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अगर बेटे की भाई से अदावत और हो जाती

1222 1222 1222 1222 तरही ग़ज़ल

अगर  बेटे की भाई से अदावत और हो जाती

मेरे अपने ही घर में इक बगावत और हो जाती

 

जहाँ खामोशी से मेरी जसामत और हो जाती

वहीं कुछ कहने से मेरे मुसाफत और हो जाती

  

हिमानी के शिखर पर डाल गलबहियाँ पलक मींचे

युगल प्रेमी यही सोचे क़यामत और हो जाती

 

सुलगती साँसे जलता तन पिला दो मय ये आँखों की

जहाँ सब कुछ हुआ इतनी इनायत और हो जाती

 

 इधर बेटा उधर भाई पिता करते तो क्या करते

अगर धृतराष्ट्र बनते तो बगावत और हो जाती

 

वो चिलमन ओट से रह रह के ताकें और छिप जाये

ये मंजर देख दिल कहता शरारत और हो जाती  

 मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by vijay nikore on October 13, 2016 at 1:58pm

बहुत ही खूबसूरत गज़ल बनी है। हार्दिक बधाई, आशुतोष जी।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on October 5, 2016 at 9:24pm

हिमानी के शिखर पर डाल गलबहियाँ पलक मींचे

युगल प्रेमी यही सोचे क़यामत और हो जाती

 

सुलगती साँसे जलता तन पिला दो मय ये आँखों की

जहाँ सब कुछ हुआ इतनी इनायत और हो जाती

 

 इधर बेटा उधर भाई पिता करते तो क्या करते

अगर धृतराष्ट्र बनते तो बगावत और हो जाती

 

बहुत खूब आदरणीय आशुतोष जी | बधाई |

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on October 2, 2016 at 11:50am

आ० आशुतोष जी -----बहुत बढ़िया  आनन्द  आ गया . सादर

Comment by Ashok Kumar Raktale on October 2, 2016 at 11:04am

इधर बेटा उधर भाई पिता करते तो क्या करते

अगर धृतराष्ट्र बनते तो बगावत और हो जाती......वाह ! खूब.

आदरणीय डॉ. आशुतोष मिश्रा साहब सादर, अच्छी तरही गजल कही है. बहुत-बहुत मुबारकबाद कुबूलें. सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 2, 2016 at 9:26am

आदरणीय आशुतोष भाई , अच्छी ग़ज़ल कही है दिल से बधाइयाँ स्वीकार करें ।

Comment by Samar kabeer on October 1, 2016 at 5:41pm
जनाब डॉ.आशुतोष मिश्रा जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on October 1, 2016 at 3:11pm
आदरणीय आशुतोष जी सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई ।
Comment by amita tiwari on September 30, 2016 at 8:48pm

 इधर बेटा उधर भाई पिता करते तो क्या करते

अगर धृतराष्ट्र बनते तो बगावत और हो जाती

इतिहास जीवित  हो गया   वाह !  बधाई 

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