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रगो मे खून बनकर तेरे, यूँ “जुनून” बहता है

बिना मंज़िल के ना रुकना, ये सुकून कहता है

हुआ क्या राहों मे तेरे, जो बस पत्थर ही पत्थर है

चूमेंगे पाँव वो तेरे ये “जुनून” तुझसे कहता है

 

है मुश्किल सफर तेरा ये, गलियां तुझसे कहती है

चुनी ये राह जिसने भी, गुमान दुनिया करती है

तू देख कर चट्टानों को कभी हिम्मत नहीं खोना

पल भर की नाकामी पर तू भूल कर भी नहीं रोना

 

पहाड़ो मे सुराख कर दे, ये हिम्मत बस तुझी मे है

सीना चीर दे अंबर का, जुनूं जो है तो मुमकिन है

काम ऐसा जहाँ मे क्या जो तुझसे हो नहीं पाएगा

फैसला तू अगर कर ले, तो हर मंज़िल को पाएगा

 

सफर को बीच मे छोड़े, नहीं फितरत है ये तेरी

“ज़रूरत” तेरी मंज़िल है, नहीं है “आरज़ू” तेरी

जो चाहेगा तू पाएगा बस ये हौंसला रख ले

जीतेगा तू ही एक दिन, अगर तू हार को चख ले

 

"मौलिक व अप्रकाशित" 

अमन सिन्हा 

Views: 635

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Comment by Dr. Vijai Shanker on October 6, 2021 at 9:14am

आदरणीय अमन सिन्हा जी ,
हुआ क्या राहों मे तेरे, जो बस पत्थर ही पत्थर है
चूमेंगे पाँव वो तेरे ये “जुनून” तुझसे कहता है.
बहुत ही सुन्दर , प्रेरक प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई , सादर।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 5, 2021 at 5:39pm

आदरणीय अमन जी, आपके प्रयास के लिए बधाइयाँ. 

मात्राएँ और विन्यास पर समझ बढ़ाएँगे तो कहन में सान्द्रता बढ़ेगी. 

शुभ-शुभ

 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 4, 2021 at 2:39pm

आ. अमन जी, अभिवादन। सुन्दर रचना हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by AMAN SINHA on October 2, 2021 at 11:08am

@अमीरुद्दीन साहब, 

शुक्रिया, अभार 

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on October 1, 2021 at 7:30pm

जनाब अमन सिन्हा जी आदाब, ख़ूबसूरत ख़यालात और जज़्बात से पुर अच्छी रचना हुई है बधाई स्वीकार करें। सादर। 

Comment by AMAN SINHA on October 1, 2021 at 11:30am

@समर कबीर साहब, 

हौंसला बढाने के लिये धन्यवाद 

Comment by Samar kabeer on September 30, 2021 at 3:56pm

जनाब अमन सिन्हा जी आदाब. सुंदर प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें I 

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