For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

साथियों,
"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -1) अत्यधिक डाटा दबाव के कारण पृष्ठ जम्प आदि की शिकायत प्राप्त हो रही है जिसके कारण "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2) तैयार किया गया है, अनुरोध है कि कृपया भाग -1 में केवल टिप्पणियों को पोस्ट करें एवं अपनी ग़ज़ल भाग -2 में पोस्ट करें.....

कृपया मुशायरे सम्बंधित अधिक जानकारी एवं मुशायरा भाग 2 में प्रवेश हेतु नीचे दी गयी लिंक क्लिक करें 

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)

Views: 27588

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

मुहतर्मा राजेश कुमारी साहिबा,

उम्दा पेशकश  बधाई स्वीकारें,,,

आद० अफरोज़ साहब आपका बहुत बहुत शुक्रिया 

आदरणीया राजेश कुमारी जी आदाब,

                        बहुत ही उम्दा ग़ज़ल । एक मुरस्सा ग़ज़ल । दाद के साथ दिली मुबारकबाद कुबूल करें ।

आद० आरिफ जी आपका दिल से बहुत बहुत शुक्रिया 

करके दरिया को पार इक तिनका 
दुनिया दारी सिखा गया है मुझे

क्या कहने हैं आ० राजेश कुमारी जी. यह ग़ज़ल भी क़ाबिल-ए-तारीफ़ हुई है. शेअर दर शेअर मेरी दिली मुबारकबाद स्वीकार करें. 

आद० योगराज जी गज़ल आपको पसंद आई मेरा लेखन सार्थक हुआ दिल से आभारी हूँ 

आदरणीया राजेश कुमारी जी, आपकी दूसरी प्रस्तुति भी आ गयी .. वाह वाह .. 

दिन में तारे दिखा गया है मुझे 
नींद से वो जगा गया है मुझे ..............  ये कुछ ख़तरनाक़ ढंग से जगाने की बात नहीं हो रही है ? ऐसा भी क्या जगाना कि दिन में तारे दिख जाय ... 

कोयला बन सकी न राख हुई 
उसका धोखा जला गया है मुझे ........... वाह .. सुफ़ियाना रंग लिए हुए यह शेर बह्त ही पुराने दोहे की याद करा गया.. 

आसमां छीन कर मेरा अपना   
इस जमीं पर बिठा गया है मुझे ............ शेर कई ज़िदग़ियों के सच्चाई बयान कर रहा है 

मैंने इंसा जिसे बनाया था  
वो ही पत्थर बना गया है मुझे............     ओह ! ... वाह वाह 

करके दरिया को पार इक तिनका 
दुनिया दारी सिखा गया है मुझे ............. ये कबीराना अंदाज़ अच्छा लगा. 

जिंदगी का ख़राब इक लम्हा  
हाशिये से मिटा गया है मुझे ............      ये भी एक सच्चाई है विकास के दौर की 
 

बिन ख़ता के  तेरी अदालत में

जाने क्या-क्या कहा गया है मुझे ............ वाह वाह .. यही तो होता है. शब्दों से चीर-फ़ाड कर डालते हैं वे ज़हीन कालिए 

 

ऐब मुझमे हज़ार कह-कह कर

खत्म पल-पल किया गया है मुझे..........  आप तो परवीन शाकिर हो रही हैं ! .. बहुत ख़ूब 

  

अब खुशी दे या छीन ले मौला 
सब्र करना तो आ गया है मुझे .............   ग़िरह में ख़ूब कसावट है. 

दिल से दाद कह दे रहा हूँ. 

शुभ-शुभ

आद० सौरभ जी शेर दर शेर आपकी विस्तृत समीक्षा से उत्साहित हूँ मेरी गज़ल सार्थक हुई आपका दिल से बहुत बहुत शुक्रिया .

अगली ग़ज़ल में सब सकारात्मक है नेगेटिव कुछ नहीं .

मोहतरमा राजेश कुमारी साहिबा उम्दा ग़ज़ल के 

लिये मुबारक बाद कुबूल करें

बहुत बहुत शुक्रिया सुर्खाब साहब 

आदरणीया राजेश कुमारी जी ..आपकी दूसरी ग़ज़ल भी उम्दा हुई है ..मेरी तरफ से ढेर सारी दाद और मुबारकबाद|

आद० राणा प्रताप जी बहुत बहुत शुक्रिया आपका 

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
6 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सौरभ जी। आपने सही कहा.. मेरा यहाँ आना कठिन हो गया था।       …"
6 hours ago
vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
Friday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
Friday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
Friday
Sushil Sarna posted blog posts
Friday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service