For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Anwar suhail's Blog (70)

प्रण...

अचानक एक दिन

हुई उसके बचपन की हत्या

विवाह की वेदी ने दिया

एक नया घर-आँगन

एक नया रोल

एक नया अभिनय

एक नया डर...

अचानक एक दिन

ख़त्म हुई नादानियां

दफन हुईं लापरवाहियां

स्याह हुए स्वप्न

भोथरा गईं कल्पनाएँ....

अचानक एक दिन

उठाना पडा भारी-भरकम

संस्कारों का पिटारा

जिम्मेदारियों का बोझ

मानसिक-शारीरिक तब्दीलियाँ

और शिथिल हुए स्नायु-तंत्र...

दीखता नही दूर-दूर तक

इस मायाजाल से…

Continue

Added by anwar suhail on January 6, 2014 at 11:40pm — 7 Comments

खुश हो जाते हैं वे

खुश हो जाते हैं वे

पाकर इत्ती सी खिचड़ी

तीन-चार घंटे भले ही

इसके लिए खडा रहना पड़े पंक्तिबद्ध ...

खुश हो जाते हैं वे

पाकर एक कमीज़ नई

जिसे पहनने का मौका उन्हें

मिलता कभी-कभी ही है

खुश हो जाते हैं वे

पाकर प्लास्टिक की चप्पलें

जिसे कीचड या नाला पार करते समय

बड़े जतन से उतारकर रखते बाजू में दबा...

ऐसे ही

एक बण्डल बीडी

खैनी-चून की पुडिया

या कि साहेब की इत्ती सी शाबाशी पाकर

फूले नही समाते…

Continue

Added by anwar suhail on January 4, 2014 at 9:33pm — 9 Comments

कागज़ पर अंकित नक्शा नही है देश...

उन्हें विरासत में मिली है सीख

कि देश एक नक्शा है कागज़ का

चार फोल्ड कर लो

तो रुमाल बन कर जेब में आ जाये

देश का सारा खजाना

उनके बटुवे में है

तभी तो कितनी फूली दीखती उनकी जेब

इसीलिए वे करते घोषणाएं

कि हमने तुम पर

उन लोगों के ज़रिये

खूब लुटाये पैसे

मुठ्ठियाँ भर-भर के



विडम्बना ये कि अविवेकी हम

पहचान नही पाए असली दाता को

उन्हें नाज़ है कि

त्याग और बलिदान का

सर्वाधिकार उनके पास सुरक्षित…

Continue

Added by anwar suhail on December 10, 2013 at 9:30pm — 9 Comments

सब कुछ वैसा ही हो जाये

सब कुछ वैसा ही हो जाये

जैसा हमने चाहा था

जैसा हमने सोचा था

जैसा सपना देखा था

सब कुछ वैसा ही हो जाये

लेकिन वैसा कब होता है

कुछ पाते हैं, कुछ खोता है

ठगा-ठगा निर्धन रोता है

थका-हारा, भूखा सोता है

तुम हम सबको बहलाते हो

नाहक सपने दिखलाते हो

अपने पीछे दौडाते हो

गुर्राते हो, धमकाते हो

और हमारे गिरवी दिल में

बात यही भरते रहते हो

सब कुछ वैसा हो जायेगा

जैसा हम सोचा करते हैं

जैसा हम…

Continue

Added by anwar suhail on December 8, 2013 at 9:00pm — 5 Comments

मतदाता

बताया जा रहा हमें 

समझाया जा रहा हमें 

कि हम हैं कितने महत्वपूर्ण

लोकतंत्र के इस महा-पर्व में 

कितनी महती भूमिका है हमारी 



ई वी एम  के पटल पर

हमारी एक ऊँगली के

ज़रा से दबाव से 

बदल सकती है उनकी किस्मत 



कि हमें ही लिखनी है

किस्मत उनकी 

इसका मतलब

हम भगवान् हो…

Continue

Added by anwar suhail on November 13, 2013 at 8:00pm — 10 Comments

कैसा भरम

उन अधखुली

ख्वाबीदा आँखों ने

बेशुमार सपने बुने



सूखी भुरभरी रेत के

घरौंदे बनाए

चांदनी के रेशों से

परदे टाँगे

सूरज की सेंक से

पकाई रोटियाँ

आँखें खोल उसने

कभी देखना न चाहा

उसकी लोलुपता

उसकी ऐठन

उसकी भूख

शायद

वो चाहती नही थी

ख्वाब में मिलावट

उसे तसल्ली है

कि उसने ख्वाब तो पूरी

इमानदारी से देखा

बेशक

वो ख्वाब में डूबने के दिन थे

उसे ख़ुशी है

कि उन…

Continue

Added by anwar suhail on November 7, 2013 at 9:30pm — 8 Comments

उसके बिना...

