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2122 2122 212,
आइए कुछ तो सुनाते जाइए।
हाल अपना भी बताते जाइए। 1
-----
लोग तो बातें बनायेगें बहुत,
झूठ पर भी मुस्कुराते जाइए। 2
-----
आप अपनी बात पर कायम रहें,
निर्धनो के घर बसाते जाइए। 3
-----
आप अनदेखा न यूँ हमको करें,
रूठ बैठा दिल मनाते जाइए। 4
-----
डालकर हम पर नजर बस इक जरा,
प्यार का अरमां सजाते जाइए। 5
-----
आपके सपने हमारे नींद में,
होश खोए है जगाते जाइए। 6
------
ये सँवरना आपके ही है लिए,
आँख से काजल चुराते जाइए। 7
------
रस्म दुनिया की अगर जो है यही,
दुश्मनी कर के निभाते जाइए। 8
------
दर्द देकर ही मिले मुझको ख़ुशी,
पास आकर के सताते जाइए। 9
--------
भूलकर के गम जमाने का कभी,
गीत मेरे गुनगुनाते जाइए। 10
अप्रकाशित एवं मौलिक रचना।

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Comment

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Comment by नाथ सोनांचली on December 6, 2016 at 3:56am
आदरणीय जनाब सुनील प्रसाद जी सादर अभिवादन। बेहतरीन गजल पर दाद के साथ बधाई निवेदित है। शेष उस्ताद समर जी के बातो का ध्यान दीजियेगा

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 6, 2016 at 1:15am
आदरणीय सुनील जी, इस प्रस्तुति हेतु बधाई।
"कर के" के प्रयोग पर पुनर्विचार कीजियेगा।
भूल कर क्या होगा
भूल के क्या होगा
बाकी उस्ताद जी कह ही चुके हैं।

सादर
Comment by सुनील प्रसाद(शाहाबादी) on December 5, 2016 at 10:10pm
शुक्रिया जनाब बासुदेव जी हौसला अफजाई के वास्ते।
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on December 5, 2016 at 6:52pm
आ0 सुनील प्रसादजी उम्दा ग़ज़ल हुई है। दाद के साथ मुबारकबाद।
Comment by सुनील प्रसाद(शाहाबादी) on December 4, 2016 at 10:28pm
आदरणीय समीर कबीर जी,मोहतरम जनाब तस्दीकतस्दीक साहिब बजा फ़रमाया है जिसके लिए आपको तहेदिल से शुक्रिया।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 4, 2016 at 9:59pm

जनाब सुनील कुमार साहिब , सुन्दर ग़ज़ल हुई है, दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं
मुहतरम समर साहिब के मश्वरे पर ध्यान ज़रूर दें --

Comment by Samar kabeer on December 4, 2016 at 8:21pm
जनाब सुनील प्रसाद जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।
चौथे,आठवें और नवें शैर का ऊला मिसरा बह्र में नहीं हैं,आप उन्हें इस तरह कर सकते हैं:-
4थे का ऊला,"आप अनदेखा न यूँ हमको करें"
8वें का ऊला,"रस्म दुनिया की अगर है तो यही",'रस्म'शब्द स्त्रीलिंग है ।
9वें का ऊला"दर्द मुझको दे मिले जो भी ख़ुशी"
बाक़ी शुभ शुभ

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