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उषा अवस्थी

सबकी अलग देनदारियां हैं

जीवन-नदिया में,

कर्म-नौका पर सवार

सुख-दुख से उत्पन्न

अपरिहार्य लहरें

सहने की मजबूरियां हैं

जब तरंगे "सम" पर आती हैं

पहुँचाती हैं सहजता से

इच्छित गन्तव्य तक

समस्त उलझनों के पार

कराती हैं, स्वयं से स्वयं का 

"साक्षात्कार"

प्रकृति आईना दिखाने को सन्नद्ध है

नियमों से आबद्ध है

जो अपना धर्म 

सदैव निभाती है

"मैं" त्याग, व्यापक अहं में

समाती है

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Usha Awasthi on January 31, 2023 at 11:19am

बृजेश कुमार बृज जी, रचना सारगर्भित लगी ,जानकर हर्ष हुआ। हार्दिक धन्यवाद, सादर।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 30, 2023 at 6:31pm

सुन्दर सारगर्भित कविता के लिए बधाई आदरणीया...

Comment by Usha Awasthi on January 30, 2023 at 8:40am

आ0 समर कबीर जी, आदाब। हार्दिक धन्यवाद आपका।

Comment by Samar kabeer on January 29, 2023 at 2:43pm

मुह्तारमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें I 

Comment by Usha Awasthi on January 25, 2023 at 6:39pm

आ0 लक्ष्मण धामी जी, हार्दिक आभार आपका

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 25, 2023 at 3:39pm

आ. ऊषा जी, अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

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