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कोरोना तेरा मुंह काला--गीत

आखिर खुल गया ताला
होगा अब देश मतवाला


पुराने जमाने की बात थी
धंधा कहते थे, उसे काला


गरीब रोटी  को  रोता था
किसने ये गलत कह डाला


हस्पताल  खोलना क्यूँ है
जब हाथ हो सबके प्याला


किसे पढ़ना है बताओ तो
जब विषय ही बदल डाला


दूरी की चिंता  कौन करे
धज्जी उसकी उड़ा डाला


अब इकोनॉमी चमकेगी
कोरोना तेरा मुंह काला !!

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Comment by विनय कुमार on May 8, 2020 at 4:09pm

इस हौसला बढ़ाने वाली टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ तेज वीर सिंह जी

Comment by TEJ VEER SINGH on May 8, 2020 at 12:37pm

हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार जी ।बहुत बढ़िया गीत।

हस्पताल  खोलना क्यूँ है
जब हाथ हो सबके प्याला


किसे पढ़ना है बताओ तो
जब विषय ही बदल डाला

Comment by विनय कुमार on May 8, 2020 at 12:33pm

इस हौसला बढ़ाती टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ समर कबीर साहब

Comment by विनय कुमार on May 8, 2020 at 12:32pm

इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर जी

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 7, 2020 at 6:10am

आ. विनय जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on May 6, 2020 at 8:18pm

जनाब विनय कुमार जी आदाब,अच्छी कविता है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by विनय कुमार on May 6, 2020 at 12:54pm

इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी

Comment by नाथ सोनांचली on May 6, 2020 at 6:17am

आद0 विनय जी सादर अभिवादन। अब इकोनॉमी चमकेगी, कोरोना तेरा मुंह5काला। कितना सटीक व्यंग्य किया है। इस उम्दा रचना पर बहुत बहुत बधाई।सादर

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