For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सपनों के झिलमिल से जुगनू (एक गीत).............डॉ० प्राची सिंह

सपनों के झिलमिल से जुगनू पलकों पर पल भर आ ठहरे...

 

नन्हें पर हैं, पर भोला मन

नभ छू ले करता अभिलाषा,

कंटीले तारों की जकड़न

देगी केवल हाथ हताशा,

अन्धकार नें बरबस नोचे परियों के भी पंख सुनहरे...

सपनों के झिलमिल से जुगनू पलकों पर पल भर आ ठहरे...

 

सपनों को मंज़ूर हुआ कब 

ढुलक आँख से झरझर बहना,

हँसकर स्वीकृत किया उन्होंने 

सीपी में मोती बन रहना,

सागर ने अपने सीने में राज़ छुपाए हैं कुछ गहरे...

सपनों के झिलमिल से जुगनू पलकों पर पल भर आ ठहरे ...

जुगनू की लौ बने सितारा

जंग अँधेरे से जारी है,

दृढ़ आधार मिले सपनों को

कण-कण इसकी तैयारी है,

स्याह अमावस जगमग कर दें, चीरें अन्धकार के पहरे...

सपनों के झिलमिल से जुगनू पलकों पर पल भर आ ठहरे...

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 944

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by shree suneel on June 8, 2015 at 1:18am
भावनाओं से भरी सुन्दर, आकर्षक प्रस्तुति आदरणीया. हार्दिक बधाई आपको इस गीत के लिए.
Comment by Dr. Vijai Shanker on June 6, 2015 at 10:27pm

सपनों को मंज़ूर नहीं पर
ढुलक आँख से झरझर बहना,
हँसकर स्वीकृत उन्हें हमेशा
मोती बन सीपी में रहना,
बहुत सुन्दर, भावपूर्ण, आदरणीय सुश्री डॉo प्राची सिंह जी, बधाई, सादर।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 6, 2015 at 2:43pm

आ० गिरिराज जी,आपने एक दम सही पहचाना जंग का बिंदु बिलकुल नहीं दिखा इस कारण मात्रा साधने का मशवरा  दे बैठी उस वक़्त थोडा जल्दी में भी थी |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 6, 2015 at 2:09pm

आदरणीया प्राची जी , बहुत मन भावन  गीत रचना हुई  है , आपको हार्दिक बधाइयाँ ।  

मुझे लगता है ,  आप  -- जंग अँधेरे से जारी है , कहना चाह रहीं है , जिसे आ. राजेश जी , जग अँधेरे से जारी है , पढ़ गईं है , इसी लिये एक मात्रा कम गिन रहीं हैं , और अँधियारा करने की सलाह  दे रहीं है , क्या सच है ? बताइयेगा । 

Comment by maharshi tripathi on June 5, 2015 at 7:40pm

इस सुन्दर गीत पर आपको हार्दिक बधाई आ.Dr.Prachi Singh जी |

Comment by Shyam Narain Verma on June 5, 2015 at 3:45pm
वाह आदरणीया बहुत ही सुन्दर भाव ///हार्दिक बधाई स्वीकारें  
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 5, 2015 at 1:46pm

महनीया प्राची जी

   आप देर से ब्लॉग पर आती है पर जब आती है तो छा जाती हैं .क्या सुन्दर गीत रचा है ---पहले जुगनू की  बात फिर सपने की बात और अंत में अन्धकार से लड़ने की बात . आ० राजेश जी बड़ी विज्ञ और जानकार हैं पर यहाँ जो विकल्प उन्होंने सुझाया है  वह् गीत  की आत्मा से न्याय कर पायेगा इसमें मुझे संदेह् है , मैं  दीदी के विकल्प का सम्मान करते हुए उनसे छमा चाहते हुए  कहना चाहूँगा की मेरे विचार से आपने जो लिखा है वही अधिकु उपयुक्त है -------------- स्याह अमावस जगमग कर दें --- यहाँ दें के स्थान पर दे उपयक्त है  पर यह टाईप त्रुटि हो सकती है. इस कविता के लिया आपको बहुत बहुत बधायी. सादर .  

Comment by Sushil Sarna on June 5, 2015 at 1:35pm

सपनों को मंज़ूर नहीं पर
ढुलक आँख से झरझर बहना,
हँसकर स्वीकृत उन्हें हमेशा
मोती बन सीपी में रहना,
सागर ने अपने सीने में राज़ छुपाए हैं कुछ गहरे...
सपनों के झिलमिल से जुगनू पलकों पर पल भर आ ठहरे ...

वाह आदरणीया डॉ प्राची सिंह जी वाह … बहुत ही मासूम,सुंदर और गहन भावों को अभिव्यक्त करता प्यारा सा गीत .... हार्दिक बधाई बधाई स्वीकार करें आदरणीया जी।

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on June 5, 2015 at 12:17pm

बहुत सुन्दर गीत हुआ है आ० प्राची जी! हार्दिक बधाई!

सादर!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 5, 2015 at 12:10pm

मनमोहक मुखड़ा लेकर बहुत सुन्दर गीत लिखा है प्रिय प्राची जी ,बहुत बहुत बधाई ,अंतिम बंद में ---जंग अँधेरे से जारी है,की जगह ---जग अँधियारे से ज़ारी है करें तो लय बेहतर बन रही है मेरे ख़याल से .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
5 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
19 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service