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इश्क के बाद है क्या मिला?.('जान" गोरखपुरी)

२१२  /  २१२ /    २१२

 

 इश्क  के बाद है क्या मिला?

 वाँ भी था याँ भी पर्दा मिला

.

अब सनम जबकि तुम खो गये

ख़ुद से मिलने का मौक़ा मिला

.

उनके वादों का हासिल है क्या?

हाथ वादों के वादा मिला

.

हमने दुनिया बहुत देखी पर

कोई मुझको न तुमसा मिला

.

लाख़ कोशिश की हमने मगर

दिल से दिल का न सौदा मिला

.

जब खुला ख़त मेरे वास्ते

नाम हर शय में उसका मिला

.

बेतकल्लुफ़ न इतना हो “जान”

आज तक तुझको है क्या मिला?

******************************************

मौलिक व् अप्रकाशित (c) 'जान' गोरखपुरी

******************************************

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Comment

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Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on August 4, 2015 at 7:30pm

आ० गिरिराज सर आपके मुक्तकंठ से प्रसंशा पाकर गज़ल पूर्ण हुयी,मन गदगद हुआ! नमन!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on August 4, 2015 at 7:29pm

 गज़ल को स्नेह देने के लिए हार्दिक आभार आ० इन्तजार सर!!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on August 4, 2015 at 7:28pm

तहेदिल से शुक्रिया आ० प्रतिभा जी!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on August 4, 2015 at 7:27pm

आ० विनय सरजी! आत्मीय प्रसंशा के लिए तहेदिल से आभार!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on August 4, 2015 at 7:26pm

आ० राजेश कुमारी ज़ी,आपको गज़ल पसंद आई रचनाकर्म सार्थक हुआ! हौसलाफजाई के लिए हार्दिक आभार!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 4, 2015 at 1:41pm

अब सनम जबकि तुम खो गये

ख़ुद से मिलने का मौक़ा मिला  -- बहुत खूब आदरनीय , कृष्णा भाई , ग़ज़ल के लिये हार्दिक बधाइयाँ ।

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on August 4, 2015 at 8:03am

आदरणीय कृष्णा जी उम्दा शेर हैं ......

अब सनम जबकि तुम खो गये

ख़ुद से मिलने का मौक़ा मिला

Comment by pratibha pande on August 3, 2015 at 10:06pm

अच्छी ग़ज़ल के लिए आपको बधाई आ० कृष्ण मिश्रा जी  

Comment by विनय कुमार on August 3, 2015 at 9:23pm

// अब सनम जबकि तुम खो गये
ख़ुद से मिलने का मौक़ा मिला // , वाह , वाह , बहुत उम्दा , बधाई इस ग़ज़ल के लिए आदरणीय..


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 3, 2015 at 9:15pm

सुन्दर ग़ज़ल कही है कृष्ण भैया,तहे दिल से दाद लीजिये | 

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