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सौतेली माँ

जब मैं छोटा था

भूख से तड़पता था

लेकिन अब –

वो हर वक्त पूछती है

बेटा खाना खाओगे !

.            

पुजारिन

करबध्द खड़ी है

न जाने कब से ?

मीरा की तरह

और , कन्हैया –

किसी राधा के साथ

रास रचाने

निकल गए हैं ।

  --- मौलिक एवं अप्रकाशित ---

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Comment by S. C. Brahmachari on March 30, 2014 at 8:54pm
श्रद्धेय भाई सौरभ पाण्डेय जी ,
रचना पर प्रतिक्रिया हेतु आपका हार्दिक आभार !
Comment by S. C. Brahmachari on March 30, 2014 at 8:48pm
डॉ0 आशुतोष मिश्रा जी ,
क्षणिकाओं के सागर मंथन एवं प्रशंसा के लिए आपका हार्दिक आभार !

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 28, 2014 at 3:25am

आपकी प्रस्तुति के लिए बधाई.

Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 25, 2014 at 5:21pm

आदरणीय ब्रह्मचारी जी ..गागर में सागर की तरह है आपकी ये रचना ..इन क्षदिकाओं के लिए तहे दिल धन्यवाद ..सादर प्रणाम के साथ

Comment by S. C. Brahmachari on March 25, 2014 at 2:53pm
रचना की प्रशंसा हेतु हार्दिक आभार श्री जीतेंद्र जी !
Comment by S. C. Brahmachari on March 25, 2014 at 2:50pm
श्री गिरिराज भण्डारी जी ,
क्षणिकाये अच्छी लगी , आपका हार्दिक आभार !
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 24, 2014 at 10:40am

बहुत सुंदर रचना आदरणीय ब्रह्मचारी जी, बधाई आपको


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 24, 2014 at 10:26am

आदरणीय ब्रह्मचारी भाई ,  क्षणिकाये बहुत सुन्दर लगीं ,  हार्दिक बधाई ॥

कृपया ध्यान दे...

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