For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सांसारिक स्वार्थग्रस्त प्रक्रियाओं से घबराकर

मुझसे ही कतराकर

चल बसी थी अकुलाती मेरी आस्था

उसके अंतिम संस्कार से पहले

टूटे विश्वास से फूटी तो थी रक्तधार

पर यह तो सदियों पुरानी बात है

समझ में न आए

कुलाँचते ख्यालों की अदृश्य रगों में

आज इतनी तपिश क्यूँ है

यादों के घावों को चोंच मार

छील गया कोई कैसे

कब से यहाँ जब कोई पास नहीं है

मेरी ही आन्तरिक कमज़ोरी को जानकर

तकलीफ़ भरे धूल भरे

भीतरी विवरों में झांककर 

नागिन-सी लिपटी मेरी दलीलों को दिलासा देने

चली आती होगी

मृत-आस्था की आत्मा

पर आ-आकर वह

असंख्य असत्यों के सरसराते काल-नाग की

भयावह फुँकार से

हार जाती होगी, डर जाती होगी

मेरी तरह भटक जाने से भयभीत

लौट जाती होगी

ऐसे में मैं ही शब्दों और तर्कों  के चक्रव्यूह में

कठिन मानव-प्रसंगो के अनबूझे समीकरण से

ऊबकर उकताकर घबरा कर

छील देता हूँ हृदय-सम्बन्धों के घावों को नाखुनों से

चोंच मारते हुए पक्षी-सा

भयानक गति से बार-बार

-------

-- विजय निकोर

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 872

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by narendrasinh chauhan on January 3, 2017 at 2:34pm

खूब सुन्दर रचना 

Comment by vijay nikore on January 3, 2017 at 11:03am

// ह्रदय के हाहाकार को शब्दों में साकार कर देने की कला सीखने के लिए आपके पास समिधा लेकर आना होगा . पीड़ा की अभिव्यक्ति तो सभी करते हैं पर आपका शब्द शब्द मानो  पीड़ा का यथार्थ बयां करता है.//

आदरणीय मित्र गोपाल नारायन जी, कवि के हृदय से आप परिचित हैं ... उफ़ान उठता है, दर्द बहता चला आता है । आपसे मिला मान

मेरे लिए बहुमूल्य है। आपका हार्दिक आभार।

Comment by Samar kabeer on January 2, 2017 at 8:51pm
जनाब विजय निकोर जी आदाब,ये कविता इतनी संजीदा और जज़्बाती है कि मेरे लिये इसकी तारीफ़ करना मुश्किल हो रहा है,हैरत ज़दा हूँ कि आप इस्तेआरों के ज़रिये कितनी आसानी से अपनी बात कह गये, वाह बहुत ख़ूब जनाब,इसे कहते हैं कामयाब सृजन जितनी तारीफ़ की जाये कम होगी इस रचना की,सलाम करता हूँ आपके जादुई क़लम को,सुब्हान अल्लाह,इस प्रस्तुति पर दिल की गहराइयों से ढेरों दाद के साथ देरों बधाई स्वीकार करें ।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 25, 2016 at 6:15pm

आ० निकोर जी ह्रदय के हाहाकार को शब्दों में साकार कर देने की कला सीखने के लिए आपके पास समिधा लेकर आना होगा . पीड़ा की अभिव्यक्ति तो सभी करते हैं पर आपका शब्द शब्द मानो  पीड़ा का यथार्थ बयां करता है. एक बात पूंछू -यह विष कहाँ पाया ? सादर .  

