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ग़ज़ल -- फ़क़ीर हूँ मैं नवाब जैसा। ( दिनेश कुमार )

121 22 -- 121 22

बहिश्त के इक गुलाब जैसा
बदन वो जामे शराब जैसा

मैं उसको पढ़ता हूँ झूमता हूँ
सुख़न की वो इक किताब जैसा

न पूछो दीवानगी का आलम
सुकूँ का पल इज़्तिराब जैसा

हर एक ख़्वाहिश सराब जैसी
हर एक लम्हा अज़ाब जैसा

वो अपने चेहरे से कब है ज़ाहिर
कि उसका चेहरा नक़ाब जैसा

है इश्क़ करना गुनाह बेशक
गुनाह लेकिन सवाब जैसा

फिसलता मुट्ठी से वक़्त हर पल
ये अपना जीवन हुबाब जैसा

जो सिर्फ़ अपनी ही धुन में रहता
फ़क़ीर हूँ मैं नवाब जैसा

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by दिनेश कुमार on April 14, 2016 at 6:41am
मुझ नाचीज़ की हौसला अफ़ज़ाई के लिए आप सब सम्मानित साथियों का दिल की गहराइयों से असीम धन्यवाद्.
Comment by gumnaam pithoragarhi on April 10, 2016 at 1:37pm

वाह सर जी वाह बहुत खूब ग़ज़ल हुई है वाह ................ बधाई ................

Comment by रामबली गुप्ता on April 7, 2016 at 7:30pm
वाह वाह।
फकीर हूँ मैं नवाब जैसा।
क्या बात है आदरणीय। बहुत खूब
Comment by Samar kabeer on April 6, 2016 at 6:04pm
जनाब दिनेश कुमार जी आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है, शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ।
Comment by narendrasinh chauhan on April 6, 2016 at 3:44pm

 बहुत ही  शानदार ग़ज़ल 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 6, 2016 at 11:11am

हर एक ख़्वाहिश सराब जैसी
हर एक लम्हा अज़ाब जैसा

फिसलता मुट्ठी से वक़्त हर पल
ये अपना जीवन हुबाब जैसा

वाह्ह  बहुत ही  शानदार ग़ज़ल कही है दिनेश जी दिली दाद कुबूलें 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 6, 2016 at 11:07am

आ0 भाई दिनेश जी. इस दिलकश ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई l

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 6, 2016 at 10:35am

हर एक ख़्वाहिश सराब जैसी
हर एक लम्हा अज़ाब जैसा....
वो अपने चेहरे से कब है ज़ाहिर
"है" उसका चेहरा नक़ाब जैसा...... शानदार 

बधाई 

Comment by दिनेश कुमार on April 5, 2016 at 8:13pm
तहे दिल से शुक्रिया आ. सरना सर जी।
Comment by Sushil Sarna on April 5, 2016 at 8:03pm

बहिश्त के इक गुलाब जैसा
बदन वो जामे शराब जैसा

मैं उसको पढ़ता हूँ झूमता हूँ
सुख़न की वो इक किताब जैसा
वाह दिनेश भाई वाह दिलकश अशआर दिल पे छा गए ... लोबान की महक से जिस्मों जां पे छा गए .... इस दिलकश ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय।

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