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ग़ज़ल (कौन है हमदर्द यारा )

२१२२ २१२२

घिर गया है मर्द यारा !

कौन है हमदर्द यारा !!

लोग आते बात करते !

दे गये सरदर्द यारा !!

आज गुस्से में है बीवी !

दे दिया है दर्द यारा !!

यार अब तो बात करना !

मत दिखाना फर्द यारा !! (फर्द -सूची )

वो परेशां है बहुत अब !

उसको देना कर्द यारा !!

मत खड़े हो सब यहाँ पर !

लो गिरी है गर्द यारा !!

लो रजाई साथ में भी !

रात होती सर्द यारा !!

(मौलिक और अप्रकाशित )

** आलोक **

मथुरा

Views: 556

Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 19, 2015 at 12:09pm

आदरणीय आलोक भाई , छोती बहर मे बहुत सुन्दर गज़ल हुई है , दिली बधाइयाँ स्वीकार करें ।

Comment by somesh kumar on January 18, 2015 at 11:40pm

गज़ल लिखना भी एक लिहाज़ है 

तिरा अंदाज़ भी क्या अंदाज़ है |

दाद देने के नही काबिल हूँ लेकिन

बहुत खूब तिरा अंदाज़ है |

Comment by gumnaam pithoragarhi on January 18, 2015 at 3:56pm

वाह खूब काफिया कमाल है खूब निभाया है बधाई

यार अब तो बात करना !

मत दिखाना फर्द यारा

क्या ये दोष है या नहीं गुनी बताएँगे ......

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 18, 2015 at 1:14pm

आदरणीय आलोक जी

क्या बात है i बहुत सुन्दर i

Comment by Hari Prakash Dubey on January 18, 2015 at 5:21am

आदरणीय आलोक मित्तल जी सुन्दर रचना .... आज गुस्से में है बीवी ! दे दिया है दर्द यारा !! बधाई

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 17, 2015 at 10:44pm
आदरणीय सुन्दर गजल हेतु बधाई स्वीकार करें

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 17, 2015 at 9:10pm

आदरणीय आलोक मित्तल जी इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई 

घिर गया है मर्द यारा !

कौन है हमदर्द यारा !!

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