For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

AMAN SINHA
Share

AMAN SINHA's Friends

  • Samar kabeer
  • लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
 

AMAN SINHA's Page

Latest Activity

AMAN SINHA posted a blog post

यूँ जो दिल खोलकर मिल रही हो तुम

यूँ जो दिल खोलकर मिल रही हो तुम लगता है के अब मैं तुमको बिल्कुल याद नही ऐसा होता है निकाह के बाद अक्सर ऐसा होने मे कोइ गलत बात नही अब मेरे खयालों से आज़ाद हो तुम किसी और के साथ आबाद हो तुम पर तुम पर ही खत्म होता है इश्क़ मेरा मेरे पहले मोहब्बत की याद हो तुम मैं अचरज़ मे हूँ तुमने ये क्या कर दिया अपने बच्चे  का नाम मुझपर रख दिया क्या कहकर शौहर  कैसे मनाया होगा ना जाने कौन सा किस्सा सुनाया होगा अब ये सोचता हूँ मैं रोज़ क्यों हिचकता हूँ पानी भी जो पीता हूँ तो क्यों सरकता हूँ क्या खुब लिया है बदला मेरी…See More
Nov 11, 2021
नाथ सोनांचली commented on AMAN SINHA's blog post दर्द से यारी
"आद0 अमन सिन्हा जी सादर अभिवादन बढ़िया सृजन और भावभियक्ति पर आपको बहुत बहुत बधाई"
Oct 13, 2021
Dr. Vijai Shanker commented on AMAN SINHA's blog post जुनून
"आदरणीय अमन सिन्हा जी , हुआ क्या राहों मे तेरे, जो बस पत्थर ही पत्थर हैचूमेंगे पाँव वो तेरे ये “जुनून” तुझसे कहता है.बहुत ही सुन्दर , प्रेरक प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई , सादर।"
Oct 6, 2021

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on AMAN SINHA's blog post जुनून
"आदरणीय अमन जी, आपके प्रयास के लिए बधाइयाँ.  मात्राएँ और विन्यास पर समझ बढ़ाएँगे तो कहन में सान्द्रता बढ़ेगी.  शुभ-शुभ  "
Oct 5, 2021
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on AMAN SINHA's blog post जुनून
"आ. अमन जी, अभिवादन। सुन्दर रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Oct 4, 2021
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post क्षितिज
"@मुसाफिर साहब @समर कबीर साहब  आप दोनों का तहे दिल से शुक्रिया "
Oct 4, 2021
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on AMAN SINHA's blog post क्षितिज
"आ. भाई अमन जी, अभिवादन । अच्छी प्रस्तुति हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें। "
Oct 4, 2021
AMAN SINHA posted a blog post

दर्द से यारी

हर संगदिल को दिल का पता बता दियाजितने बेवफा मिले सबको घर दिखला दियासभी ने छोड़ दिया जिस ग़म को खुशी के खातिरहमे जहाँ भी दिखा,उसे हंसके गले लगा लियासाथ हो दर्द तभी जीने का मज़ा आता हैग़म जुदाई का हो तो पीने का मज़ा आता हैछुपा के रख सके जो दर्द को जहन मे अपनेज़ख्मों को सीने का मज़ा बस उसी को आता हैखुशी है बुलबुला एक दिन फूट जाएगाहंसाया इसने जितना, उतना ही रुलाएगाहमसफर है सच्चा ग़म ही अपना यारोंजो आया तो अपने साथ लेकर जाएगाजो फिरते हैं ढूंदते दिल का सुकून दूकानों मेउन्हे नहीं मालूम ये मिलते है सिर्फ…See More
Oct 3, 2021
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on AMAN SINHA's blog post कुछ बदला सा
"आ. भाई अमन जी, अभिवादन। अच्छी प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई।"
Oct 3, 2021
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post दिखने दो
"@विजय निकोरे साहब,  धन्यवाद "
Oct 2, 2021
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post कुछ बदला सा
"@विजय निकोरे साहब,  धन्यवाद "
Oct 2, 2021
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post जुनून
"@अमीरुद्दीन साहब,  शुक्रिया, अभार "
Oct 2, 2021
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on AMAN SINHA's blog post जुनून
"जनाब अमन सिन्हा जी आदाब, ख़ूबसूरत ख़यालात और जज़्बात से पुर अच्छी रचना हुई है बधाई स्वीकार करें। सादर। "
Oct 1, 2021
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post जुनून
"@समर कबीर साहब,  हौंसला बढाने के लिये धन्यवाद "
Oct 1, 2021
AMAN SINHA commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"जनाब अमिरुद्दिन साहब,  आप लोगोंं को पढ कर समझ मे आता है की अभी कितना कुछ सिखना मेरे लिये बाकी है और जरूरी भी है। रचना बहुत अच्छी और दिल को छुने वाली लगी।  "
Oct 1, 2021
AMAN SINHA commented on Sushil Sarna's blog post तो रो दिया .......
"आदरणिय सुशिल जी, अति सुंदर रचना के लिए बधाई "
Oct 1, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
KOLKATA
Native Place
KOLKATA
Profession
WRITER
About me
NEW WRITER

