For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

July 2026 Blog Posts (5)

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार पर



जब-जब जहाँ कहीं फूल खिले

याद तुझे किया था हमने ...



कहती थी न ...

"क्या...

तुम्हारे मन के द्वार तक

मेरे दिल की दस्तक नहीं पहुंची ?"



दस्तक पहुँची

पहुँची हर बार

भाग कर साँकल खोली

कोई था न द्वार पर

चिरकाल से जाने-पहचाने

अकेलेपन के सिवा

हाँ, इस दर्दीले

अकेलेपन के सिवा

कुछ और न था

लौट आया मैं खाली हाथ

न, न, न

मुठ्ठी में लिखा नाम तो

तुम्हारा ही था

केवल… Continue

Added by vijay nikore on July 27, 2026 at 9:00am — 1 Comment

हरिगीतिका छंद

  

हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।

यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम लो।

करते  रहो  नित  भक्ति  प्रभु  की, नित्य प्रभु आराधना।

तब  बिन  कहे   हर  एक  होगी,  पूर्ण   मंगल  कामना।।   

*

आ  जाइये  प्रभु …

Continue

Added by Ashok Kumar Raktale on July 24, 2026 at 7:26pm — 4 Comments

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखी

शोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।

भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत ।।

अधरों ने की दिल्लगी, अधरों से कल रात ।

जिसका डर था हो गई, शर्मीली सी बात ।।

बारिश में अच्छा लगे, नजरों को संवाद ।

इच्छाओं का मन करे, मिल कर फिर अनुवाद ।।

हल्की- हल्की जब पड़ी, यौवन पर बौछार ।

प्रणय निवेदन में गया, तन ही तन से हार ।।

मिलने की बेताबियाँ, नजरों के  अनुरोध ।

उन्मादों में कब हुआ, सही - गलत का बोध ।।

सुशील…

Continue

Added by Sushil Sarna on July 21, 2026 at 1:21pm — No Comments

चौपाइयाँ

दोहा

बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।

दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। 

चौपाई

वह फुहार वह साथ तुम्हारा। हरपल था सुरभित अति प्यारा।।

मन   साजन  यह  कैसे  भूले। साथ-साथ   तुम  हम  थे   झूले।।

*

तुम   थे  झूले   थाम   कलाई। मैं   साजन   कितनी  शरमाई।।

तुम  जब-जब  थे  पींग बढ़ाते। हम   इक  दूजे  में   खो  जाते।।

*

झुकीं-झुकीं  मेरी  ये  अँखियाँ। देख रहीं थीं हँस-हँस  सखियाँ।।

पर  साजन  तुम  रुके न माने।…

Continue

Added by Ashok Kumar Raktale on July 14, 2026 at 12:30pm — 4 Comments

बरसात

बरसात

 

घन गरजे अंधियारी छाई,

बिजली अम्बर पर इठलाई  

बूँदें टपकी टप-टप भाई

रिमझिम रिमझिम बारिश आई

 

पत्ते खड़के भीगे लरजे

चिड़िया सहमी बादल गरजे,

कुत्ते दुबके गैया भागी

इक नन्हीं सी गुड़िया जागी

सुनकर उसकी तेज रुलाई

रिमझिम रिमझिम बारिश आई

 

सड़कों से बह निकला पानी

राहगीरों ने छतरी तानी,

छप-छप करते कदम बढ़ाते

ठोकर खाते गिरते जाते

बूँदें ले आयीं…

Continue

Added by Ashok Kumar Raktale on July 4, 2026 at 10:33pm — 4 Comments

  • ❮ First
  • Next ❯

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
21 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Saturday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Saturday
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service