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Janki wahie
  • Noida,UP
  • India
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Latest Activity

Mahendra Kumar commented on Janki wahie's blog post हौसला ( लघुकथा -जानकी बिष्ट वाही )
"आ. जानकी वाही जी, अच्छी लगी आपकी लघुकथा. शुरुआत की पंक्तियाँ कहानी अथवा उपन्यास के लिए मुझे ज्यादा मुफ़ीद लगीं हालाँकि शब्दों का चयन आपने बहुत अच्छा किया है. मुख्य पात्र के अन्तिम संवाद में संभवतः थोड़े से सम्पादन की आवश्यकता है. मेरी तरफ़ से हार्दिक…"
18 hours ago
Nita Kasar commented on Janki wahie's blog post हौसला ( लघुकथा -जानकी बिष्ट वाही )
"व्यथित युवा की मनोदशा को बख़ूबी उकेरा है आपने कथा के जरिये बधाई आद० जानकी वाही जी ।"
22 hours ago
Samar kabeer commented on Janki wahie's blog post हौसला ( लघुकथा -जानकी बिष्ट वाही )
"मोहतरमा जानकी वाही जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
23 hours ago
Janki wahie commented on Janki wahie's blog post हौसला ( लघुकथा -जानकी बिष्ट वाही )
"हार्दिक आभार आ.विजय निकोर जी।"
yesterday
Janki wahie commented on Janki wahie's blog post हौसला ( लघुकथा -जानकी बिष्ट वाही )
"सादर अभिवादन और हार्दिक आभार आ. वीरेंद्र वीर जी। आपककथा पर अनुमोदन उत्साह वर्धन करने वाला है साथ ही और बेहतर लेखन को प्रेरित करने वाला भी।"
yesterday
Janki wahie commented on Janki wahie's blog post हौसला ( लघुकथा -जानकी बिष्ट वाही )
"सादर अभिवादन और हार्दिक आभार आ.सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी।आपके द्वारा की गई हौसला अफ़जाई बेहतर लेखन को प्रेरित करेगी।"
yesterday
Janki wahie commented on Janki wahie's blog post हौसला ( लघुकथा -जानकी बिष्ट वाही )
"कथा पर उपस्थित होकर हौसला अफ़जाई करने हेतु हार्दिक आभार आ.विजय शंकर जी।"
yesterday
VIRENDER VEER MEHTA commented on Janki wahie's blog post हौसला ( लघुकथा -जानकी बिष्ट वाही )
"सुन्दर कथ्य लिए बेहतरीन रचना... सकारात्मक अंत लिए इस अच्छी लघु कथा के लिए, हार्दिक बधाई स्वीकार करें...जानकी जी"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Janki wahie's blog post हौसला ( लघुकथा -जानकी बिष्ट वाही )
"आदरणीया जानकी जी सादर अभिवादन, बेहतरीन कथानक,अच्छा ताना-बाना, एक सकारात्मक सोच की को प्रतिबिंबित करती अच्छी लघु कथा । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
vijay nikore commented on Janki wahie's blog post हौसला ( लघुकथा -जानकी बिष्ट वाही )
"इस अच्छी लघु कथा के लिए बधाई, आदरणीया जानकी जी।"
yesterday
Dr. Vijai Shanker commented on Janki wahie's blog post हौसला ( लघुकथा -जानकी बिष्ट वाही )
"आदरणीय सुश्री जानकी बिष्ट जी , कुछ अलग सी इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई, सादर।"
yesterday
Janki wahie commented on Janki wahie's blog post हौसला ( लघुकथा -जानकी बिष्ट वाही )
"हार्दिक आभार आ.मोहम्मद आरिफ़ जी।आपकी टिप्पणी उत्साह बढ़ाने वाली है।"
yesterday
Janki wahie commented on Janki wahie's blog post हौसला ( लघुकथा -जानकी बिष्ट वाही )
"हार्दिक आभार आ. शहज़ाद जी, हर टिप्पणी रास्ता दिखाती है।"
yesterday
Mohammed Arif commented on Janki wahie's blog post हौसला ( लघुकथा -जानकी बिष्ट वाही )
"आदरणीया जानकी जी आदाब, बेहतरीन कथानक,अच्छा ताना-बाना, जिज्ञासा का संचार करने में सफल और सकारात्मक सोच की प्रतीक कथा । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Janki wahie's blog post हौसला ( लघुकथा -जानकी बिष्ट वाही )
""मैं" का बढ़िया प्रयोग।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Janki wahie's blog post हौसला ( लघुकथा -जानकी बिष्ट वाही )
"दो पात्रों के मनोभाव/कशमकश को भाव-भंगिमाओं, संवादों और भूमिका में बांधते हुए बढ़िया समापन के साथ बढ़िया प्रस्तुति के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय जानकी बिष्ट वाही जी। शुरू की दस पंक्तियों व अंतिम संवाद को तनिक सम्पादित कर बेहतर रूप दिया जा सकता है…"
Saturday

