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कैनवास ...

मुझे बहुत खुशी हुई थी
जब हर शख़्श
तुम्हें सलाम कर रहा था
तुम्हारे हर रंग की कद्र हो रही थी
तुम वाहवाही के नशे में गुम थे //


भीड़ में तन्हा
मैं तुम्हारे चहरे को निहार रही थी

इतने चहरे लिए
न जाने लोग कैसे जी लेते हैं
खुद को ज़िंदा रखने के लिए
न जाने
कितनों की खुशियाँ पी लेते हैं //


तुम कैसे पुरुष हो
औरत चाहते हो पर
उसे समझ नहीं पाते
उसके अहसासों से खिलवाड़ करते हो
न जाने कौन से चहरे से
उसके ख्वाब को फरेब देते हो
वो पानी की तरह साफ़ होती है
हर शीशे के साथ होती है
उसके हर पल में तुम जीते हो
वो तुम्हारे पल के लिए मर जाती है
तुम हर पल जीत जाते हो
वो हर पल हार जाती है//

आज दुनियावी नज़रों में
मैं एक महान कलाकार की प्रेरणा हूँ
वो प्रेरणा जिसे तुमने कभी
नज़र भर के भी नहीं देखा
बस रहा तो जिस्म भर का साथ रहा
रात भी स्याह रही
सहर भी ख़फा रही
मुझे चाहे तुमने कभी
इतनी शिद्दत से नहीं चाहा
जितनी शिद्दत से तुमने मुझे
अपनी तूलिका से
कैनवास पर जीवन दिया //


आज ये कैनवास बिक जाएगा
और इसके साथ ही बिक जाएगी
कैनवास पर तुम्हारी तूलिका से
नारी की अन्तर्दुविधा को प्रतिबिंबित करती
तुम्हारी ये प्रेरणा भी//

कल फिर तुम
एक नए चहरे के साथ आओगे
अपना पुरुषार्थ दिखाओगे
मैं बेबस हो जाऊँगी
फिर तूलिका से छली जाऊँगी
एक नयी प्रेरणा बन कर 

मैं कैनवास के मौन बिम्ब को जीती
फिर बिक जाऊँगी

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Sushil Sarna on March 16, 2016 at 12:46pm

आ. रामबली गुप्ता जी प्रस्तुति में निहित भावों को आत्मीय सम्मान देने का तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on March 16, 2016 at 12:45pm

आ.  नयना(आरती)कानिटकर   जी प्रस्तुति में निहित भावों पर स्वीकारात्मक एवं  प्रशंसात्मक प्रतिक्रिया का तहे दिल से शुक्रिया। 

Comment by Sushil Sarna on March 16, 2016 at 12:44pm

आ.  राहिला   जी प्रस्तुति में निहित भावों पर आपकी प्रशंसात्मक प्रतिक्रिया का तहे दिल से शुक्रिया। 

Comment by रामबली गुप्ता on March 15, 2016 at 7:09pm
बहुत ही सुंदर रचना आ. सुशील सरना जी
Comment by नयना(आरती)कानिटकर on March 15, 2016 at 2:36pm

आदरणीय सुशील सर जी! बहूत सुंदर कैनवास उभारा आपने

Comment by Rahila on March 15, 2016 at 2:14pm
बहुत -बहुत बधाई इस बेहतरीन रचना के लिये आदरणीय सुशील सर जी! आपका लेखन वाकई काबिले तारीफ़ है । सादर नमन
Comment by Sushil Sarna on March 15, 2016 at 12:24pm

आदरणीय समीर कबीर साहिब रचना को आपने अपनी आत्मीय प्रशंसा से नवाज़ा इसके लिए बंदा आपका तहे दिल से शुक्रिया अदा करता है। 

Comment by Samar kabeer on March 14, 2016 at 11:18pm
जानब सुशील सरना जी,आदाब,इस शानदार प्रस्तुति के बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Sushil Sarna on March 14, 2016 at 5:00pm

आदरणीय    TEJ VEER SINGH     जी रचना को अपने स्नेहिल शब्दों से मान देने का हार्दिक अाभार। 

Comment by TEJ VEER SINGH on March 14, 2016 at 2:11pm

हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी!बेहतरीन प्रस्तुति!

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