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ग़ज़ल- जिंदगी कितनी हंसीं है आओ आकर देख लो

जिंदगी कितनी हंसीं है आओ आकर देख लो
एक पिंजराबंद पंछी को उड़ाकर देख लो

तुम हमें समझा रहे हो बेवफाई का सबब?
फैसला हो जायेगा नज़रें मिलाकर देख लो

मंजिलें जब पास हों तब और करती हैं भ्रमित
जो न हो विश्वास क़दमों को बढ़ा कर देख लो

हम निहत्थे हैं मगर माँ की दुवाएँ साथ हैं
जीत किसकी, हार किसकी आज़मा कर देख लो

माँ मुझे मालूम है हालात कुछ अच्छे नहीं
हौसला हो जायेगा गर मुस्कुरा कर देख लो

लोग मुझसे पूछते हैं शायरी कैसे लिखें
दर्द को पन्ने पे रखकर गुनगुना कर देख लो

- मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Ajay Agyat on March 2, 2014 at 1:59pm

umda

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 2, 2014 at 10:36am

मंजिलें जब पास हों तब और करती हैं भ्रमित
जो न हो विश्वास क़दमों को बढ़ा कर देख लो.........यह शेर बहुत खास हुआ

बेहद खुबसूरत गजल आदरणीय अनुराग जी, हार्दिक बधाई आपको


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 2, 2014 at 9:31am

आदरनीय अनुराग भाई , बहुत खूब सूरत ग़ज़ल कही है , आपको हार्दिक बधाइयाँ , आदरणीय मतला बहुत पसन्द आया , आपको बधाइयाँ ॥

जिंदगी कितनी हंसीं है आओ आकर देख लो
एक पिंजराबंद पंछी को उड़ाकर देख लो ------ बहुत खूब ॥ 

Comment by Anurag Anubhav on March 2, 2014 at 9:19am
आदरणीय सरिता भाटिया जी, मैं स्वयं ग़ज़ल का बिलकुल नया विद्यार्थी हूँ.. अतः अगर कहीं भूल हो गयी हो तो मुझे अवगत करें... मेरे मुताबिक मैंने ये ग़ज़ल 2122/2122/2122/212 पर लिखी है... आगे सभी जानकार मेरा मार्गदर्शन करें... धन्यवाद
Comment by बृजेश नीरज on March 2, 2014 at 8:06am

बहुत अच्छी ग़ज़ल है! आपको हार्दिक बधाई!

यदि बहर का जिक्र किया गया होता तो हम जैसे नव-विद्यार्थियों को भी शिल्प समझने में आसानी होती.

सादर!

Comment by atul kushwah on March 1, 2014 at 10:33pm

जिंदगी कितनी हंसीं है आओ आकर देख लो
एक पिंजराबंद पंछी को उड़ाकर देख लो..
बहुत खूबसूरत, बधाई आदरणीय अनुराग जी।

Comment by कल्पना रामानी on March 1, 2014 at 9:10pm

वाह, वाह!!हर शे'र लाजवाब! मतला विशेष पसंद आया बहुत ही सुंदर गजल। आदरणीय अनुराग जी,बहुत बहुत बधाई आपको 

Comment by Sarita Bhatia on March 1, 2014 at 8:35pm

वाह ,बहुत बधाई पर आदरणीय गजल शायद बह्र में नहीं 

Comment by annapurna bajpai on March 1, 2014 at 7:29pm


हम निहत्थे हैं मगर माँ की दुवाएँ साथ हैं
जीत किसकी, हार किसकी आज़मा कर देख लो

माँ मुझे मालूम है हालात कुछ अच्छे नहीं
हौसला हो जायेगा गर मुस्कुरा कर देख लो...................... बहुत खूब , हर अशर कमाल का हुआ है । आ0 अनुराग जी दाद कुबूल फरमाए । 

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