वो मुझे याद करता है 

वो मेरी सलामती की

दिन-रात दुआएं करता है 

बिना कुछ पाने की लालसा पाले 

वो सिर्फ सिर्फ देना ही जानता है 

उसे खोने में सुकून मिलता है 

और हद ये कि वो कोई फ़रिश्ता नही 

बल्कि एक इंसान है 

हसरतों, चाहतों, उम्मीदों से भरपूर...

उसे मालूम है मैंने 

बसा ली है एक अलग दुनिया 

उसके बगैर जीने की मैंने 

सीख ली है कला...

वो मुझमें घुला-मिला है इतना 

कि उसका उजला रंग और…

Continue

Added by anwar suhail on November 4, 2013 at 7:36pm — 6 Comments

कैसे गाऊँ गान....

तुमसे इश्क में भीगी बातें करनी थीं 

लेकिन किसान का मायूस चेहरा 

आता रहा बार-बार सामने 



तुम्हारी घनी जुल्फों के साए में छुपना था 

कि कार्तिक मास में 

असमय छाये काले पनीले

मनहूस बादलों ने ग़मगीन किया मुझे 



तुम्हारी खनकती हंसी सुननी थी 

कि किसानो के आर्तनाद ने रोक लिया 



तुम्हे मालूम है 

कि…

Continue

Added by anwar suhail on October 28, 2013 at 7:29pm — 7 Comments

धान..कब आओगे खलिहान!

आकाश में छाये काले बादल

किसान के साथ-साथ 

अब मुझे भी डराने लगे हैं...



ये काले बादलों का वक्त नही है 

ये तेज़ धुप और गुलाबी हवाओं का समय है 

कि खलिहान में आकर बालियों से धान अलग हो जाए 

कि धान के दाने घर में पारा-पारी पहुँचने लगें 

कि घर में समृद्धि के लक्षण दिखें 

कि दीपावली में लक्ष्मी का स्वागत हो…

Continue

Added by anwar suhail on October 27, 2013 at 8:02pm — 2 Comments

बाज़ार में स्त्री

छोड़ता नही मौका

उसे बेइज्ज़त करने का कोई



पहली डाले गए डोरे 

उसे मान कर तितली 

फिर फेंका गया जाल 

उसे मान कर मछली 

छींटा गया दाना

उसे मान कर चिड़िया



सदियों से विद्वानों ने 

मनन कर बनाया था सूत्र 

"स्त्री चरित्रं...पुरुषस्य भाग्यम..."

इसीलिए उसने खिसिया कर 

सार्वजनिक रूप से 

उछाला उसके चरित्र पर कीचड...…

Continue

Added by anwar suhail on October 26, 2013 at 8:30pm — 10 Comments

किताबें

बड़े जतन से संजोई किताबें 

हार्ड बाउंड किताबें 

पेपरबैक किताबें 

डिमाई और क्राउन साइज़ किताबे 

मोटी किताबें, पतली किताबें 

क्रम से रखी नामी पत्रिकाओं के अंक 

घर में उपेक्षित हो रही हैं अब...

इन किताबों को कोई पलटना नही चाहता 

खोजता हूँ कसबे में पुस्तकालय की संभावनाएं 

समाज के कर्णधारों को बताता हूँ 

स्वस्थ समाज के निर्माण में 

पुस्तकालय की भूमिका के बारे में...

कि किताबें इंसान को अलग करती हैं हैवान से 

कि मेरे पास रखी इन…

Continue

Added by anwar suhail on October 17, 2013 at 9:30pm — 11 Comments

सपने बिना जीवन

आजकल अक्सर

टीसती रहती हैं

माथे पर उभर आई नसें



मटमैली-लाल होकर

दुखने लगती हैं आँखें



चेहरे पर बरसती रहती है फटकार

पपडियाये होंठों से हठात

निकलती हैं सूखी गालियाँ



खोजती रहती हैं नज़रें

दूर-दूर तक

क्षितिज से टकराकर

खाली हाथ लौट आती हैं निगाहें

दिमाग में ख्यालों का अकाल

दिल में कल्पनाओं के टोटे...



सब तरफ एक सन्नाटा...

