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Janki wahie
  • Noida,UP
  • India
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Janki wahie replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"नए कथ्य पर बढ़िया कथा रश्मि जी हार्दिक बधाई।"
May 30
Janki wahie replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"आ.ओम प्रकाश सर जी, बहुत बढ़िया कथानक पर बढ़िया कथा प्रस्तुत की आपने .हार्दिक बधाई."
May 30
Janki wahie replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"बहुत ही सुंदर प्रतीकों का प्रयोग कर आपने एक नए तरीके से कथा को लिखा है जो पाठकों को अपनी ओर खींचने में समर्थ है। कथा का शिल्प भी बहुत बढ़िया है।हार्दिक बधाई आपको।"
May 30
Janki wahie replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"वाह! बेहतरीन कथ्य शिल्प के साथ सार्थक कथा।समसामयिक विषय के अंतर्गत ये कथा अपनी बात कहने में पूरी तरह सफ़ल रही। पूरे चाँद की रात भी कहाँ इंसान केककलुषित मनोभावों को जगमग कर सकती है। इस बेहतरीन कथा के लिए दिल से बधाई लीजिये अपराजिता जी।"
May 30
Janki wahie replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"बेहतरीन कथ्य ने मन मोह लिया।परिंदों को किसने सीमाओं मे बाँधा।परिंदों क्य जाने धर्म क भाषा। मनुष्य के स्वार्थी स्वभाव को दिखाती सशक्त कथा के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिये आ. तस्किद् अहमद खान साहब।"
May 30
Janki wahie replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"आयोजन का श्रीगणेश करने के लिए हार्दिक बधाई नयना जी।"
May 30
Janki wahie replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"हम तो जस के तस **( सबक ) "अरे ! जल्दी -जल्दी हाथ चलाओ , अभी बहुत काम पड़ा है!" काला चश्मा पहने आदमी की आवाज़ में हड़बड़ी थी। कलुवा ने देखा उसका मिट्टी से बना घर जो कल रात सुंदर सुंदर चीजों से जगमगा रहा था अब फिर से खण्डहर में बदलने लगा…"
May 30
Janki wahie replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-25 (रजत जयंती)
"कथा की विस्तृत समीक्षा हेतु सादर आभार आ.नील वशिष्ठ जी।"
Apr 30
Janki wahie replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-25 (रजत जयंती)
"विस्तृत समीक्षा कर मार्ग दर्शन करने हेतु हार्दिक आभार आ.रवि सर जी।"
Apr 29
Janki wahie replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-25 (रजत जयंती)
"हार्दिक आभार आ. ओम प्रकाश जी"
Apr 29
Janki wahie replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-25 (रजत जयंती)
"वाह! बहुत ही सटीक और बढ़िया कथा बनी ये ।हार्दिक बधाई आ.ओम प्रकाश जी।"
Apr 29
Janki wahie replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-25 (रजत जयंती)
"अँ विश्वास के ताने बाने की बखिया उधेड़ती सुंदर कथा के लिए बधाई सन्ध्या जी"
Apr 29
Janki wahie replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-25 (रजत जयंती)
"बहुत ही शानदार कथा है ये अपने नवीन कथ्य से पाठकों को अपनी ओर खींचने में समर्थ हार्दिक बधाई आपको समर कबीर साहब जी"
Apr 29
Janki wahie replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-25 (रजत जयंती)
"तहेदिल से शुक्रिया आ.प्रतिभा जी हौसला बढ़ाने के लिए"
Apr 29
Janki wahie replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-25 (रजत जयंती)
"तहेदिल से शुक्रियस नीता कसार जी"
Apr 29
Janki wahie replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-25 (रजत जयंती)
"शुक्रिया सखी"
Apr 29

Profile Information

Gender
Female
City State
Noida
Native Place
Pithoragarh
Profession
Service

Janki wahie's Blog

गरीब सैंटा की अमीरी ( लघु कथा ) जानकी बिष्ट वाही- नॉएडा

" आज कड़ाके की ठण्ड है।" कहते हुए उसने दोनों हाथों को आपस में रगड़ कर अपने अंदर गर्मी का अहसास जगाया। बदन पर पहनी एकमात्र कमीज और पतली सी सांता क्लॉज की ड्रेस उसको गर्म रखने में नाक़ाम लग रही थी।

" ममा ! देखो सैंटा " एक छह या सात साल का बच्चा उसकी ओर उत्सुकता से देखने लगा।

" सारी सुस्ती छोड़कर उसने मुस्कुराते मुखौटे के अंदर ठण्डी साँस भरी और मुठ्ठी टॉफियों के साथ गर्मजोशी से बच्चे की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया।

"थैंक्यू सैंटा !" बच्चे ने लपक कर टॉफियां पकड़ ली।साथ ही उसके पापा ने…

Continue

Posted on December 20, 2016 at 1:30pm — 14 Comments

बड़े होकर मैं - ( लघुकथा ) जानकी बिष्ट वाही

" ऐ भाई ... दे दे ना ..."

