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चमक रही
सूरज की तरह
पीली सरसों
...............
बिखर गई
खुशिया सब ओर
आया बसंत
................
लाल गुलाबी
रंग बिरंगे फूल
लाया बसंत
.................
बगिया मेरी
महक उठी आज
आया बसंत
..............
नमन तुझे
दो मुझे वरदान
माता सरस्वती

मौलिक और अप्रकाशित रचना

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Comment

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Comment by वेदिका on February 18, 2013 at 2:12am

हाइकू के बारे में मार्गदर्शन  देने का धन्यवाद आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी ! व् थोडा और विस्तार से बतायेंगे तो आभार होगा। 

बसंत सी सुंदर रचना आदरणीय रेखा जी !

Comment by Rekha Joshi on February 17, 2013 at 12:02am

उपासना जी आपका हार्दिक धन्यवाद 

Comment by upasna siag on February 14, 2013 at 6:37pm

बहुत सुन्दर ........

Comment by Rekha Joshi on February 14, 2013 at 6:04pm

आ सौरभ जी ,आ अशोक जी ,आ राजेन्द्र जी ,आ प्राची जी और आ बागी जी ,आप सभी का हार्दिक धन्यवाद ,आभार 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 13, 2013 at 9:54pm

हाईकू पर अच्छा प्रयास, बधाई ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 13, 2013 at 8:42pm

हाइकू पर प्रयास के लिए शुभकामनाएं आ. रेखा जी 

Comment by राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी' on February 13, 2013 at 4:00pm

सुन्दर हाईकू बहुत बहुत बधाई 

Comment by Ashok Kumar Raktale on February 13, 2013 at 8:04am

आदरणीया रेखा जी सादर, बसंत ऋतू के आगमन पर हाइकु की सुन्दर प्रस्तुति.बधाई स्वीकारें.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 12, 2013 at 11:50pm

आदरणीया रेखा जी, हाइकू की विधा में आपने अपने भाव अभिव्यक्त किये हैं.  आपका हाइकू प्रयास आश्वस्त करता सा लगा है. बस एक बात ख्याल रखियेगा कि ५-७-५ के वर्णिक क्रम के अलावे हाइकू की तीनों पंक्तियाँ एक दूसरे से स्वतंत्र होती हैं. यानि एक साथ मिल जायें तो एक वाक्य नहीं बनता.

इस प्रयास और प्रस्तुति केलिए बधाई स्वीकार करें. सादर

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