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तमन्ना यही एक पूरी खुदा कर : अरुन शर्मा 'अनन्त'

बह्र : मुतकारिब मुसम्मन सालिम

तमन्ना यही एक पूरी खुदा कर,
जमी ओढ़ लूँ मैं फलक को बिछा कर,

शुकूँ से भरी नींद अँखियों को दे दे,
दुआओं तले माँ के बिस्तर लगा कर,

बढ़ा हौसला दे मेरी झोपड़ी का,
बुजुर्गों के आशीष की छत बना कर,

अमन शान्ति का शुद्ध वातावरण हो,
मुहब्बत पिला दे शराफत मिला कर,

सितारों भरी एक दुनिया बसा रब,
अँधेरे का सारा जहाँ अब मिटा कर..

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by ram shiromani pathak on December 6, 2013 at 1:29am

अमन शान्ति का शुद्ध वातावरण हो,
मुहब्बत पिला दे शराफत मिला कर/////////////आदरणीय  अरु भाई बहुत सुन्दर ग़ज़ल, हार्दिक बधाई आपको 

Comment by coontee mukerji on December 6, 2013 at 1:00am

अमन शान्ति का शुद्ध वातावरण हो,
मुहब्बत पिला दे शराफत मिला कर,...........आमीन!

Comment by ajay sharma on December 5, 2013 at 11:11pm

शुकूँ से भरी नींद अँखियों को दे दे, 
दुआओं तले माँ के बिस्तर लगा कर,........shaandaar 

Comment by ajay sharma on December 5, 2013 at 11:11pm

bahut hi khoob gazal hai .......


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 5, 2013 at 9:03pm

आदरनीय अरुन अनंत भाई , उम्दा गल कही है , सभी शे र सुन्दर हुये हैं !!! आपको हार्दिक बधाई !!!!

एक सलाह यूँ ही सा - फ़लक ओढ़ लूँ मै ज़मीं को बिछा कर - , अगर कहें तो कैसा रहे !!! और अँधेरे की जगह अँधेरों कैसा लगेगा !!!!

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 5, 2013 at 9:02pm

अरुण जी ..बहुत ही बढ़िया अभिलाषा को व्यक्त किया है आपने अपनी ग़ज़ल के माध्यम से ..इश्वर आपकी मनोकामना पूरी करे,,,मेरी तरफ से हार्दिक बधाई ....सादर 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 5, 2013 at 7:41pm

अनंत जी

बहुत सुन्दर ग़ज़ल  हुयी  है i शुभ कामनाये i

Comment by Sarita Bhatia on December 5, 2013 at 6:10pm

वाह अरुण क्या बात हर अशआर जबर्दस्त 

हार्दिक बधाई 

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