Comment by vijay nikore on December 23, 2016 at 11:46am

रचना की सराहना के लिए हार्दिक आभार, आदरणीय आशीष जी।

Comment by आशीष यादव on December 23, 2016 at 2:04am
Ek gambhir ewam anubhawi rachna.
Badhai.
Comment by vijay nikore on December 22, 2016 at 6:03pm

आदरणीय महेन्द्र कुमार जी, जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिए और इस रचना की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार।

Comment by Mahendra Kumar on December 21, 2016 at 12:23pm
आदरणीय विजय निकोर जी, अपने जन्मदिन के शुभ अवसर पर बहुत ही संवेदनशील और शानदार रचना प्रस्तुत की है आपने। इस रचना सहित आपको जन्मदिवस की ढेरों बधाई। आपका आने वाला वर्ष ऐसे ही सृजनशील बना रहे यही कामना है। सादर।
Comment by vijay nikore on December 21, 2016 at 12:09pm

प्रिय मित्र मिथिलेश जी, आपने इस रचना को जो मान दिया है, वह अमूल्य है। आपके दिए ही सुझाव के लिए कृतज्ञ हूँ।

रचना को इतना समय दिया, मैं बहुत ही आभारी हूँ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 21, 2016 at 1:07am

आदरणीय विजय निकोर सर, आपने आस्था की मौत और उसके बाद की त्रासदी का जो 'शोकगीत' लिखा है, वह पाठक को भीतर तक हिला देता है. वास्तव में आस्था निस्वार्थ होती है जो मनुष्य को सबल बनाती है और उसका आत्मविश्वास व आत्मबल बनाएं रखती है किन्तु दुनियादारी के भ्रमजालों और स्वार्थों के दबाव में जब उसकी मौत होती है तो मनुष्य निसहाय हो जाता है.

आपने उस मृत आस्था की आत्मा के बिम्ब को लेकर मानव मष्तिष्क की संश्लिष्ट प्रक्रियायों को जिस तरह शाब्दिक किया है वह बहुत अधिक प्रभावित कर रहा है. उस त्रासदी को बहुत सधे शब्द मिले है. आस्था के मानवीकरण द्वारा मनोविश्लेषण की अभिव्यक्ति आपके वृहत जीवन अनुभवों का सार है. इस गंभीर और प्रभावकारी वैचारिक प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई निवेदित है. सादर 

कुछ टंकण त्रुटियाँ -

अंतिम संसकार- अंतिम संस्कार

तपश- तपिश 

तकलीफ़ भरे धूल भरे 

भयावनी को भयावह या डरावनी किया जा सकता है.

मैं ही शब्दों और तर्कों के चक्रव्यूह में या मैं ही शब्दों के,  तर्कों के चक्रव्यूह में

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आपकी बात से सहमत हूँ। यह बात मंच के आरंभिक दौर में भी मैंने रखी थी। अससे सहजता रहती। लेकिन उसमें…"
1 hour ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .विविध

दोहा सप्तक. . . . . . विविधकभी- कभी तो कीजिए, खुद से खुद की बात ।सुलझेंगे उलझे हुए,  अंतस के हालात…See More
3 hours ago
amita tiwari posted blog posts
6 hours ago
Admin replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"साथियों, आप सभी के बहुमूल्य विचारों का स्वागत है, इस बार के लिए निर्णय लिया गया है कि सभी आयोजन एक…"
yesterday
Admin posted discussions
yesterday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"नीलेश भाई के विचार व्यावहारिक हैं और मैं भी इनसे सहमत हूँ।  डिजिटल सर्टिफिकेट अब लगभग सभी…"
Friday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार, अब तक आए सभी विचार पढ़े हैं। अधिक विचार आयोजन अवधि बढ़ाने पर सहमति के हैं किन्तु इतने…"
Friday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इन सुझावों पर भी विचार करना चाहिये। "
Thursday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"यह भी व्यवहारिक सुझाव है। इस प्रकार प्रयोग कर अनुभव प्राप्त किया जा सकता है। "
Thursday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"हाल ही में मेरा सोशल मीडिया का अनुभव यह रहा है कि इस पर प्रकाशित सामग्री की बाढ़ के कारण इस माध्यम…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय प्रबंधन,यह निश्चित ही चिंता का विषय है कि विगत कालखंड में यहाँ पर सहभागिता एकदम नगण्य हो गयी…"
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service