष्ठा को
चेहरे की लकीरों में
शोभित करती रही

प्राण और देह में
जीवन संघर्ष चलता रहा
किसी को विस्मरण करने के
सभी उपचार
रेत की भित्ति से
ढह गए

थके नयन
आशा क्षणों की
गहन कंदराओं में
प्रतीक्षा की विफलता के प्रहारों को
सह न सके

रक्ताभ अधरों पर
तरल प्रतीक्षा क्षण
पल भर रुके
फिर
बिन प्रतीक्षा
रजनी के
तारांचल पर गिर पड़े

प्रभात ने
उन क्षणों से
अपनी मांग सजा ली
रजनी को अपने में
समाहित कर लिया
चिर प्रतीक्षित क्षण
प्रभात बन

फिर से 
एक नया
स्मृति पृष्ठ बना गए

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on May 16, 2017 at 4:59pm
वाह आदरणीय बहुत उत्तम भावों से परिपूर्ण कविता हुई..सादर
Comment by Sushil Sarna on May 16, 2017 at 3:46pm

आदरणीय  narendrasinh chauhan    जी रचना के भावों को मान देने का हार्दिक आभार 

Comment by Sushil Sarna on May 16, 2017 at 3:45pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी रचना को अपना कीमती समय देने और उसकी प्रशंसा के लिए आपका हार्दिक आभार।  आपके अमूल्य सुझाव का शुक्रिया लेकिन इसमें मुझे कोई विशेष भाव परिवर्तन नज़र नहीं आता हालांकि सुझाव सुंदर है जो भविष्य के सृजन में काम आएगा। हार्दिक आभार ।  नेट व्यवधान से आभार व्यक्त करने में विलम्ब हेतु क्षमाप्रार्थी हूँ। 

Comment by Sushil Sarna on May 16, 2017 at 3:42pm

आदरणीया कल्पना भट्ट जी रचना के भावों को मान देने का शुक्रिया।  नेट व्यवधान से आभार व्यक्त करने में विलम्ब हेतु क्षमाप्रार्थी हूँ। 

Comment by narendrasinh chauhan on May 10, 2017 at 5:44pm

खूब सुन्दर रचना 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 10, 2017 at 8:25am

आदरणीय सुशील भाई , खूबसूरत भाव पूर्ण कविता के लिये बधाइयाँ । नीचे सम्भावित त्रुटि पर ध्यान दिलाना चाहता हूँ , मेरी सलाह सही लगे तो सुधार कर लीजियेगा ।

सान्तवना का
आभासीय श्रृंगार कर डाला  
या
सांत्वना का
आभासी श्रृंगार कर डाला

रेत की भित्ति से
ढह गए

रेत की भित्ति सी
ढह गयी

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 9, 2017 at 10:29pm
Sunder bhav aadarniya Sunil Sarna ji. Hardik badhayi
Comment by Sushil Sarna on May 9, 2017 at 8:29pm

आदरणीय आशुतोष जी प्रस्तुति को अपने स्नेह से सिंचित करने का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on May 9, 2017 at 8:28pm

आदरणीय मो. आरिफ साहिब प्रस्तुति के भावों को मान देने का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on May 9, 2017 at 8:28pm

आदरणीय समर कबीर साहिब आपकी सदा की तरह सृजन का हौसला बढ़ाती प्रशंसा का हार्दिक आभार।

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