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AMAN SINHA
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AMAN SINHA posted a blog post

मैं ऐसा हीं हूँ

गुमसुम सा रहता हूँ, चुप-चुप सा रहता हूँ लोग मेरी चुप्पी को, मेरा गुरूर समझते है भीड़ में भी मैं, तन्हा सा रहता हूँ मेरे अकेलेपन को देख, मुझे मगरूर समझते हैं         अपने-पराये में, मैं घुल नहीं सकता मैं दाग हूँ ज़िद्दी बस, धूल नहीं सकता         मैं शांत जल सा हूँ, बड़े राज़ गहरे है बहुरूपिये यहाँ हैं सब, बडे  मासूम चेहरे है         झूठी हंसी हँसना,आता नहीं मुझे आँसू कभी निकले, परवाह नहीं मुझे कोई कहेगा क्या, ये सोचना है क्युं फिजूल बातों से, भला डरूँ मैं क्युं ख़ुशामदी करना, आदत नहीं…See More
Wednesday
AMAN SINHA posted a blog post

बस मेरा अधिकार है

ना राधा सी उदासी हूँ मैं, ना मीरा सी  प्यासी हूँ मैं रुक्मणी हूँ अपने श्याम की, मैं हीं उसकी अधिकारी हूँ ना राधा सी रास रचाऊँ ना, मीरा सा विष पी पाऊँमैं अपने गिरधर को निशदिन, बस अपने आलिंगन मे पाऊँक्यूँ जानु मैं दर्द विरह का, क्यों काँटों से आंचल उलझाऊँ मैं तो बस अपने मधुसूदन के, मधूर प्रेम में गोते खाऊँक्यूँ ना उसको वश में कर लूँ, स्नेह सदा अधरों पर धर लूँ अपने प्रेम के करागृह में, मैं अपने कान्हा को रख लूँ क्यों अपना घरबार त्याग कर, मैं अपना संसार त्यागकर फिरती रहूँ घने वनों में, मोह माया…See More
Aug 1
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एक दिन मुझ सा जी लो

एक दिन मुझ सा जी लो हाँ बस एक दिन मुझ सा जी लो जाग जाओ पाँच बजे तुम और बर्तन सारे धो लो पानी भरने के खातिर फिर सारे नल तुम खोलो कपड़,पोछा,झाड़ू करकट बस एक बार तो कर लो बस एक दिन मुझ सा जी लो   नाश्ते खाने की लिस्ट बनाओ राशन, बाज़ार करके लाओ सब्जी वाले से थोड़ा तुम मोल भाव तो कर लो दूध वाले से, धोबी से, गैस वाले से, बनिये से तू-तू मैं-मैं तो कर लो बस एक दिन मुझ सा जी लो घर का पूरा बोझ उठाओ सबके मन का खाना पकाओ सबका ध्यान रखो तुम फिर भी सबके ताने खाओ है हिम्मत तो मुझ जैसा तुम सब्र तुम खुद मे भर…See More
Jul 26
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शराब

पा लेता हूँ जहां को तेरी चौखट पर लेकिन तेरी एक बूंद से मेरी प्यास नहीं बुझती भुला सकता हूँ मैं अपना वजूद भी तेरी खातिर पर तुझसे एक पल की दूरी मुझसे बर्दाश्त नहीं होती भूल जाता हूँ मैं ग़म अपने होंठो से लगाकर तुझे जब तक छु ना लूँ तुझे मेरी रफ्तार नहीं बढ़ती बड़ा सुकून मिलता है नसों मे तेरे घुलने से किसी भी साज़ मे ऐसी कोई बात नहीं होती बड़ा हल्का सा लगता है मुझे भारी सा दिल मेरा जब तू हाथ में होती है उलझने साथ नहीं होती ना मदहोश होता हूँ कभी तेरे आ जाने से चले जाने से तेरे तबीयत मेरी रास नहीं…See More
Jul 15
AMAN SINHA posted a blog post

जो मैं होता

जो मैं होता गीत कोई तो तुम भी मुझको गा लेते जो मैं होता खामोश परिंदा तो अपना मुझे बना लेते जो मैं होता फूल कोई तो गजरा मुझे बना लेते जो मैं होता इत्र कोई तो तन पर मुझे लगा लेते जो मैं होता काजल तो तुम टीका मेरा कर लेतेजो मैं होता रंग कोई तो होंठो पर मुझे धर लेतेजो मैं होता मेहँदी तो बस तेरे हीं हांथों पर सजाता जो मैं होता चूड़ी कंगन तो तुझे चैन ना मेरे बिन होता जो मैं होता वस्त्र कोई तो तेरे तन की शोभा होता जो मैं होता चित्र कोई तो तेरी हीं मैं आभा होता जो मैं होता तेरा तकिया तो मुझे भींच के…See More
Jul 12
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post ले चल अपने संग हमराही
"आदरणीय indravidyavachaspatitiwari साहब,  हौंसला बढाने हेतु आपका धन्यवाद। "
Jul 11
indravidyavachaspatitiwari commented on AMAN SINHA's blog post ले चल अपने संग हमराही
"मनुहार अच्छी रही।ऐसी मनमोहक रचना के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Jul 10
AMAN SINHA posted a blog post

