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Anurag Anubhav
  • 30, Male
  • Allahabad, Uttar Pradesh
  • India
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Anurag Anubhav's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad
Native Place
kaushambi
Profession
student
About me
i love to read.. i love to write.... i love to create...

Anurag Anubhav's Blog

ग़ज़ल- रात इक जुगनू हवा में कुलबुलाता रह गया

रात इक जुगनू हवा में कुलबुलाता रह गया

रौशनी के वास्ते खुद को जलाता रह गया



पेट की मजबूरियां थीं, हम शहर में बस गए

गाँव हमको ख्वाब में वापस बुलाता रह गया



कोठियाँ बेशक मेरे बच्चों ने कर दी हैं खड़ी

पर तुम्हारी याद का उसमें अहाता रह गया



आज मुझको काम से इक रोज की फुर्सत मिली

आज दिनभर लाडला बस मुस्कुराता रह गया



धन की देवी आपके घर क्यों कभी रुकती नहीं

चौक पर बैठा नजूमी ये बताता रह गया



आँख का हर प्रश्न आंसू की सतह में बह… Continue

Posted on March 14, 2014 at 10:59pm — 25 Comments

ग़ज़ल- जिंदगी कितनी हंसीं है आओ आकर देख लो

जिंदगी कितनी हंसीं है आओ आकर देख लो

एक पिंजराबंद पंछी को उड़ाकर देख लो



तुम हमें समझा रहे हो बेवफाई का सबब?

फैसला हो जायेगा नज़रें मिलाकर देख लो



मंजिलें जब पास हों तब और करती हैं भ्रमित

जो न हो विश्वास क़दमों को बढ़ा कर देख लो



हम निहत्थे हैं मगर माँ की दुवाएँ साथ हैं

जीत किसकी, हार किसकी आज़मा कर देख लो



माँ मुझे मालूम है हालात कुछ अच्छे नहीं

हौसला हो जायेगा गर मुस्कुरा कर देख लो



लोग मुझसे पूछते हैं शायरी कैसे… Continue

Posted on March 1, 2014 at 12:20am — 19 Comments

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At 10:40pm on February 10, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 10:17am on October 3, 2013,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

आपका इस मंच पर हार्दिक स्वागत है, भाई अनुराग अनुभव. भले तनिक विलम्ब से सही, लेकिन आपका आना सुखद लगा.

शुभेच्छाएँ.

 
 
 

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