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क्षणिकाएं (171 ) - डॉo विजय शंकर

प्यार भी कितना
अजीब होता है ,
वहां भी होता है
जहां नहीं होता है ,
तब भी होता है ,
जब नहीं होता है।......1.

नाराज़गी की
सौ वजहें होतीं हैं ,
एक प्यार है
जो बिला वजह होता है।.....2.

इस बेवफ़ाई की
कोई तो वजह होगी ,
हमारी ही वफ़ा में
कुछ कमी रह गई होगी। ......3.

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Dr. Vijai Shanker on January 12, 2017 at 7:42am
आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप जी ,आपकी विशद प्रतिक्रया के लिए आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on January 12, 2017 at 7:42am
आदरणीय विजय निकोर जी , आपके अनुमोदन और प्रतिक्रया के लिए आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on January 12, 2017 at 7:42am
आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी ,आपकी स्वीकृति और प्रतिक्रया के लिए आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by नाथ सोनांचली on January 11, 2017 at 3:05pm
आद0 विजय शंकर जी सादर अभिवादन, बेहतरीन क्षणिकाएँ पढ़ने को मिली, तारीफ़ में जो शब्द गुणीजनों ने जो कहा, उन शब्दों को मेरा भी शब्द समझें, सादर। बधाई आपको।
Comment by vijay nikore on January 11, 2017 at 1:30pm

बहुत ही खूबसूरत ! हार्दिक बधाई, आदरणीय विजय जी।

Comment by Mohammed Arif on January 11, 2017 at 8:15am
आदरणीय विजय शंकरजी, प्रेम का अंकन करती क्षणिकाओं के लिए आपको बधाई !
Comment by Dr. Vijai Shanker on January 11, 2017 at 5:09am
आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , आपने अपना शैर जोड़ कर क्षणिकाओं का सौन्दर्य बढ़ा दिया , क्षणिकाएं आपको अच्छी लगीं , खुशी हुयी। आपका दिल से आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on January 11, 2017 at 5:06am
आदरणीय नरेंद्र सिंह चौहान जी , आपका आभार एवं धन्यवाद, सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on January 11, 2017 at 5:04am
प्रिय मिथिलेश वामनकर जी , मरासिम शब्द के प्रयोग मात्र से आपने इन क्षणिकाओं का महत्व बढ़ा दिया। मेरा प्रयास तो वैसे भी हर बात के सरल से सरल अर्थ की ओर ही रहता है। दुनियाँ तो खुद ही कुछ उलझी हुयी है , कुछ सुलझ जाए .. . .
आपका बहुत बहुत आभार और धन्यवाद , सादर।
Comment by Samar kabeer on January 10, 2017 at 9:25pm
आली जनाब डॉ.विजय शंकर जी आदाब,आपकी दावत-ए-फ़िक्र देती क्षणिकाओं की तारीफ़ में "मुहब्बत"शीर्षक पर मेरी ग़ज़ल का एक शैर आपकी नज़्र करता हूँ :-
"ये मुहब्बत समझ में आई नहीं
देख ली हमने इन्तिहा कर के"
इस शानदार प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।

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