For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अभी बच्चा है,देश का भविष्य है

सात साल का मेरा पोता-

 है अभी छोटा 
जिसे चाहिए खिलौना 
नित नया, 
खोलकर या तोड़कर 
देखने को, 
क्या है उसमे नया ।
कंप्यूटर पर जब मै 
थक जाता, पर 
कनेक्ट नहीं कर पाता, 
तो पोता कहता, 
कहता ही क्या- 
झट कनेक्ट कर जाता ।
उसकी टीचर से जब 
मै मिला और पूछा 
कैसा है इसका आई क्यूँ 
स्तर ठीकठाक या अच्छा।
बोंले आई क्यूँ है अच्छा 
पूछने पर नहीं बताता,
बाद में कांपी देखने पर 
पता लगता है,इसने 
सुना था,समझा था,
जो बताया, सबकुछ अच्छा ।
कुछ सहमा सा रहता है 
बोलता नहीं, सुनता रहता है ।
फिर मैडम बोंली-
घर पर इसको डांटना बंद करो 
इसके खान पान पर ध्यान धरो
स्वछन्द खेलने दो, 
खिलौना तोड़े, तोड़ने दो 
अभी बच्चा है, सीधा और सच्चा है,
आइक्यु भी अच्छा है 
तकनिकी पकड़ की जिज्ञासा है 
अभियंता/निर्माता बनेगा 
ऐसा अभी से लगता है ।
बच्चे भगवान का रूप है,
इनके हाथो समाज और 
देश का भावी स्वरुप है ।
मैंने उन्हें नमन किया,
बच्चे का भवष्य 
गुरु के हाथों सुरक्षित है, 
समझ मन शांत किया।
 
 -लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला,जयपुर  

 

Views: 635

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 8, 2012 at 8:09am

बच्चों को यदि कुछ देना चाहें को तो सिर्फ एक चीज़ दें, unconditional love ...

टोका टाकी, डाट फटकार, पाबंदियां ये सब बच्चों से उनकी वास्तविकता को छीन लेती हैं.

कुछ सहमा सा रहता है 

बोलता नहीं, सुनता रहता है ।
फिर मैडम बोंली-
घर पर इसको डांटना बंद करो 
इसके खान पान पर ध्यान धरो
स्वछन्द खेलने दो, 
खिलौना तोड़े, तोड़ने दो 
अभी बच्चा है, सीधा और सच्चा है,
आइक्यु भी अच्छा है 

..............................ऐसा ही करें. आचरण तो वैसे भी बच्चे बड़ों से ही सीखते है, इसलिए सभी अभिभावक स्वयं के व्यवहार को साधें तो बच्चे तो अनुशासित ही बनेंगे.

सुन्दर भाव, जैसे सच्चे भाव मन में आये वैसे ही आपने प्रस्तुत किये हैं, इस हेतु बधाई 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 7, 2012 at 8:44pm

सही कहाँ आपने आदरणीया राजेश कुमारी जी, रचना को शिक्षाप्रद और सार्थक बता कर रचना की सार्थकता की पुष्टि करदी    आपने,हार्दिक आभार स्वीकारे ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 7, 2012 at 8:18pm
आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद जी आपने इस रचना के माध्यम से बहुत सार्थक शिक्षाप्रद बात कही है किसी को भी बच्चे का बचपना छीनने  का अधिकार नहीं है  हम दादा दादी या नानानानी बच्चों को मना  करते हैं तो वो समझते हैं की बच्चे बिगड़ जायेंगे और दोष दादा दादी पर मढ़  देंगे  ये भी परवारों में एक समस्या आती है 
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 7, 2012 at 6:16pm
आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी, आपका हार्दिक आभार । आप की बात बड़ी वजनदार और विचारणीय होती है ।
मेरे विचार से यह माता-पिता का अहम् है की हम बड़े है हमें  बच्चे को डांटने का अधिकार है ।  जब तक अनुभव
और बुजुर्गो की सलाह ग्रहण करते है, तब तक डांट खाते खाते बच्चा बड़ा और माँ-बांप बुजुर्ग हो चुके होते है,जो
दादा दादी की श्रेणी (वान प्रस्थाश्रम) में आ चुके होते है । काश माँ-बाप अपना कर्तव्य समय पर निभावे और 
बच्चे में उसके आई क्यूँ का को पहचान आगे बढ़ने में दिल से ही नहीं व्यावहारिक रूप से सहायक बने ।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 7, 2012 at 5:57pm

जो बताया, सबकुछ अच्छा ।
कुछ सहमा सा रहता है
बोलता नहीं, सुनता रहता है ।
फिर मैडम बोंली-
घर पर इसको डांटना बंद करो
इसके खान पान पर ध्यान धरो
स्वछन्द खेलने दो,
खिलौना तोड़े, तोड़ने दो

बात सीधी-सादी और एकदम से सच्ची.  मगर हम सभी बड़े इस तथ्य को केवल सैद्धांतिक रूप से ही क्यों स्वीकारते हैं ? व्यवहार में भी मानें तो घर के भोले बच्चे कितनी खुली ज़िन्दग़ी जीयें !.. .

सादर

Comment by रविकर on November 7, 2012 at 5:12pm

AABHAAR

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 7, 2012 at 12:21pm
शुभ कामनाए मिली बच्चे को चाचा रविकर से 
 
सहेजना होगा इसको डटकर खुद  मेरे पोते को ।
 
संस्कार शुभ दे माता, विनती हे जगदम्बा
 
नाम करे रोशन यही आकांक्षा करता बाबा 
 
 दिल से बधाई स्वीकारे रविकर भैया 
 
 हो तेरी भी पार जीवन की खेवे नैया 
Comment by रविकर on November 7, 2012 at 11:29am

सर्वप्रथम

प्रिय पौत्र के उज्जवल भविष्य हेतु

हमारी मंगल कामनाएं-

शुभकामनायें आदरणीय -

कुछ हट के-

मै मिला और पूछा
कैसा है इसका आई क्यूँ
स्तर ठीकठाक या अच्छा।
बोंले आई क्यूँ है अच्छा

माता देखी पुत्र की, जब से प्रगति रिपोट ।

मन में नित चिन्तन करे, सुनी गडकरी खोट ।

सुनी गडकरी खोट, आई-क्यु बहुतै अच्छा ।

दाउद ना बन जाय, करो हे ईश्वर रक्षा ।

बनना इसे नरेंद्र, उसे बाबा समझाता ।

संस्कार शुभ-श्रेष्ठ, सदा दे सदगुण माता ।।

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 7, 2012 at 11:04am

रचना पसंद कर उत्साह वर्धन करने के लिए आपका हार्दिक आभार भाई श्री सतीश मपत्पुरी जी 

Comment by satish mapatpuri on November 7, 2012 at 1:16am
बच्चे भगवान का रूप है,
इनके हाथो समाज और
देश का भावी स्वरुप है ।............

सच कहा है आपने लक्ष्मण जी . बहुत सुन्दर प्रस्तुति ... बधाई .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
yesterday
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service