मैं जताना जानता तो

मैं जताना जानता तो बन बैरागी यूं ना फिरता मेरे ही ख़िलाफ़ ना होता आज ये उसूल मेरा मैं ठहरना जानता तो बन के यूं भंवरा ना फिरता मेरे पग को बांध लेता फिर कोई अरमान मेरा  मैं बताना जानता तो दाग़ लेकर यूं ना फिरता आज मेरे साथ होता  धौला सा दामन वो मेरा मैं हँसाना जानता तो मुंह छुपाकर यूं ना रोता आज फिर बिकता नहीं सिक्कों में यूं ईमान मेरा मैं दिखाना जानता तो राख़ मेरा मन ना होता आज मेरे साथ होता आस्थियों का भाँड़ मेरा मैं बुलाना जनता तो राह से मैं यूं ना भटकता संग मेरे रहता फिर हँसता हुआ संसार मेरा मैं…See More
Jul 6
AMAN SINHA posted a blog post

किराए का मकान

दीवारें हैं छत हैंसंगमरमर का फर्श भीफिर भी ये मकान अपना घर नहीं लगताचुकाता हूँमैं इसका दाम, हर तारीख पहली कोलेकिन फिर भी यहाँ मुझको, वो अपनापन नहीं मिलतादीवारें साफ रखता हूँ, धीमी आवाज रखता हूँबच्चों के खिलौने सेज़रा नाराज रहता हूँकोई खट-खट ना हो जाएकोई खट-पट ना हो जाएज़रा सी बात पर कहींकोई गड़बड़ ना हो जाएयहाँ है सबकमरे, रसोई, झरोखे कई सारेमगर खुला वो अपना आँगन नहीं मिलतापड़ोसी है यहाँ भीपर सब गुमसुम से रहते हैंखुल के जो अपना ले वो दामन नहीं मिलता"मौलिक व अप्रकाशित" अमन सिन्हा  See More
Jul 2
AMAN SINHA posted a blog post

ले चल अपने संग हमराही

ले चल अपने संग हमराही, उन भूली बिसरी राहों मेंजहां बिताते थे कुछ लम्हे हम एक दूजे की बाहों में चल चले उन गलियों में फिर थाम कर एक दूजे का हाथ क्या पता मिल जाए हमको फिर वो जुगनू की बारात जहां चाँद की मद्धिम बुँदे वादी से छन कर आती है और ताल की जल पर पड़ कर चांदी सी छितरा जाती है जहां डाल पर तोता मैना बातें मीठी करते हैं जहां चाँद को देख चकोरे, आंहें भरते रहते है वहीं झील में नांव चाले तो मांझी गान सुनाता है वहीं पेड़ पर बैठ पपीहा, अपनी व्यथा दोहराता है वहीं जहां पर नभ के तारे रोज़ हम से बतियाते…See More
Jun 27
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कब चाहा मैंने

कब चाहा मैंने के तुम मुझसे नैना चार करो कब चाहा मैंने के तुम मुझसे मुझसा प्यार करो कब चाहा मैंने के तुम मेरे जैसा इज़हार करो कब चाहा मैंने के तुम अपने प्रेम का इकरार करो कब चाहा मैंने के तुम मुझसे मिलने को तड़पो कब चाहा मैंने के तुम बादल जैसे मुझपर बरसो कब चाहा मैंने के तुम अपना सबकुछ मुझपर लूटा बैठो कब चाहा मैंने के तुम अपना चैन सुकून गवा बैठो कब चाहा मैंने के तुम चाहो मुझको दीवानों सा कब चाहा मैंने के तुम याद करो मुझे बहानों सा कब चाहा मैंने के तुम मुझसे मिलो बहाने से कब चाहा मैंने के तुम मुझे…See More
Jun 24
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यायावर

मैं बंजारा, मैं आवारा, फिरता दर दर पर ना बेचारा ना मन पर मेरा ज़ोर कोई, मैं अपने मन से हूँ हारा ठिठक नहीं कोई ठौर नहीं, आगे बढ़ने की होड नहींकोई मेरा रास्ता ताके, जीवन में ऐसी कोई और नहीं ना रिश्ता है ना नाता है, बस अपना खुद से वादा है जब तक जिंदा हूँ चलना है, बस यायावर ही रहना है जब सबने हांथ बाढ़ाया था, तब मैंने हीं ठुकराया था अपने पथ का चुनाव किया, मैंने सूख का परित्याग किया हाव भाव से फक्कर हूँ, घुल जाऊँ तो शक्कर हूँ स्वाद मेरा पहचान गया, जो मेरे मन को जान गया मैं अपनी धुन में रहता हूँ, बस…See More
Jun 21
AMAN SINHA posted a blog post

