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खंडित मूर्ति - लघुकथा –

खंडित मूर्ति - लघुकथा –

"सुमित्रा, यह लाल पोशाक वाली लड़की तो वही है ना जिसकी खबर कुछ महीने पहले अखबार में छपी थी।"

"हाँ माँ यह वही है।"

"इसके साथ स्कूल के चपरासी ने जबरदस्ती की थी ना।"

"हाँ माँ,वही है। आप क्या कहना चाहती हो?"

"मैं यह कहना चाहती हूँ कि इसे पूजा में किसने बुलाया?"

"माँ यह मेरी बेटी के साथ पढ़ती है। उसकी दोस्त है। उसने इसे मुझसे पूछ कर ही बुलाया है।"

"यानी यह तुम्हारी मर्जी से यहाँ आयी है। सब कुछ जानते बूझते हुए।"

“माँ , वह बच्ची है। जो भी कुछ उसके साथ हुआ, उसमें उसका क्या कसूर?"

"लेकिन अब वह क्वारी कन्या नहीं है।"

"कैसी बात करती हो माँ। पहली बात तो यह कि उसके साथ वह सब कुछ हो ही नहीं पाया जो आप समझ रही हो।दूसरी बात वह खुद भी नहीं जानती कि उसके साथ क्या होने जा रहा था।"

"मगर सुमित्रा पूजा में खंडित मूर्तियाँ नहीं रखी जातीं।इसे तुरंत यहाँ से निकालो"

"माँ इंसान और मूर्ति में फ़र्क़ होता है।यह पूजा में अवश्य शामिल होगी।"

मौलिक, अप्रकाशित एवम अप्रसारित

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Comment by TEJ VEER SINGH on November 19, 2020 at 12:30pm

हार्दिक आभार आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज जी।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 1, 2020 at 8:50pm

एक और बेहतरीन लघु कथा आदरणीय बधाई...अंतिम से पहली पंक्ति हालाँकि नकारात्मक है लेकिन लघु कथा की जान वही है।

Comment by TEJ VEER SINGH on October 28, 2020 at 8:40am

हार्दिक आभार एवम आदाब आदरणीय समर कबीर साहब जी।मेरी लघुकथाओं पर आपकी उपस्थिति निरंतर बनी हुई है। मेरे लिये यह बहुत बड़ी खुशी का कारण है।आपका प्यार सदा बना रहे।

Comment by Samar kabeer on October 27, 2020 at 8:32pm

जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब, अच्छी लघुकथा लिखी आपने, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by TEJ VEER SINGH on October 27, 2020 at 11:50am

हार्दिक आभार आदरणीय दीपाली ठाकुर जी।

Comment by Deepalee Thakur on October 27, 2020 at 9:08am

 खंडित मूर्ति अच्छी लघुकथा एक अलग विषय पर बधाई।

Comment by TEJ VEER SINGH on October 27, 2020 at 8:39am

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 26, 2020 at 8:11pm

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । अच्छी संदेशपरक कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।

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