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Rekha Joshi's Blog – July 2012 Archive (5)

खूबसूरत [लघु कथा]

शन्नो की सगी बहन मन्नु लेकिन शक्ल सूरत में जमीन आसमान का अंतर , अपने माता पिता की लाडली शन्नो इतनी सुंदर  थी मानो आसमान से कोई परी जमीन पर उतर आई हो ,बेचारी मन्नु  को अपने साधारण रंग रूप के कारण सदा अपने माता पिता की उपेक्षा का शिकार होना पड़ता था |शन्नो अपने माँ बाप के लाड और अपनी खूबसूरती के आगे किसी को कुछ समझती ही नही थी |एक दिन दुर्भाग्यवश उनकी माँ  बहुत बीमार पड़ गई ,सारा दिन बिस्तर पर ही लेटी रहती थी ,मन्नु ने अपनी माँ की सेवा के साथ साथ घर का बोझ भी अपने कंधों पर ले लिया ,उसकी नकचढ़ी…

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Added by Rekha Joshi on July 31, 2012 at 11:04pm — 16 Comments

व्याजोक्ति [लघु कथा ]

आलोक की बहन रीमा के पति के अचानक अपने घर परिवार से दूर पानीपत में हुए निधन के समाचार ने आलोक और उसकी पत्नी आशा को हिला कर रख दिया |दोनों ने जल्दी से समान बांधा ,आशा ने अपने ऐ टी म कार्ड से दस हजार रूपये निकाले और वह दोनों पानीपत के लिए रवाना हो गए ,वहां पहुंचते ही आशा ने वो रूपये आलोक के हाथ में पकड़ाते हुए कहा ,''दीदी अपने घर से बहुत दूर है और इस समय इन्हें पैसे की सख्त जरूरत होगी आप यह उन्हें अपनी ओर से दे…
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Added by Rekha Joshi on July 23, 2012 at 10:48pm — 25 Comments

सितमगर

तकदीर पर विशवास तो नही मुझे ,

आये क्यों हो मेरी जिंदगी में तुम ,

निभाया सदा साथ तुम्हारा लेकिन ,

दर्देदिल के सिवा क्या मिला मुझे|

.........................................

भुला कर हमने हर सितम तुम्हारे ,

साथ निभाने का क्यों वादा किया ,

हद हो गई अब ज़ुल्मो सितम की ,

प्यार में तो हमने धोखा ही खाया |

.........................................

निभा न सके जब तुम वफ़ा को ,

चुप रहे फिर भी खातिर तुम्हारी ,

दफना दिया सीने में ही दर्द को ,

उफ़ तक न की…

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Added by Rekha Joshi on July 11, 2012 at 1:33pm — 17 Comments

बेवफाई

जिनके लिए हमने दिल औ जान लुटाई .

मिली  सिर्फ  उनसे हमको है  बेवफाई |
...............................................
सजदा किया उसका निकला वो हरजाई ,
मुहब्बत के बदले पायी  हमने रुसवाई |
...............................................
धडकता है दिले नादां सुनते ही शहनाई,
पर तक़दीर से हमने तो  मात  ही खाई |
................................................
न भर नयन तू आग तो दिल ने…
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Added by Rekha Joshi on July 5, 2012 at 8:30pm — 14 Comments

साहस

नीले नभ पर .,

उड़ चले पंछी ,
इक लम्बी उड़ान,
संग साथी लिए ,
निकल पड़े सब,
तलाश में अपनी ,
थी मंजिल अनजान .
अनदेखी राहों में 
जब हुआ सामना, 
था भयंकर तूफ़ान 
घिर गए चहुँ ओर से , 
और फ़स गए वो सब ,
इक ऐसे चक्रव्यूह में ,
अभिमन्यु की तरह ,
निकलना था मुश्किल ,
पर बुलंद…
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Added by Rekha Joshi on July 4, 2012 at 2:56pm — 19 Comments

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