Profile Information

Gender
Female
City State
Noida
Native Place
Pithoragarh
Profession
Service

Janki wahie's Blog

हौसला ( लघुकथा -जानकी बिष्ट वाही )

गोधूलि बेला में भी जब वह नौजवान उस चट्टान से नहीं उठा तो तो मेरा मन आशंकित हो उठा।साँझ तेजी से कालिमा के आगोश में समा रही थी और सागर की उत्ताल लहरें पागलों की तरह उस नौजवान के पाँवों से कुछ नीचे चट्टानों पर अपना सिर पटक रही थीं।

जब भी मैं कभी उदास या खुश होता हूँ तो यहाँ आकर सागर को निहारना मुझे सुक़ून देता है।



अब मैं घर जाना चाहता है पर उस नौजवान की भावभँगिमा मेरे पाँवों की बेड़ी बन मुझे रोक रही है।



"छोड़ो ,मुझे क्या? होगा कोई ? मैंने क्या सारी दुनिया का ठेका ले रखा… Continue

Posted on September 23, 2017 at 1:19pm — 18 Comments

पिछड़ा आदमी **( लघुकथा---जानकी बिष्ट वाही। )

" लगता है कोई छोटा सा स्टेशन है ये ? क्यों रुकी होगी ? सुपर फ़ास्ट ट्रेन तो रूकती नहीं ऐसे स्टेशनों पर?"



एसी.कोच में देश-विदेश की राजनीति ,अर्थव्यवस्था ,फ़िल्मी दुनिया , फैशन ,रेप भ्रूण हत्या, स्त्री विमर्श, जेनरेशन गैप , किसान आत्महत्या ,अराजकता , तलाक अन्तरिक्ष मिशन और आरक्षण पर से होती गरमागरम बहस से थक चुके अनुज ने खिड़की से बाहर का ज़ायज़ा लेते हुए कहा।पर किसी ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया सिवाय मोनिता के,वह उत्सुकता से बाहर देखने लगी।



छुट्टियों में घर लौटते… Continue

Posted on July 28, 2017 at 2:40pm — 4 Comments

गरीब सैंटा की अमीरी ( लघु कथा ) जानकी बिष्ट वाही- नॉएडा

" आज कड़ाके की ठण्ड है।" कहते हुए उसने दोनों हाथों को आपस में रगड़ कर अपने अंदर गर्मी का अहसास जगाया। बदन पर पहनी एकमात्र कमीज और पतली सी सांता क्लॉज की ड्रेस उसको गर्म रखने में नाक़ाम लग रही थी।

" ममा ! देखो सैंटा " एक छह या सात साल का बच्चा उसकी ओर उत्सुकता से देखने लगा।

" सारी सुस्ती छोड़कर उसने मुस्कुराते मुखौटे के अंदर ठण्डी साँस भरी और मुठ्ठी टॉफियों के साथ गर्मजोशी से बच्चे की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया।

"थैंक्यू सैंटा !" बच्चे ने लपक कर टॉफियां पकड़ ली।साथ ही उसके पापा ने…

Continue

Posted on December 20, 2016 at 1:30pm — 14 Comments

बड़े होकर मैं - ( लघुकथा ) जानकी बिष्ट वाही

" ऐ भाई ... दे दे ना ..."

"फिर आ गया तू ! चल भाग यहाँ से।"

" भाई ! एक दे दे ना,तुमको तो रोज बहुत मिलता है।"

" तेरी समझ में नहीं आता? ये जगह बच्चों के लिए नहीं ... अरे ! अभी भी यहीं खड़ा है ? लगाऊँ क्या एक ?"

" भाई ! आप बहुत अच्छे हो !एक दे दो, फिर नहीं आऊँगा यहाँ ।" अब उस लगभग बारह साल के बच्चे ने मस्का लगाने की कोशिश की।

" बड़ा ज़िद्दी है।कौन - कौन है तेरे घर में ?"

" माँ,छोटी बहन और मैं ।"

" और तेरा बाप ?"

" वो तो हमें छोड़ कर चला गया।उसने दूसरी शादी कर ली।"…

Continue

Posted on December 12, 2016 at 12:00pm — 21 Comments

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At 9:23am on January 28, 2016, Madanlal Shrimali said…
आ.जानकी वाही जी ...आपकी लघुकथा "मायरा" को ओबीओ में "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
At 12:55pm on January 27, 2016, kanta roy said…

दिल से ढेरों बधाई आपको आदरणीया जानकी जी, आपकी सार्थक लघुकथा "मायरा " को इस प्रतिष्ठित  मंच " obo " की "महीने की सर्वश्रेष्ठ " रचना का सम्मान पाने हेतु।  वाकई आपने बेहतरीन लघुकथा सृजित की है।  मुग्ध हूँ ।  

At 4:44pm on January 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया जानकी बिष्ठ वाही जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "मायरा" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 3:41am on July 16, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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At 4:54pm on July 13, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
 
 
 

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