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ग़ज़ल -निलेश 'नूर'-किसी के दिल से

1212 1122 1212 22  
...

किसी के दिल से, निगाहों से जो उतर जाए,
भला वो शख्स अगर जाए तो किधर जाए.
...

बहुत उड़ान ये भरता है आसमानों की,  
कोई तो चाँद के दो चार पर क़तर जाए.
...

सुलग रहे है जुदाई की आग में हम तुम,
इस आरज़ू में जले है, ज़रा निखर जाए.
...

पता नहीं हैं हुई क्या हमारी मंज़िल अब,
निकल पड़े हैं जिधर लेके रहगुज़र जाए. 
...

सँभालियेगा इसे आप अब नज़ाक़त से,
कहीं न दिल ये मेरा टूट कर बिखर जाए.
...

हुई जो आँख मेरी बंद, ‘नूर’ फैल गया,  
दिखे ख़ुदा ही मुझे अब जिधर नज़र जाए.  
......................................................
मौलिक व अप्रकाशित 

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 18, 2013 at 9:14pm

//बहुत उड़ान ये भरता है आसमानों की,  
कोई तो चाँद के दो चार पर क़तर जाए.//

वाह वाह, बढ़िया शेर, बढ़िया कहन है । अच्छी ग़ज़लकी प्रस्तुति हुई है । बधाई स्वीकार करें आदरणीय । 

Comment by डॉ. अनुराग सैनी on November 18, 2013 at 7:20pm

आदरणीय बहुत खूब कहा है , बहुत उम्दा ग़ज़ल है 

बधाई इसके लिए कई बार पढ़ा 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 18, 2013 at 5:24pm

सँभालियेगा इसे आप अब नज़ाक़त से, 
कहीं न दिल ये मेरा टूट कर बिखर जाए.
...

हुई जो आँख मेरी बंद, ‘नूर’ फैल गया,  
दिखे ख़ुदा ही मुझे अब जिधर नज़र जाए....आदरणीय नूर जी आप सतत उम्दा ग़ज़लें लिख रहे हैं ..एक से बढ़कर एक ..इस ग़ज़ल के ये दो शेर मुझे बेहद पसंद आये .जाए के मामले में समझ तो नहीं प् रहा हूँ ..रदीफ़ जाए के मामले में पढ़ते समय अलग अलग सा लग रहा है ..बहुत भली भाँती इस फर्क को महसूस नहीं कर पा रहा हूँ . 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on November 18, 2013 at 4:39pm

आदरणीय निलेश भाई बहुत खूबसूरत उस्तादाना ग़ज़ल है, मतले शुरू हुआ मक्ते पे जाके रुका, वाह वाह वाह दिली दाद कुबूल करेंl


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 18, 2013 at 3:13pm
आदरणीय नीलेश भाई, बहुत खूब सूरत गज़ल कही है , बहुत खूब सूरत शे र कहे है!!!!! आपको हार्दिक बधई !!!!
किसी के दिल से, निगाहों से जो उतर जाए,
भला वो शख्स अगर जाए तो किधर जाए.- लाजवाब मतला के लिये बधाई !!!

ज़रा निखर जाए -को सुधार कर- ज़रा सुधर जाएँ , कर लीजियेगा , उला में बात बहुवचन में है अतः सानी भी बहु वचन मे होना चाहिये !!!!
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 18, 2013 at 2:26pm

चाँद के पर कतरने कि कुव्वत तो बस आपके ही पास है  i आदाब नूर भाई i

Comment by CHANDRA SHEKHAR PANDEY on November 18, 2013 at 12:20pm
सुन्दर वाहह

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