For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

March 2026 Blog Posts (10)

कुंडलिया

दरियादिल हो बाप जब, करता कन्यादान।

दयावान भगवान हो, रखता उसका मान।

रखता उसका मान, भात नरसी-सा भरता।

आठ पहर धन-धान्य, वस्त्र की वर्षा करता।

कहते कवि 'कल्याण', मिले तब जीवन साहिल।

करके कन्यादान, दिखाए जब दरियादिल।।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by सुरेश कुमार 'कल्याण' on March 31, 2026 at 8:30pm — 2 Comments

प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर

प्यादे : एक संख्या भर

प्यादे— बेकसूर, बेख़बर, नियति और नीति से अनजान—

अक्सर मान लिये जाते हैं

मात्र एक संख्या भर।

तैनात कर दिये जाते हैं महाराज-महारानी के गिर्द रक्षा-कवच बनकर,

और उसी क्षण

उनकी पहचान सिमट जाती है—

एक संख्या भर।

वे मात खाते हैं, कभी मात दिलाते भी हैं, गिरते हैं, उठते हैं,

और फिर गिरा दिये जाते हैं—

इतनी सहजता से

कि किसी को

कोई फ़र्क नहीं…

Continue

Added by amita tiwari on March 30, 2026 at 10:31pm — 2 Comments

दोहा सप्तक. . . .विविध

दोहा सप्तक. . . . . . विविध



कभी- कभी तो कीजिए, खुद से खुद की बात ।

सुलझेंगे उलझे हुए,  अंतस के हालात ।।



खामोशी से पूछिए, क्या है उसका दर्द ।

किन राहों की है भरी, उसमें इतनी गर्द ।।



लफ्ज अकेले हो गए, ठहर गए जज्बात ।

कोई अपना दे गया, दिल को वह आघात ।।



हुई उम्र तो सामने, उभरी हर तस्वीर ।

रुखसारों पर दर्द की, शेष रही तहरीर ।।



रेजा - रेजा हो गए, जीवन के सब ख्वाब ।

चश्मे साहिल पर रहे, यादों के सैलाब ।।



लहरों सी… Continue

Added by Sushil Sarna on March 23, 2026 at 1:53pm — 1 Comment

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधर

अधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।

मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम ।।

उन्मादी आवेग में , कब कुछ रहता ध्यान ।

अधरों की शैतानियाँ, कहते सुर्ख निशान ।।

अधरों ने की दिल्लगी, अधरों से कल शाम ।

जज्बातों के वेग में, बंध हुए बदनाम ।।

अधर समागम जब हुआ, खूब हुआ संग्राम ।

स्पर्शों के दौर में , बिखर गये सब जाम ।।

अधर दलों पर डोलता, जब दिल का ईमान ।

बेशर्मी के पार सब, दिल करता सोपान ।।

सुशील सरना /…

Continue

Added by Sushil Sarna on March 17, 2026 at 2:29pm — 1 Comment

आत्म मुग्ध मदारी

Continue

Added by amita tiwari on March 17, 2026 at 4:07am — No Comments

भ्रम सिर्फ बारी का है

भ्रम सिर्फ बारी का है

************************************



बरसों बरस लगे

बीज को बहलाने में

भरपूर दरखत बनाने में





बरसात नहलाती रही

धूप सहलाती रही

हवा आती रही

हवा जाती रही

बरसों बरस लगे धरा को

जड़ो की जगह बनाने में

बीज को दरख्जत बनाने में







और…
Continue

Added by amita tiwari on March 17, 2026 at 4:05am — 2 Comments

निर्वाण नहीं हीं चाहिए

निर्वाण नहीं हीं चाहिए
---------------------------
कैसा लगता होगा
ऊपर से देखते होंगे जब
माँ -बाबा
कि जिस
मुकाम मकान दुकान
खानदान के नाम को
कमाने में
सारी उम्र लगाई
पाई पाई बचाई
खुली खुशी
संतति को थमाई…
Continue

Added by amita tiwari on March 17, 2026 at 4:00am — No Comments

दोहा सप्तक. . . .युद्ध

दोहा सप्तक. . . . . युद्ध

हरदम होता युद्ध का, विध्वंसक परिणाम ।

बेबस जनता भोगती ,  इसका हर  अंजाम ।।

दो देशों के मध्य जब, होता है संग्राम ।

जाने कितने चेहरे , हो जाते गुमनाम ।।

कौन करेगा आकलन , कितना हुआ विनाश ।

मौन भयंकर छा गया, काला हुआ प्रकाश ।।

जंग चलेगी जब तलक, होगा बस संहार ।

खण्डहरों के ढेर पर, सब होंगे लाचार ।।

जन-धन का हर युद्ध में, होता है नुकसान ।

हार- जीत के द्वन्द्व में, हारे बस  इंसान ।।

देख विदारक दृश्य को,…

Continue

Added by Sushil Sarna on March 13, 2026 at 2:49pm — No Comments

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है

कितने दुःख दर्द से भरा दिल है

ये मेरा क्यूँ हुआ है ज़ज़्बाती

पास उनके जो सुनहरा दिल है

ताज इक सब के मन के अंदर भी

और ये शह्र आगरा दिल है

दिल लगी दिल्लगी नहीं होती

इक ग़ज़ब का मुहावरा दिल है

देखकर उनकी मदभरी आँखें

खो गया मेरा मदभरा दिल है

याद मुद्दत से वो नहीं है 'जय'

आज फिर क्यूँ भरा भरा दिल है

मौलिक एवं…

Continue

Added by Jaihind Raipuri on March 4, 2026 at 10:00pm — 2 Comments

माना कि रंग भाते न फिर भी अगर पड़े -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२

***

पीछे गयी  है  छूट  जो  होली  गुलाल की

साजिश है इसमें देख सियासी कपाल की।१।

*

कहने को  आयी  देश  में  इक्कीसवीं सदी

होली पे भाँग चढ़ती है फिर भी खयाल की।२।

*

कहने को पर्व  रंग  का, मस्ती मजाक का

पड़ती मगर है इस पे भी छाया बवाल की।३।

*

रति के बदलते भाव ने बदली कशिश तभी

साजन को देख बढ़ती न रंगत वो गाल की।४।

*

माना कि रंग भाते न फिर भी अगर पड़े

टेढ़ी करो न  रोष  में  रेखा को भाल की।५।…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 3, 2026 at 7:30am — No Comments

  • ❮ First
  • Next ❯

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service