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अकस्मात गांव में भीड़ बढ़ गई। कालू, खखनु आदि ही नहीं शंकर सेठ वगैरह भी सपरिवार गांव आ गए हैं।सुना है और लोग भी आनेवाले हैं। अभी कुछ दिनों तक ये सब यहीं रहेंगे। बुधु यह सोचकर परेशान है कि जो लोग खास मौकों पर भी गांव आने से कतराते थे,वे आज धड़ल्ले से क्यों मुंह उठाए भागे आ रहे हैं,वो भी पूरे बाल बच्चों के साथ।कहते थे कि इनके बच्चे एसी कूलर के बिना सो नहीं सकते।बिजली के बिना क्या तो, रोने लगते हैं।अब यह कौन करिश्मा हुआ है भाई?

यही सब सोचते वह पोखर से लौट रहा था कि लक्खू मास्टर जी मिल गए।बुधु ने उन्हें नमस्ते कर सवाल ठोका,
" मास्टर जी, इ सब गांव का परदेशी लोग भाग भाग कर गांव काहे आ रहे हैं?"
" बुधु,उनका भी घर यहीं है न।"मास्टर जी ने जवाब दिया।
" पर ऐसा तो पहले पहल दिखाई दे रहा है,सर जी।ऐसा क्यों?"
" संकट में घर ही याद आता है,बबुआ।"
" संकट?कैसा संकट? अरे मास्टर जी जब गांव बहुत पहले बाढ़ की चपेट में आ गया था,तब ये सब लोग कहां थे? सरकारी अनाज बंटता था।"बुधु बोला।
" सही कहते हो बुधु।तुम्हें याद है सन् इकहत्तर की वह बाढ़?"मास्टरजी ने पूछा।
" जी,तब हमलोग बच्चे थे।पानी पानी खेलने गए थे,जब पहले दिन पानी आया था।"
" अरे वाह!तुमको तो सब याद है।"
"....और यह भी कि रिलीफ के गेहूं के बंटवारे में धांधली कर दो क्विंटल गेहूं बचाकर ठाकुरबाड़ी में रखा हुआ था।शिकायत पर अधिकारी,पुलिस वाले आए थे।तब के सीधे सादे मुखिया जी ने कहा था कि सरपंच साहेब बोले कि दुर्गा जी के नाम पर रख लेते हैं। मिल - बांटकर खा लेंगे।"
"...हाहहाहा!!!!!शंकर सेठ के चाचा ही सरपंच थे।"लक्खू मास्टर ठहाका लगाकर हंसे।
" जी। लोग भी हंसते थे,मास्टर जी।हमलोग भी कहते,मिल - बांटकर खा लेंगेऔर हंसते भी।"
" अच्छा जाने दो।ये तब की बातें हैं।अपने बारे में यह सब सुनकर बिशु मुखिया भी हंसते ही थे।अब के जैसे नहीं कि चोरी और ऊपर से सीनाजोरी भी।"
" जी।तो अब का संकट क्या है?"बुधु ने जानना चाहा।
" अरे वही कोरोना वाला मेरे भाई। और क्या?"मास्टर जी जल्दी से बोले।
" तो इसमें गांव आने से क्या होगा।"
" दूरी,मेरे भाई।एक दूसरे से दूरी बनाकर रहना जरूरी है।ऐसा सरकार ने सुझाया है।" लक्खू जी बोले।
" अच्छा तो इ सब दूरी बनाने के लिए इतनी दूर से भागे आ रहे हैं? पहले तो दूर गए कि जो गांव से जितनी दूर,उतना बड़ा गिना जाएगा।और अब......घुसर गई सारी हेंकड़ी?" बुधु ने अकड़कर कहा।
" गांव घर उनका भी है,बुधु।ऐसा नहीं कहते।"
" ठीक है।पर इनकी जांच हुई क्या? इ सब तालाबंदी में शहर से आ रहे हैं कि गांव में फंफराह(कम आबादी वाली)जगह मिलेगी।चलिए प्रधान जी से कहेंगे कि पहले इनकी भी जांच हो जाए।"
" जरूर बुधु,जरूर। चलो हम अभी चलते हैं।" मास्टर जी बोले।
"मौलिक व अप्रकाशित"

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