AMAN SINHA's Blog

यूँ जो दिल खोलकर मिल रही हो तुम

यूँ जो दिल खोलकर मिल रही हो तुम 

लगता है के अब मैं तुमको बिल्कुल याद नही 

ऐसा होता है निकाह के बाद अक्सर 

ऐसा होने मे कोइ गलत बात नही 

अब मेरे खयालों से आज़ाद हो तुम 

किसी और के साथ आबाद हो…

Continue

Posted on November 11, 2021 at 11:00am

दर्द से यारी

हर संगदिल को दिल का पता बता दिया

जितने बेवफा मिले सबको घर दिखला दिया

सभी ने छोड़ दिया जिस ग़म को खुशी के खातिर

हमे जहाँ भी दिखा,उसे हंसके गले लगा लिया

साथ हो दर्द तभी जीने का मज़ा आता है

ग़म जुदाई का हो तो पीने का मज़ा आता है

छुपा के रख सके जो दर्द को जहन मे अपने

ज़ख्मों को सीने का मज़ा बस उसी को आता है

खुशी है बुलबुला एक दिन फूट जाएगा

हंसाया इसने जितना, उतना ही रुलाएगा

हमसफर है सच्चा ग़म ही अपना यारों

जो…

Continue

Posted on October 1, 2021 at 11:30am — 1 Comment

जुनून

रगो मे खून बनकर तेरे, यूँ “जुनून” बहता है

बिना मंज़िल के ना रुकना, ये सुकून कहता है

हुआ क्या राहों मे तेरे, जो बस पत्थर ही पत्थर है

चूमेंगे पाँव वो तेरे ये “जुनून” तुझसे कहता है

 

है मुश्किल सफर तेरा ये, गलियां तुझसे कहती है

चुनी ये राह जिसने भी, गुमान दुनिया करती है

तू देख कर चट्टानों को कभी हिम्मत नहीं खोना

पल भर की नाकामी पर तू भूल कर भी नहीं रोना

 

पहाड़ो मे सुराख कर दे, ये हिम्मत बस तुझी मे…

Continue

Posted on September 30, 2021 at 10:00am — 7 Comments

क्षितिज

वो जहां पर असमा और धरा मिल जाते है

छोर मिलते ही नहीं पर साथ में खो जाते है

है यही वो स्थान जिसका अंत ही नहीं

मिल गया या खो गया है सोचते है सब यही



सबको है चाह इसकी पर राह का पता नहीं

बिम्ब या प्रतिबिम्ब है ये भ्रम सभी को है यही

कामना को पूर्ण करने श्रम छलांगे भरता है

मरीचिका के जाल में जैसे मृग कोई भटकता है



है धरा का अंत वही जिस बिंदु से शुरुआत है

यात्रा अनंत इसकी कई युगों की बात है

ओर ना है छोर इसका शुन्य सा आकाश है

जिसका जग को…

Continue

Posted on September 27, 2021 at 10:36am — 3 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Mahendra Kumar replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"हमारी दुआऍं आपके साथ हैं सर। आपको कुछ नहीं होगा। "
1 hour ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"मुहतरम आपकी सेहत और सलामती के लिए दुआगो हूँ। आप जल्द शिफ़ायाब हों। "
1 hour ago

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आप बहुत जल्द सेहतयाब होंगे। हमारी दुआएँ आपके साथ हैं।"
3 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण भाईजी मकर संक्रांति की पूरी छटा बिखेर दी आपने सुन्दर छंदों के माध्यम से, हार्दिक…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, प्रदत्त चित्रानुरूप अति उत्तम छन्द रचे हैं । इसके लिए कोटि कोटि हार्दिक बधाई।"
3 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"लोहड़ी औ मकर संक्रान्ति,हम सबने खूब मनाई खाकर हमने तिल के लड्डू,पतंग भी खूब उड़ाई जला अलाव बच्चों…"
3 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय हीरेन भाईजी   सुन्दर छंदों से आपने आयोजन का शुभारम्भ किया है, हार्दिक बधाई स्वीकार…"
3 hours ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"मोहतरम समर साहब, आप शीघ्र स्वस्थ हों, हम सबकी दुआएं आपके साथ है ।"
3 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"दोस्तो आदाब, तक़रीबन एक माह से मेरी तबीअत ठीक नहीं चल रही है साँस पर ज़ोर था, आज फिर तबीअत ख़राब हुई…"
3 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"कुकुभ छंद =========   सूर्य देव धनु राशि छोड़कर, मकर राशि में जब जाते| संक्रांति पर्व का उत्सव…"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"चढ़े ताप नित  धीरे - धीरे, घटे  रात्रि, दिन  बढ़ते हैं।सूर्य उत्तरायण होकर अब, मकर…"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-129 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर अभिवादन..."
6 hours ago

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service