कोई आहट...न कोई…

Continue

Added by anwar suhail on October 14, 2013 at 9:00pm — 9 Comments

थेथर

जुग की मांग 

समय की डिमांड 

बात मेरी मान 

बन जाएँ थेथर श्रीमान....



सलीकेदार लोगों को 

जीने नही देगा समाज 

भले से अच्छा था विगत 

लेकिन बहुत क्रूर है आज 



जीने की ये कला 

जिसे सीखने में सबका भला 

वरना रह जाओगे तरसते 

आपका हिस्सा ये थेथर 

झटक लेंगे हँसते-हस्ते...



हम जिस समय में जी रहे हैं 

उसमे बदतमीज़,…

Continue

Added by anwar suhail on October 8, 2013 at 10:05pm — 8 Comments

चले आओ जहां हो तुम

दर्द रह-रह के बढ़ता है

और दिल डूबा जाता है

नब्ज़ थम-थम के चलती है

दिल ज़ोरों से धड़कता है

बीमारी बढती जाती है

फ़िक्र है खाए जाती है

सलाहें खूब मिलती हैं

दवाएं बदलती जाती हैं

दुआएं काम नही आतीं

करें क्या ऐसे में हमदम

कहाँ से चारागर पायें

मत्था किस दर पर टेंकें

कहाँ से तावीजें लायें

तुम्हे मालुम है फिर भी

छुपा कर रक्खे हो नुस्खे

न लो अब और इम्तेहाँ

चले आओ जहां हो तुम

तुम्हारे आते ही हमदम …

Continue

Added by anwar suhail on October 5, 2013 at 9:30pm — 12 Comments

टिफिन में कैद रूह

हम क्या हैं

सिर्फ पैसा बनाने की मशीन भर न !

इसके लिए पांच बजे उठ कर

करने लगते हैं जतन

चाहे लगे न मन

थका बदन

ऐंठ-ऊँठ कर करते तैयार

खाके रोटियाँ चार

निकल पड़ते टिफिन बॉक्स में कैद होकर

पराठों की तरह बासी होने की प्रक्रिया में

सूरज की उठान की ऊर्जा

कर देते न्योछावर नौकरी को

और शाम के तेज-हीन सूर्य से ढले-ढले

लौटते जब काम से

तो पास रहती थकावट, चिडचिडाहट,

उदासी और मायूसी की परछाइयां

बैठ जातीं कागज़ के…

Continue

Added by anwar suhail on October 4, 2013 at 8:00pm — 9 Comments

हमारे ज़माने में माएं

मैं कैसे बताऊँ बिटिया

हमारे ज़माने में माँ कैसी होती थी

तब अब्बू किसी तानाशाह के ओहदे पर बैठते थे

तब अब्बू के नाम से कांपते थे बच्चे

और माएं बारहा अब्बू की मार-डांट से हमें बचाती थीं

हमारी छोटी-मोटी गलतियां अब्बू से छिपा लेती थीं

हमारे बचपन की सबसे सुरक्षित दोस्त हुआ करती थीं माँ

हमारी राजदार हुआ करती थीं वो

इधर-उधर से बचाकर रखती थीं पैसे

और गुपचुप देती थी पैसे सिनेमा, सर्कस के लिए

अब्बू से हम सीधे कोई…

Continue

Added by anwar suhail on September 29, 2013 at 9:30pm — 5 Comments

अधूरी लड़ाइयों का दौर

एक धमाका 

फिर कई धमाके 

भय और भगदड़....



इंसानी जिस्मों के बिखरे चीथड़े 

टीवी चैनलों के ओबी वैन 

संवाददाता, कैमरे, लाइव अपडेट्स 

मंत्रियों के बयान 

कायराना हरकत की निंदा 

मृतकों और घायलों के लिए अनुदान की घोषणाएं 



इस बीच किसी आतंकवादी संगठन द्वारा 

धमाके में लिप्त होने की स्वीकारोक्ति 

पाक के नापाक साजिशों का ब्यौरा 

सीसीटीवी कैमरे की जांच 

मीडिया में हल्ला, हंगामा, बहसें 

गृहमंत्री, प्रधानमन्त्री से स्तीफे…

Continue

Added by anwar suhail on September 28, 2013 at 8:00pm — 6 Comments

आह्वान

ये क्या हो रहा है

ये क्यों हो रहा है

नकली चीज़ें बिक रही हैं

नकली लोग पूजे जा रहे हैं...

नकली सवाल खड़े हो रहे हैं

नकली जवाब तलाशे जा रहे हैं

नकली समस्याएं जगह पा रही हैं

नकली आन्दोलन हो रहे हैं

अरे कोई तो आओ...

