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नयन लाज से झुक- झुक जाएँ
दिल में प्रीत म्रदंग बजाये
मादक मेघ चुराए काजल
क्या सखी साजन ??
ना सखी बादल |

चुपके से दृग द्वार पे आयें
गुदगुदाती बयार साथ में लायें
प्रीत छुपाये दिल में अपने
क्या सखी साजन ??
ना सखी सपने |

चित्त कल्पना में डूबता जाए
मन मीत हाथों पे लकीरे बनाए
सतरंगों से सजाये सवेरा
क्या सखी साजन ??
ना सखी चितेरा |

रुत खामशी से अगन लगाए
जहां बावरे मयूर नृत्य दिखाएँ
गुनगुनाएं घाटियाँ मन भावन
क्या सखी साजन ??
ना सखी सावन |

वो एतिहासिक क्षण भी आये
प्यार में मैंने मोती लुटाये
जब देखा वो प्रीत महल
क्या सखी साजन ??
ना सखी ताज महल |

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 26, 2012 at 7:51pm

अलबेला खत्री जी बहुत बहुत आभार आपका 

Comment by Albela Khatri on June 25, 2012 at 1:11pm

कमाल करती हैं राजेश कुमारी जी........
इस निर्लज्ज दौर  में लाज की बात करती हैं
आपका तो चरण वन्दन होना चाहिए........


नयन लाज से झुक- झुक जाएँ
दिल में प्रीत म्रदंग बजाये
मादक मेघ चुराए काजल
क्या सखी साजन ??
ना सखी बादल |

_________एक विनती है आप से,  कृपया प्रकाशित करने से पूर्व  एक बार अपनी रचना को ध्यान से बांच लिया करें ताकि  टंकण की त्रुटियाँ दूर की जा सकें.........वैसे आपकी कह मुकेरियां  लाजवाब हैं.शानदार हैं...इनके लिए मुक्तकंठ से बधाई !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 23, 2012 at 10:23am

योगी सारस्वत जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 23, 2012 at 10:22am

सुरेन्द्र कुमार भ्रमर जी प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 23, 2012 at 10:21am

रेखा जोशी जी हार्दिक आभार 

Comment by Yogi Saraswat on June 23, 2012 at 10:16am

वो एतिहासिक क्षण भी आये
प्यार में मैंने मोती लुटाये
जब देखा वो प्रीत महल
क्या सखी साजन ??

ना सखी ताज महल |
आदरणीय राजेश  कुमारी  जी  , सादर  नमस्कार  ! बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on June 23, 2012 at 1:13am

नयन लाज से झुक- झुक जाएँ 
दिल में प्रीत म्रदंग बजाये 
मादक मेघ चुराए काजल 
क्या सखी साजन ??
ना सखी बादल | 

आदरणीया राजेश कुमारी जी बहुत सुन्दर कह मुकेरियां ...मन भावन ...जैसे सावन ...भ्रमर ५ 

Comment by Rekha Joshi on June 22, 2012 at 9:42pm

नयन लाज से झुक- झुक जाएँ 
दिल में प्रीत म्रदंग बजाये 
मादक मेघ चुराए काजल 
क्या सखी साजन ??
ना सखी बादल | ,Rajesh ji ati sundr panktiyaan ,badhai 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 22, 2012 at 9:40pm

प्रदीप कुमार जी प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 22, 2012 at 4:01pm

नयन लाज से झुक- झुक जाएँ 
दिल में प्रीत म्रदंग बजाये 
मादक मेघ चुराए काजल 
क्या सखी साजन ??
ना सखी बादल | 

आदरणीया  राजेश कुमारी जी, सादर 

वाह, शब्द नहीं.  बधाई.

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