For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

विकट विरल है राह .................

विकट विरल है  राह  कठिन कदम कदम कुहासा है

खड़ा मुसाफिर मुश्किल में वो बेबस बहुत रूआंसा है

संयम और सहजता से निरंतर नित निज काम करो

शनै शनै पुरजोर प्रयासों से प्रज्ज्वलित इक आशा है

संकल्पों के यज्ञकुंड में श्रमनीर का  अर्घ्य दान करो

दिनकर दिलबर रश्क करे जिन्दगी की यह परिभाषा है

अरमानों के बीज रोप कर  सींचो  रोज  पसीने से

छ्टे कुहासे साफ़ डगर स्फुटन अंकुर की अभिलाषा है

@आनंद ०७/०१/२०१५ "मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 442

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on January 26, 2015 at 6:57pm

सुंदर भावपूर्ण प्रस्तुति, आदरणीय आनंद जी. बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 26, 2015 at 10:48am

आदरणीय आनंद  भाई , बहुत सुन्दर रचना की है , हार्दिक बधाई । बस अग्रजों की बातों का खयाल  करें ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 26, 2015 at 8:40am

सुंदर भावपूर्ण रचना है आनंदजी इस प्रयास हेतु बधाई


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 25, 2015 at 1:42pm

आनंद जी, इस सद्प्रयास हेतु बधाई, सुन्दर भाव से युक्त है आपकी रचना, मित्रों की कही बात विचारणीय है.

Comment by somesh kumar on January 25, 2015 at 7:47am

सुंदर प्रस्तुति पर वही बात टंकन -त्रुटियों पर ध्यान दें |ये विचारों की प्रभाविकता को कम कर देते हैं 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 25, 2015 at 3:24am

सुन्दर प्रस्तुति ....  तुकबंदी के शब्दों और आदरणीय हरिप्रकाश जी की बातों पर गौर जरुर कीजियेगा.

Comment by Sushil Sarna on January 24, 2015 at 7:13pm

आदरणीय सुंदर प्रस्तुति  .... आदरणीय दूबे जी के कथन से मैं सहमत हूँ। 

Comment by Hari Prakash Dubey on January 24, 2015 at 6:37pm

आनंद जी सुन्दर रचना हार्दिक बधाई आपको ... बेवश --- बेबस है ...रुआसा .....रुआंसा......शब्द को देख लीजियेगा !

 

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 24, 2015 at 6:28pm
बहुत सुन्दर आनन्द जी ! बधाई स्वीकार करें!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
5 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
18 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service