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मापनी-2122 2122 212
एक दीपक उस जगह पर भी जले।
जिस जगह वे वीर सैनिक हैं पले।
शान से वो जो लड़े अंतिम साँस तक,
देश खातिर छोड़ दुनिया को चले।
--------
सर नवा कर के नमन कर जोड़ कर।
जो चलें रिश्ते सभी अब तोड़ कर।
याद थी तो देश की बस आन की,
मर मिटें दुश्मन की छाती फोड़कर।
---------
वीर थें जो धुन के पक्के बड़े।
आँधियों में भी अटल सीमा खड़े।
राह थी उनकी कठिन चलते रहें,
आज माटी के लिए माटी पड़े।
---------
प्राण त्यागे वे, रहें हम चैन से
परिजनों संतावना दूँ बैन से।
वे जलें फौलाद होकर भी सदा,
है श्रधांजलि अश्रुपूरित नैन से।
----------
अप्रकाशित एवं मौलिक रचना,
सुनील प्रसाद शाहाबादी
आरा अमराई नवादा, (बिहार)

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Comment by rajesh kumari on November 16, 2016 at 12:43pm

आद० सुनील प्रसाद जी ,बहुत खूब सुंदर मुक्तक लिखे हैं हार्दिक बधाई |आद० रामबली जी के मशविरे पर गौर करें बस कहीं कहीं थोड़ा सा सुधार अपेक्षित है जो आपके लिए कोई मुश्किल काम नहीं है सादर |

Comment by Ashok Kumar Raktale on November 3, 2016 at 11:14pm

आदरणीय सुनील प्रसाद जी सादर, सुंदर मुक्तक रचे हैं आपने. यह अवश्य है कुछ जगह मापनी गडबड़ाई है. सादर.

Comment by Samar kabeer on November 1, 2016 at 5:49pm
जनाब सनील प्रसाद जी आदाब,मुक्तक का प्रयास अच्छा है,बधाई इसके लिये, में जनाब रामबली गुप्ता जी से सहमत हूँ ।
Comment by रामबली गुप्ता on November 1, 2016 at 6:52am
अव्वल तो सुंदर भावों के लिए बधाई स्वीकार करें आद0 भाई सुनील प्रसाद जी। शिल्प की बात करें तो कई स्थानों पर लय भंग और बेबहर मिला।यथा-
शान से_____तक। बहर भंग
वीर थे जो___बड़े। बहर भंग
कथ्यों में भी स्पष्टता लानी होगी।
सीमा खड़े, माटी पड़े-क्या आशय है आपका?
बाकी सब शुभ शुभ। सादर
Comment by सुनील प्रसाद(शाहाबादी) on November 1, 2016 at 5:29am
हार्दिक आभार आदरणीय कालीपद मंडल जी आपके स्नेहिल टिपण्णी हेतू।
Comment by सुनील प्रसाद(शाहाबादी) on November 1, 2016 at 5:27am
शुक्रिया जनाब शेख शहजाद उस्मानी साहब हौसला अफजाई के लिए
Comment by Kalipad Prasad Mandal on October 31, 2016 at 10:56am

बहुत सुन्दर भावपूर्ण मुक्तक ,बधाई आपको आ,सुनील प्रसाद जी 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 31, 2016 at 10:13am
समसामयिक परिदृश्य पर बेहतरीन प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय सुनील प्रसाद शाहाबादी जी। कहीं कहीं (तीसरे चरण) में गेयता कम लगी है मुझे।

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