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मनोदशा और खुजली(लघुकथा)

डॉक्टर की बातों के जवाब में वर्मा जी कहने लगे-
-हाँ साहब, मुझे पुरानी चीजों से लगाव है।चाहे यादें हों,या पुस्तकें,पन्ने आदि।
-मसलन?
-मैं यदा-कदा यह निर्णय ही नहीं कर पाता कि किन यादों को स्मृति-पटल से खुरचकर मिटा देना चाहिए या कौन किताब या पन्ना अपनी अलमारी से बाहर करूँ,कौन रखूँ।
-मतलब ,आप दुविधाग्रस्त रहते हैं।
-जी।
-और पुरातनता से संबद्ध भी रहना चाहते हैं।
-जी।पर कभी-कभी अपने इस लगाव के चलते पश्ताचाप भी होता है कि मैं अनावश्यक तौर पर अनचाही चीजों में फँसकर खुद को परेशान कर लेता हूँ।
-जी, जहां तक मैं समझता हूँ,आप बीती बातों में खोए रहते हैं।चाह कर भी अनचाही चीजों का परित्याग नहीं कर पाते हैं।हालाँकि आप वैसा करना चाहते हैं।और अपनी ऐसी प्रवृत्ति के चलते आप पछताते भी हैं।उद्विग्न भी हो जाते होंगे शायद।
-जी बिलकुल।जब मन की बात नहीं कर पाता हूँ,तब उद्विग्नता बढ़ जाती है।
-तो देखिये, मैंने शुरुआत में बताया था कि बैच थेरेपी में कारण का निवारण किया जाता है।इसमें शारीरिक तकलीफ को कम महत्व दिया जाता है।
-जी सर,मैं समझ गया हूँ।
-तो आपकी भूत के प्रति चाहे-अनचाहे आग्रह के लिए 'हनी सक्कल', त्याज्य-अत्यज्य में भेद न कर पाने के लिए 'स्क्लेरेन्थस', अपनी करनी पर पश्ताचाप करने या वैसी स्थिति के लिए खुद को दोषी मानने के लिए 'पाइन' और चूँकि आप चाहते हैं कि आपके स्वभाव में शामिल ये बुराइयाँ छू मंतर हो जाएं,इसलिए आपको 'क्रेब एप्पल' दे रहा हूँ।चार-चार बूँदें दिन में चार बार लें।
-जी।
-हाँ,भूत का मोह दुविधा पैदा कर रहा है,जिससे आप अनिर्णय की दशा में आ जा रहे हैं।और फिर पश्चाताप के चलते आप उद्विग्नता को प्राप्त हो रहे हैं।आप पैर की उँगली की खुजली पर ध्यान मत दें।वह आपकी इस तरह की मनःस्थिति का परिणाम है।चली जायेगी।
" मौलिक व अप्रकाशित "

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Comment by Manan Kumar singh on October 20, 2020 at 7:09pm

आपका आभार आदरणीय सुरेन्द्र जी। 

Comment by नाथ सोनांचली on May 2, 2020 at 6:20pm

आद0 मनन कुमार सिंह जी, सादर अभिवादन। भावो को उकेरती अच्छी कथा लिखी आपने। बधाई स्वीकार कीजिये।

Comment by Manan Kumar singh on May 1, 2020 at 12:24pm

आपका आभार आदरणीय लक्ष्मण जी।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 1, 2020 at 8:59am

आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन । अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।

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