आह्वान

जागो मेरे वीर सपूतो, मैंने है आह्वान किया आज किसी कपटी नज़रों ने मेरा है अपमान किया किसी पापी के नापाक कदम, मेरी छाती पर ना पड़ने पाए आज सभी तुम प्रण ये कर लो, जो आया, कुछ, ना लौट के जाने पाये दिखला दो तुम दुश्मन को, तुम भारत के वीर सिपाही हो तुमको ना कोई रोक सका, जितनी भी गहरी खाई हो हिमालय से भी ऊंची है तेरे आत्मबल की चोटी तोड़ दो उनके अरमानो को, जिनकी नियत सदा है खोटी घुस कर मेरी सीमा में, जिसने तुमको ललकारा है उसको उसकी औकात दिखा, मैंने भी हुंकारा है जब तक थक कर वो लौट ना जाए तबतक तुझको लड़ना…See More
Jun 18
नाथ सोनांचली commented on AMAN SINHA's blog post क्यों परेशान होता है तू
"आद0 अमन सिन्हा जी सादर अभिवादन।बढ़िया लिखा है आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
Jun 15
AMAN SINHA posted a blog post

क्यों परेशान होता है तू

क्यों परेशान होता है तू , जिसे जाना है वो जाएगा हाथ जोड़ कर पैर पकड कर, तू उसको रोक ना पाएगा वो जाता है तो जाने दे, पर याद न उसकी जाने दे तू उसको ये अवसर ना दे, वो बाद मे तुझे बहाने दे  जिसको आँसू की क़दर नहीं, ना होने का तेरे असर नहीं उसे रोक के क्या तू पाएगा, तेरी खातिर जो बेसबर नहीं तू रोके तो रुक जाएगा, घड़ियाली आँसू बहाएगा अपनी हर नाकामी का फिर, जिम्मेदार तुझे बताएगा  तू उसके बीन ना जी पाएगा, वो गया तो तू मर जाएगा उसे भी ये एहसास तो होने दे, तुझे खोकर वो क्या पाएगा चलते-चलते जब थक जाएगा, खुद…See More
Jun 14
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Jun 11

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मैं ऐसा हीं हूँ

गुमसुम सा रहता हूँ, चुप-चुप सा रहता हूँ 

लोग मेरी चुप्पी को, मेरा गुरूर समझते है 

भीड़ में भी मैं, तन्हा सा रहता हूँ 

मेरे अकेलेपन को देख, मुझे मगरूर समझते हैं 

        

अपने-पराये में, मैं घुल नहीं सकता 

मैं दाग हूँ ज़िद्दी बस, धूल नहीं सकता         

मैं शांत जल सा हूँ, बड़े राज़ गहरे है 

बहुरूपिये यहाँ हैं सब, बडे …

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Posted on August 9, 2022 at 9:47am

बस मेरा अधिकार है

ना राधा सी उदासी हूँ मैं, ना मीरा सी  प्यासी हूँ 

मैं रुक्मणी हूँ अपने श्याम की, मैं हीं उसकी अधिकारी हूँ 

ना राधा सी रास रचाऊँ ना, मीरा सा विष पी पाऊँ

मैं अपने गिरधर को निशदिन, बस अपने आलिंगन मे पाऊँ

क्यूँ जानु मैं दर्द विरह का, क्यों काँटों से आंचल उलझाऊँ 

मैं तो बस अपने मधुसूदन के, मधूर प्रेम में गोते खाऊँ

क्यूँ ना उसको वश में कर लूँ, स्नेह सदा अधरों पर धर लूँ 

अपने प्रेम के करागृह में, मैं अपने…

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Posted on August 1, 2022 at 1:50pm

एक दिन मुझ सा जी लो

एक दिन मुझ सा जी लो 

हाँ बस एक दिन मुझ सा जी लो 

जाग जाओ पाँच बजे तुम और बर्तन सारे धो लो 

पानी भरने के खातिर फिर सारे नल तुम खोलो 

कपड़,पोछा,झाड़ू करकट बस एक बार तो कर लो 

बस एक दिन मुझ सा जी लो   

नाश्ते खाने की लिस्ट बनाओ 

राशन, बाज़ार करके…

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Posted on July 23, 2022 at 11:42am

शराब

पा लेता हूँ जहां को तेरी चौखट पर लेकिन 

तेरी एक बूंद से मेरी प्यास नहीं बुझती 

भुला सकता हूँ मैं अपना वजूद भी तेरी खातिर पर 

तुझसे एक पल की दूरी मुझसे बर्दाश्त नहीं होती 

भूल जाता हूँ मैं ग़म अपने होंठो से लगाकर तुझे 

जब तक छु ना लूँ तुझे मेरी रफ्तार नहीं बढ़ती 

बड़ा सुकून मिलता है नसों मे तेरे घुलने से 

किसी भी साज़ मे ऐसी कोई बात…

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Posted on July 15, 2022 at 10:20am

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