For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

साथियों,
"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -1) अत्यधिक डाटा दबाव के कारण पृष्ठ जम्प आदि की शिकायत प्राप्त हो रही है जिसके कारण "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2) तैयार किया गया है, अनुरोध है कि कृपया भाग -1 में केवल टिप्पणियों को पोस्ट करें एवं अपनी ग़ज़ल भाग -2 में पोस्ट करें.....

कृपया मुशायरे सम्बंधित अधिक जानकारी एवं मुशायरा भाग 2 में प्रवेश हेतु नीचे दी गयी लिंक क्लिक करें 

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)

Views: 28549

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

...चेहरे को चाँद कहकर....बेजोड़...बधाई आदरणीया।

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय मनन कुमार सिंह जी

आ. अंजलि जी ,
अच्छी ग़ज़ल के लिए   दाद और बधाई स्वीकार करें 

हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत शुक्रिया नीलेश जी

जिसकी खातिर सुलग के राख हुई
ठोकरों से उड़ा गया है मुझे। वाह! वाह!! क्या दर्द है ।

           शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद आदरणीया अंजलि गुप्ता जी ।

आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी, सराहना के लिए दिली शुक्रिया

ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आदरणीया अंजलि जी। आपका चौथा शेर बेहद पसन्द आया। इसके लिए अलग से बधाई। सादर।

आदरणीय महेंद्र कुमार जी,हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहेदिल से आपका शुक्रिया

आ. अंजलि जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी , सराहना के लिए दिली शुक्रिया

//आइना यूं दिखा गया है मुझे 
कोई ख़ुद से मिला गया है मुझे// अच्छा और सादगी भरा मतला है। 

//मेरे चेहरे को चांद कह कर वो 
आसमां पर सजा गया है मुझे// वाह वाह वाह!! रिवायती रंगत का ये शेअर अच्छा लगा.  

//राज़ दिल के निगाहों से कोई 
सरे महफ़िल बता गया है मुझे// दूसरा मिसरा बह्र का हाथ छुड़ा कर भाग रहा है, संज्ञान लें। 

//जिसकी खातिर सुलग के राख हुई
ठोकरों से उड़ा गया है मुझे// बहुत खूब. 

//कौन ये रात के अंधेरे में 
चांद सा जगमगा गया है मुझे// अच्छा शेअर है। 

//ख़्वाब पर नाम लिखा था जिसका
नींद से वो उठा गया है मुझे// क्या कहने हैं,वाह। 

//छेड़ कर तार मेरे दिल के वो
गीत सा गुनगुना गया है मुझे// बहुत खूब 

//संगदिल से लगा के दिल अपना
सब्र करना तो आ गया है मुझे//  गिरह भी उम्दा लगाईं है, वाह।  

//है मुहब्ब्त भी कैसा खेल 'सिफ़र'
हार कर वो हरा गया है मुझे// मक़्ता भी खूब हुआ है आ० अंजलि गुप्ता जी, मेरी तरफ से ढेरों ढेर बधाई प्रेषित है। 

आदरणीय योगराज sir, थोड़ी देर पहले किसी की ग़ज़ल पर आपकी ऐसी विस्तृत टिप्पणी पढ़ कर ईर्ष्या कर रही थी, कि क़ाश मेरी भी ऐसी किस्मत होती। page 31 से 71 पर पहुंच चुकी अपनी ग़ज़ल ढूंढते हुए जब आपकी टिप्पणी देखी तो जो हर्ष महसूस हुआ बता नहीं सकती। आप सभी गुणीजन का आशीर्वाद यूँ ही मिलता रहे। 

"सरे महफ़िल बता गया है मुझे" को इस प्रकार लिया था 1122 1212 112 क्योंकि पढा था कि इस बह्र में 2122 1122 112 को 1122 1212 112 भी लिया जा सकता है। यानि पहले 2 की जगह 1। कृपया मार्गदर्शन करें।

हौसला अफ़ज़ाई के लिए आपका दिली शुक्रिया

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

रामबली गुप्ता posted a blog post

कर्मवीर

आधार छंद-मनहरण घनाक्षरी सुख हो या दुख चाहें रहते सहज और, जग की कठिनता से जो न घबराते हैं। स्थिति…See More
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर और समसामयिक नवगीत रचा है आपने। बहुत बहुत हार्दिक बधाई।"
19 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
23 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

दोहा पंचक - आचरण

चाहे पद से हो बहुत, मनुज शक्ति का भान। किन्तु आचरण से मिले, सदा जगत में मान।। * हवा  विषैली  हो …See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई तिलक राज जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, स्नेह व उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार। 9, 10…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई दयाराम जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। कुछ मिसरे और समय चाहते है। इस प्रयास के…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। आ. भाई तिलक राज जी के सुझाव से यह और…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई अजय जी, प्रदत्त मिसरे पर गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
" आदरणीय तिलक राज कपूर साहब,  आप मेरी प्रस्तुति तक आये, आपका आभारी हूँ।  // दीदावर का…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई लक्ष्मण सिंह धानी ' मुसाफिर' साहब हौसला अफज़ाई के लिए  आपका बहुत-बहुत…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आपने खत लिखा उसका ही असर है साईंछोड़ दी अब बुरी संगत की डगर है साईं धर्म के नाम बताया गया भाई…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"ग़ज़ल पर अपनी बारीक़-नज़र से टिप्पणी करने के लिए आपका आभार आदरणीय तिलकराज जी।  एक प्रश्न है: इस…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service