For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हे प्रभु, सुन !
कर दें अँधेरा
चारों तरफ.. .  
उजाले काटते हैं / छलते है !
लगता है अब डर
उजालें से
दिखती हैं जब
अपनी ही परछाई -
छोटी से बड़ी
बड़ी से विशालकाय होती हुई.
भयभीत हो जाती हूँ !
मेरी ही परछाई मुझे डंस न ले,
ख़त्म कर दे मेरा अस्तित्व !
जब होगा अँधेरा चारों ओर
नहीं दिखेगा
आदमी को आदमी !
यहाँ तक कि हाथ को हाथ भी.
फिर तो मन की आँखें
स्वतः खुल जाएँगी !
देख सकेंगे फिर सभी...
/ और मैं भी /
दिल की सच्चाई !

............

सविता मिश्रा

"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 886

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by savitamishra on August 22, 2014 at 9:00pm

 आदरणीय सौरभ भैया सादर नमस्ते ........यह हमारी लेखनी की खुशनसीबी जिसे पढ़ आपको अपनी रचना याद आ गयी, बस fb पर एक ग्रुप अँधेरे पर कुछ लिखना था, यह लिख गयी वहां समय समाप्त हो चूका था, तो यहाँ पोस्ट कर दी अपना ही टेस्ट लेने के लिय |

हे प्रभु, सुन !
कर दें अँधेरा..
चारों तरफ  ...जाहिर है भैया आपकी ही अधिक संप्रेषणीय है, ..हम काव्य और शिल्प में शून्य है मानते है ...कोशिश कर रहें हैं अब ....कहते हैं ना जब जागो तभी सबेरा

आपकी उपस्थिति से हार्दिक प्रसन्नता हुई हमें यूँ ही मार्गदर्शन करते रहें हो सकता है हममें सुधार हो ही जाए |
ऐसा नहीं, अँधेरे में भागता हर अभागा
पलायनवादी ही हो,
चकचकाती इस उजली धूप से बच पाने की
इच्छा भी हो सकती है. .............खुबसुरत अंश को सांझा करने के लिय आभारी है हम आपके

Comment by savitamishra on August 22, 2014 at 8:50pm

विजय भैया सादर नमस्ते ........प्रयास तो कर रहें हैं भैया ..पुनः शुक्रिया दिल से भैया आपका

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 22, 2014 at 3:35pm

बहुत सुंदर और चिंतन परक भाव रचना के लिए हार्दिक बधाई | बाकी आदरणीया सौरभ जी ने रचना पर विस्तार से 

अपनी एक रचना के साथ भाव साझा किये है जो बहुत सार्थक है | सादर 

Comment by vijay nikore on August 22, 2014 at 2:58pm

आपकी कविता में भाव इतने अच्छे लगे कि इसे पढ़ने का एक बार नहीं, तीन बार आनन्द लिया।

आपको हार्दिक  बधाई, आदरणीया सविता जी।

सौरभ जी, आपकी पंक्तियाँ भी बहुत अच्छी लगीं।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 22, 2014 at 2:47pm

वैचारिक कविता के लिए धन्यवाद, आदरणीया सविताजी.

उजालों के दायरे में काली परछाइयों का सच बड़ा ही भयावह होता है जिसे आपकी रचना बखूबी साझा करती है.

अँधेरा सर्वव्यापी है. यह एक अनायास उपस्थिति है, जबकि उजालों के लिए प्रयास करना पड़ता है. परन्तु, यह भी विड़ंबना ही है कि ऐसे ही उजाले कालान्तर में काली कारस्तानियों के कारण हो जाते हैं.

मैं अपनी एक बहुत पुरानी कविता के एक तदनुरूप अंश को आपसे साझा करने का लोभ संवरण नहीं कर पा रहा हूँ -

ऐसा नहीं, अँधेरे में भागता हर अभागा
पलायनवादी ही हो,
चकचकाती इस उजली धूप से बच पाने की
इच्छा भी हो सकती है.  

उजालों और अँधेरों की अपनी-अपनी विवेचनाएँ और परिस्थितियाँ हो सकती हैं.  होती हैं.
इस रचना के लिए पुनः धन्यवाद.


हाँ, इस प्रस्तुति के शिल्प को लेकर एक बात अवश्य कहूँगा कि आवश्यक इंगितों को आपने बढिया निभाया है. किन्तु अधिक शाब्दिक होने से बचने का प्रयास करें.

कविता की कई पंक्तियाँ अनावश्यक हैं, जिनके बिना कविता अधिक कसी हुई और प्रभावी होती. वस्तुतः ऐसी पंक्तियाँ कविता में प्रयुक्त इंगितों की व्याख्या अधिक हु करती हैं. अतः झोल पैदा करती हैं.

दूसरे, ये प्रभु सुन कर दें अँधेरा चारों तरफ  
की जगह इसे ऐसे पढ़ें -
हे प्रभु, सुन !
कर दें अँधेरा..
चारों तरफ  

कौन अधिक संप्रेषणीय है ?
विश्वास है, आप इशारा समझ गयी होंगीं.

शुभेच्छाएँ

Comment by विजय मिश्र on August 22, 2014 at 10:21am
स्नेह एवं आशीर्वाद सविता बहन | मंच पर प्रस्तुति देख ही मैं विभोर हो गया था |रचती रहिए और सकारात्मकता जगत को प्राप्त होता रहे |पुनः बधाई |
Comment by savitamishra on August 21, 2014 at 7:32pm

विजय भैया सादर नमस्ते .............शुक्रिया दिल की गहराइयों से आदरणीय विजय भैया आपका ..आप यहाँ भी मिल ही गये .....अपनों के लिय दुनिया बहुत छोटी है :)

Comment by विजय मिश्र on August 21, 2014 at 4:32pm
बहुत सुंदर , साधुवाद सविता बहन
Comment by savitamishra on August 20, 2014 at 7:49pm

चाचाजी सादर नमस्ते ..............आभार आपका दिल से ....अप्र्रुब से था कि शायद मन की उड़ान सही है पर किसी के ना बोलने पर लगता है ना बकवास ही है ...आपने आकार कमेन्ट कर राहत की सांस दी ..दिल से शुक्रिया आपका चाचाजी

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 20, 2014 at 2:18pm

सविता जी

अंधकार की भी अपनी उपियोगिता है यह आपने अच्छी तरह समझाया i सादर i  

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
8 hours ago
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Thursday
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service