"फिर आ गया तू ! चल भाग यहाँ से।"

" भाई ! एक दे दे ना,तुमको तो रोज बहुत मिलता है।"

" तेरी समझ में नहीं आता? ये जगह बच्चों के लिए नहीं ... अरे ! अभी भी यहीं खड़ा है ? लगाऊँ क्या एक ?"

" भाई ! आप बहुत अच्छे हो !एक दे दो, फिर नहीं आऊँगा यहाँ ।" अब उस लगभग बारह साल के बच्चे ने मस्का लगाने की कोशिश की।

" बड़ा ज़िद्दी है।कौन - कौन है तेरे घर में ?"

" माँ,छोटी बहन और मैं ।"

" और तेरा बाप ?"

" वो तो हमें छोड़ कर चला गया।उसने दूसरी शादी कर ली।"…

Continue

Posted on December 12, 2016 at 12:00pm — 21 Comments

ख़ाना ख़राब (लघुकथा) जानकी बिष्ट वाही

दो दिन से भूखा-प्यासा कबीर धूल भरी पगडंडियों में भटक रहा है।अज़ब है उसकी जिंदगी भी,दुनिया वालों के लिए अनाथ और पागल, न उसकी कोई जाति न कोई धर्म,जाने किसने,कब ,कहाँ,उसका नाम कबीर रख दिया। लोगों के रहमों करम से मिल गया तो खा लिया, हिन्दू के घर से रोटी ली तो मुसलमान के घर से सब्जी, स्वाद में कोई फ़र्क नहीं। गाँव दर गाँव नापता।



इधर सरहद पर तनातनी के बाद मरघट सी ख़ामोशी हवाओं में सरसरा रही है।मीलों आदमजात की आमद दरफ्त नहीं हैं।बेज़ार भटकता कबीर उस गाँव में पहुँचा तो लगा मकानों के…

Continue

Posted on October 6, 2016 at 11:30am — 9 Comments

जश्न ऐ आज़ादी (लघु कथा ) जानकी बिष्ट वाही -नॉएडा

" बिट्टू और गुड़िया ! आज स्कूल नहीं जा रहे हो ? आज तो पन्द्रह अगस्त है।" दादा जी ने सिर पर गांधी टोपी रखते हुए कहा।



" दादा जी ! आज छोटे बच्चों की छुट्टी है।" 7 साल की गुड़िया बोली।



" अरे ,पन्द्रह अगस्त के दिन भी कोई छुट्टी करता है ? लड्डू मिलते हैं आज तो। ये आजकल के स्कूल भी ? ...बच्चे कैसे सीखेंगे आज़ादी के बारे में ।"



" दादा जी ! जुड़वाँ भाई बिट्टू ने उत्सुकता दिखाई , हमारी बहनजी ने बोला है, आज के दिन हमारा देश आज़ाद हुआ था।अब कोई छोटा - बड़ा नहीं है सब बराबर… Continue

Posted on July 15, 2016 at 5:23pm — 4 Comments

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At 9:23am on January 28, 2016, Madanlal Shrimali said…
आ.जानकी वाही जी ...आपकी लघुकथा "मायरा" को ओबीओ में "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
At 12:55pm on January 27, 2016, kanta roy said…

दिल से ढेरों बधाई आपको आदरणीया जानकी जी, आपकी सार्थक लघुकथा "मायरा " को इस प्रतिष्ठित  मंच " obo " की "महीने की सर्वश्रेष्ठ " रचना का सम्मान पाने हेतु।  वाकई आपने बेहतरीन लघुकथा सृजित की है।  मुग्ध हूँ ।  

At 4:44pm on January 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया जानकी बिष्ठ वाही जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "मायरा" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 3:41am on July 16, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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At 4:54pm on July 13, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
 
 
 

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