For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ज़िंदगी ही हो गयी क़ातिल करूँ तो क्या करूँ

हो गया दिल इश्क़ में बिस्मिल करूँ तो क्या करूँ
ज़िंदगी ही हो गयी क़ातिल करूँ तो क्या करूँ

इक तेरे दर के सिवा लगता नहीं है दिल कहीं
रास आती है नहीं महफिल करूँ तो क्या करूँ

तू ही साँसों में है धड़कन मे ख़यालों में है तू
बस तुम्ही को चाहता है दिल करूँ तो क्या करूँ

लीक से हटकर अलग चलने की है फ़ितरत मिरी
भीड़ में होता नहीं शामिल करूँ तो क्या करूँ

इक तेरे जाने से रस्ते हो गए मुश्किल मिरे
दूर अब लगने लगी मंज़िल करूँ तो क्या करूँ

आज तक चलता रहा राहे सदाक़त पर मगर
राह आगे लगती है मुश्किल करूँ तो क्या करूँ

आज में जीने का 'सूरज' फलसफा अपना लिया
कोई माज़ी है न मुस्तकबिल करूँ तो क्या करूँ

डॉ सूर्या बाली 'सूरज'
(मौलिक और अप्रकाशित)

Views: 547

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 6, 2016 at 11:19am

बहुत शानदार उम्दा ग़ज़ल आ० बाली जी दिल से दाद हाजिर है |

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 1, 2016 at 9:53am

आदरणीय डॉ बाली जी ,,हर शेर उम्दा हैआज में जीने का 'सूरज' फलसफा अपना लिया
कोई माज़ी है न मुस्तकबिल करूँ तो क्या करूँ....वाह ..इस बेहतरीन रचना ..इस रवानगी के लिए ह्रदय से बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by narendrasinh chauhan on March 30, 2016 at 4:09pm

खूबसूरत  ग़ज़ल ,  बहुत मुबारकबाद

Comment by नादिर ख़ान on March 30, 2016 at 11:39am

आदरणीय डॉ  सूर्या बाली जी ग़ज़ल की रवानगी देखते ही बनती है,  खूबसूरत  ग़ज़ल के लिए बहुत मुबारकबाद। .... 

Comment by रामबली गुप्ता on March 30, 2016 at 9:42am
शानदार ग़ज़ल आ.बाली जी। दिली दाद कुबूल फरमाएं।
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on March 29, 2016 at 10:03pm
बड़ी ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है आदरणीय सूर्या बाली जी। दाद कुबूल करें
Comment by Sushil Sarna on March 29, 2016 at 7:43pm

हो गया दिल इश्क़ में बिस्मिल करूँ तो क्या करूँ
ज़िंदगी ही हो गयी क़ातिल करूँ तो क्या करूँ

इक तेरे दर के सिवा लगता नहीं है दिल कहीं
रास आती है नहीं महफिल करूँ तो क्या करूँ

वाह आदरणीय डॉ. सूरज बाली जी वाह बड़े ही खूबसूरत अहसासों को आपने अपनी ग़ज़ल में सजाया है। दिली मुबारक बाद कबूल फरमाएं सर।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on March 29, 2016 at 6:29pm

बधाई इस ग़ज़ल के लिए 
तू ही साँसों में है धड़कन मे ख़यालों में है तू
बस तुम्ही को चाहता है दिल करूँ तो क्या करूँ.. इसे फिर देख लें,, शतुर्गुरबा नुमाया है ...तुम्ही को तुझी करने से शायद ठीक हो सके 
सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Monday
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
Monday
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service