आओ आगे बढ़कर 

मेरे यार को समझाओ

उसे आवाज़ देकर बुलाओ...

वो मायूस है

इस क्रूर समय में

वो गमज़दा है निर्मम संसार में...

कोई नही आता भाई..

तो मेरी आवाज़ ही सुन लो 

लौट आओ

यहाँ दुःख बाटने की परंपरा…

Continue

Added by anwar suhail on September 25, 2013 at 7:30pm — 7 Comments

मिस्टेक न हो जाए

इससे पहले कभी 

कहा नही जाता था 

तो बम के साथ हम 

फट जाते थे कहीं भी

और उड़ा देते थे चीथड़े 

इंसानी जिस्मों के...



अब कहा जा रहा है 

मारे न जायें अपने आदमी 

सो पूछ-पूछ कर 

जवाब से मुतमइन होकर 

मार रहे हैं हम...



बस समस्या भाषा की है 

उन्हें समझ में नही आती

हमारी भाषा 

हमें समझ में नही आती 

उनकी बोली 



हेल्लो हेल्लो 

क्या करें हुज़ूर..

एक तरफ आपका फरमान 

दूजे टारगेट की…

Continue

Added by anwar suhail on September 24, 2013 at 6:30pm — 7 Comments

फिर क्यों ?

ऐसा नही है 

कि रहता है वहाँ घुप्प अन्धेरा 

ऐसा नही है 

कि वहां सरसराते हैं सर्प 

ऐसा नही है 

कि वहाँ तेज़ धारदार कांटे ही कांटे हैं 

ऐसा नही है 

कि बजबजाते हैं कीड़े-मकोड़े 

ऐसा भी नही है 

कि मौत के खौफ का बसेरा है 



फिर क्यों 

वहाँ जाने से डरते हैं हम 

फिर क्यों 

वहाँ की बातें भी हम नहीं करना चाहते 

फिर क्यों 

अपने लोगों को

बचाने की जुगत लागाते हैं हम 

फिर क्यों 

उस आतंक को घूँट-घूँट पीते हैं…

Continue

Added by anwar suhail on September 20, 2013 at 7:00pm — 7 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-125 (आत्मसम्मान)
"सादर नमस्कार। हार्दिक स्वागत आदरणीय दयाराम मेठानी साहिब।  आज की महत्वपूर्ण विषय पर गोष्ठी का…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शेष रखने कुटी हम तुले रात भर -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई गिरिराज जी , सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार।"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शेष रखने कुटी हम तुले रात भर -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ.भाई आजी तमाम जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
9 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-125 (आत्मसम्मान)
"विषय - आत्म सम्मान शीर्षक - गहरी चोट नीरज एक 14 वर्षीय बालक था। वह शहर के विख्यात वकील धर्म नारायण…"
9 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . .

कुंडलिया. . .चमकी चाँदी  केश  में, कहे उम्र  का खेल । स्याह केश  लौटें  नहीं, खूब   लगाओ  तेल ।…See More
9 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . .
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
19 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post भादों की बारिश
"आदरणीय सुरेश कल्याण जी, आपकी लघुकविता का मामला समझ में नहीं आ रहा. आपकी पिछ्ली रचना पर भी मैंने…"
20 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय गिरिराज भाईजी, आपकी प्रस्तुति का यह लिहाज इसलिए पसंद नहीं आया कि यह रचना आपकी प्रिया विधा…"
20 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . .
"आदरणीय सुशील सरनाजी, आपकी कुण्डलिया छंद की विषयवस्तु रोचक ही नहीं, व्यापक भी है. यह आयुबोध अक्सर…"
20 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Aazi Tamaam's blog post तरही ग़ज़ल: इस 'अदालत में ये क़ातिल सच ही फ़रमावेंगे क्या
"आदरणीय आजी तमाम भाई, आपकी प्रस्तुति पर आ कर पुरानी हिंदी से आवेंगे-जावेंगे वाले क्रिया-विषेषण से…"
20 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post कापुरुष है, जता रही गाली// सौरभ
"आदरणीय सुशील सरनाजी, आपके अनुमोदन के लिए हार्दिक आभार"
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Saurabh Pandey's blog post कापुरुष है, जता रही गाली// सौरभ
"वाह आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी एक अलग विषय पर बेहतरीन सार्थक ग़ज़ल का सृजन हुआ है । हार्दिक बधाई…"
yesterday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service