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क्षणिकाएं : जिन्दगी पर

क्षणिकाएं : जिन्दगी पर

जिंदगी
जीती रही
मिट जाने के बाद भी
जिंदगी के लिए
कैद में
निर्जीव फ्रेम के
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
लगा देती है
जिन्दगी
आंखों की चौखट पर
सांकल
हर प्रतीक्षा की
सांसो से
अनबन
होने के बाद
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
हो गया
गिलास खाली
पानी
बिखर जाने के बाद
थी
फिर भी उसमें
शेष
थोड़ी सी
नमी
अनदेखी
जिन्दगी की

.............................

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Sushil Sarna on October 2, 2020 at 2:29pm

आदरणीय  Dr. Vijai Shanker जी सृजन के भावों को अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया से समृद्ध करने का दिल से आभार।

Comment by Dr. Vijai Shanker on October 2, 2020 at 9:16am

सुन्दर क्षणिकाएं आदरणीय सुशील सरना जी , बधाई। सादर।

Comment by Sushil Sarna on September 24, 2020 at 6:26pm
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार ।
Comment by Sushil Sarna on September 24, 2020 at 6:25pm
आदरणीय समर कबीर जी, आदाब, सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 23, 2020 at 6:33pm

आ. भाई सुशील सरना जी, सादर अभिवादन । अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं । हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on September 23, 2020 at 11:56am

जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं, बधाई स्वीकार करें ।

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