For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गज़ल - बेटों से कहीं ज्यादा मैं बेटी की तरफ हूं

सोने की चमक छोड़ के मिट्टी की तरफ हूं
बेटों से कहीं ज्यादा मैं बेटी की तरफ हूं

तुम लोग तो जालिम के तरफदार हो लेकिन
मैं आज भी इस देश में गांधी की तरफ हूं

जब साथ दिया मैंने किसी अहले सितम का
एहसास हुआ मुझको मैं गलती की तरफ हूं

आंखो को मेरी ख्वाब ना दौलत के दिखाओ
मैं भूख से बेचैन हूं रोटी की तरफ हूं

मैं डूबने दूंगा ना गरीबों का सफीना
तूफां के मुकाबिल हूं मैं मांझी की तरफ हूं

ये शहर का माहौल मुबारक हो आपको
मैं गांव का बाशिंदा हूं बस्ती की तरफ हूं

नुसरत मेरी ग़ज़लें भी मोहब्बत से भरी हैं
गौतम से मुझे प्यार है चिश्ती की तरफ हूं

कुमार नुसरत
मौलिक और अप्रकाशित

Views: 875

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by रामबली गुप्ता on September 17, 2017 at 11:09pm
वाह भाई नुसरत जी वाह, क्या ग़ज़ल कही है। हर शैर उम्दा हुआ है। आनन्द आया पढ़कर। अव्वल तो हार्दिक बधाई स्वीकारें। कथ्य और शिल्प के सम्बन्ध में गिरिराज भाई जी और नीलेश भाई जी से सहमत हूँ। एक पुनः विचार कर देखिएगा। सादर
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 16, 2017 at 3:14pm
वाह वाह बहुत शानदार ग़ज़ल कही है आदरणीय..बधाई
Comment by Afroz 'sahr' on September 16, 2017 at 2:27pm
आदरणीय नुसरत जी ग़ज़लके लिए आपको बधाई!आदरणीय निलेश जी का सुझाव क़ाबिल ए ग़ौर है! में आदरणीय की बात से सहमत हूँ! सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on September 16, 2017 at 1:54pm

आ. कुमार जी आपकी ग़ज़ल पर समर कबीर साहब, आ. गिरिराज जी और आ. निलेश शेवगाँकर जी अपनी बात कह ही चुके हैं गौर कीजिएगा। मेरी तरफ से आपको बधाई

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 16, 2017 at 1:46pm

आ. कुमार जी,
मच पर आपको पहली बार पढ़ा है... अच्छा लगा.. ग़ज़ल  भावपूर्ण है.
मतले में सानी में... में को मैं कर लें 
.
ये शहर का माहौल मुबारक हो आपको..यह मिसरा आख़िर में थोडा मोच खाया है...बहर चूक रहा है ..
अंतिम रुक्न 122 आना चाहिए 212 हो गया है ...
देख लीजियेगा 
सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 16, 2017 at 10:51am

आ. कुमार नुसरत भाई , खूब सूरत ग़ज़ल के लिये बधाइयाँ । एक बात कहना चाहता हूँ , आवश्यक नही कि आप सहमत हों , विचार अपने होते हैं ..
उअला और सानी पर विचार करने से  , मतले मे क्या ऐसा नही लगता ..कि ..  अनजाने मे ही सही , बेटी की तुलना मिट्टी से हो गयी है -
सोने की चमक छोड़ के मिट्टी की तरफ हूं
बेटों से कहीं ज्यादा में बेटी की तरफ हूं     --   सोचियेगा ... सुधार ज़रूरी नही है , जब तक मेरी बात से सहमत न हों ।

Comment by Er Kumar Nusrat on September 15, 2017 at 11:17pm
आप सभी का बहुत बहुत आभार
Comment by पंकजोम " प्रेम " on September 15, 2017 at 2:48pm
वाह उम्दा ग़ज़ल भाई जी वाह
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 14, 2017 at 7:39pm
हार्दिक बधाई ।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on September 13, 2017 at 10:40pm

आदरणीय कुमार नुसरत जी बहुत प्यारी ग़ज़ल कही है आपने | हार्दिक बधाई आपको |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

pratibha pande replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय मिथिलेश जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ। कैलेंडर प्रथम सप्ताह में आ जाय और हफ्ते बाद सभी आयोजन…"
5 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय को नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर जी का ये उत्तम विचार है। अगर इसमें कुछ परेशानी हो तो एक…"
21 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .युद्ध

दोहा सप्तक. . . . . युद्धहरदम होता युद्ध का, विध्वंसक परिणाम ।बेबस जनता भोगती ,  इसका हर  अंजाम…See More
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इस सारी चर्चा के बीच कुछ बिन्दु और उभरते हैं कि पूरे महीने सभी आयोजन अगर ओपन रहेंगे तो…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय, नमस्कार  यह नव प्रयोग अवश्य सफलता पूर्वक फलीभूत होगा ऐसा मेरा विश्वास है तथा हमें…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सुझाव सुन्दर हैं ।इससे भागीदारी भी बढ़गी और नवीनता भी आएगी । "
Thursday

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
Wednesday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
Wednesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूस बिना कमीशन आजकल, कब होता है काम । कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।। घास…See More
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार। मुझे ऐसी ही एक चर्चा की अपेक्षा थी। आवश्यकता महसूस हो रही थी। हार्दिक धन्यवाद और…"
Tuesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभी सम्मानित सदस्यों को सादर नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर सर द्वारा…"
Tuesday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय सदस्यों को नमस्कार, एक महत्वपूर्ण चर्चा को आरम्भ करने के लिए प्रबन्धन समिति बधाई की…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service