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Dr.Brijesh Kumar Tripathi's Page

Latest Activity

Dr.Brijesh Kumar Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 28
"आदरणीय अशोक जी बहुत सुन्दर कुण्डलियाँ और बहुत ही प्यारा व्यंग ...वाह बधाई हो"
Feb 8
Dr.Brijesh Kumar Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 28
"साधु वाद डॉ.प्राची सिह जी त्रिभंगी छंद के इस प्रयोग में सिद्ध  शिल्प  तो है ही पारंपरिक विशिष्टता का चित्रण भी अत्यंत लुभावना है बधाई स्वीकार करें"
Feb 8
Dr.Brijesh Kumar Tripathi posted a blog post

शुभ विचार

हरिगीतिकाक्षण मात्र भी बिन कर्म के कोई नहीं रहता कभीसत्कर्म या दुष्कर्म में ही व्यस्त दीखते हैं सभीतज स्वत्व व निज स्वार्थ को जो कर्म करते हैं सदासत्कर्म उनके ही उन्हें         सत्कार देते सर्वदा....१ जब कर्म करना ही पड़े तो क्यों न वह सत्कर्म होयदि भावना आदर्श हो तो कर्म भी सद्धर्म होंअनुरोध है यह आपसे निज को कसौटी में कसेंव्यवहार हो यदि आत्मवत तो क्यों न हृदयों में बसें ...२स्वच्छंद हैं हम कर्म को  जो चाहते हैं वो करेंपर पूर्व में ही कुछ विचारें और ईश्वर से डरेंईश्वर-प्रदत्त विवेक को हम नित्य…See More
Jan 28
Dr.Brijesh Kumar Tripathi commented on Dr.Brijesh Kumar Tripathi's blog post शुभ विचार
"आदरणीय अशोक जी आपकी प्रतिक्रिया ने न सिर्फ मेरा मान बढाया है वरन मेरा मन भी बढाया है आपके शब्दों  का शत  शत आभार"
Jan 27

सदस्य कार्यकारिणी
Ashok Kumar Raktale commented on Dr.Brijesh Kumar Tripathi's blog post शुभ विचार
"जब कर्म करना ही पड़े तो क्यों न वह सत्कर्म हो यदि भावना आदर्श हो तो कर्म भी सद्धर्म हों अनुरोध है यह आपसे निज को कसौटी में कसें व्यवहार हो यदि आत्मवत तो क्यों न हृदयों में बसें ...........बहुत सुन्दर भाव. बधाई स्वीकारें आदरणीय डॉ ब्रिजेश जी सादर."
Dec 24, 2012
Dr.Brijesh Kumar Tripathi replied to Admin's discussion "चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता" अंक-21 in the group चित्र से काव्य तक
"रखवाली ही कर रहे  हैं हम खाली पेट बोरों सड़े अनाज का , लगे न कोई रेट  ..१   आँखों में अब शर्म भी है गूलर का फूल मालूम है, मासूम जन सब जायेंगें भूल ...२   एफ डी आई के लिए कितनी लठ्ठम लठ्ठ शर्म घोल कर पी रहे देश भले हो  पट्ट…"
Dec 19, 2012
Dr.Brijesh Kumar Tripathi replied to Admin's discussion "चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता" अंक-21 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरनीय अशोक जी, सुन्दर मनमोहक घनाक्षरियों में प्रभु वंदना ....चित्र को पूर्णतः परिभाषित कर रही है... ह्रदय से आभार भाई  "
Dec 18, 2012
Dr.Brijesh Kumar Tripathi replied to Admin's discussion "चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता" अंक-21 in the group चित्र से काव्य तक
"भारत श्री पियूष जी             शुद्ध आपके भाव अन्नपूर्णा  भारत माँ से कितना अधिक लगाव  कितना अधिक लगाव  दिखाती यह कुण्डलिया बढ़ता जाय…"
Dec 18, 2012
Dr.Brijesh Kumar Tripathi posted a blog post

शुभ विचार

हरिगीतिकाक्षण मात्र भी बिन कर्म के कोई नहीं रहता कभीसत्कर्म या दुष्कर्म में ही व्यस्त दीखते हैं सभीतज स्वत्व व निज स्वार्थ को जो कर्म करते हैं सदासत्कर्म उनके ही उन्हें         सत्कार देते सर्वदा....१ जब कर्म करना ही पड़े तो क्यों न वह सत्कर्म होयदि भावना आदर्श हो तो कर्म भी सद्धर्म होंअनुरोध है यह आपसे निज को कसौटी में कसेंव्यवहार हो यदि आत्मवत तो क्यों न हृदयों में बसें ...२स्वच्छंद हैं हम कर्म को  जो चाहते हैं वो करेंपर पूर्व में ही कुछ विचारें और ईश्वर से डरेंईश्वर-प्रदत्त विवेक को हम नित्य…See More
Dec 18, 2012
Dr.Brijesh Kumar Tripathi replied to Admin's discussion "चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता" अंक-21 in the group चित्र से काव्य तक
"सुन्दरतम दोहे कहे     ले लालित्य ललाम अम्बरीश जी आपको  शतशत मेरा प्रणाम छलकी पीड़ा देखकर     सड़ता ढेर अनाज  भण्डारण की चूक में        बर्बादी आग़ाज प्रकृति कभी बक्शे नहीं सजा देय …"
Dec 18, 2012
Dr.Brijesh Kumar Tripathi replied to Admin's discussion "चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता" अंक-21 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अम्बरीश जी एवं ओ बी ओ पर उपस्थित होने वाले मेरे सभी मित्रों! कुण्डलिया  छंद में में मैंने अपने मन की पीर को व्यक्त करने की कोशिश की है आप सभी का आशीर्वाद मिलेगा इसका पूरा विश्वास है आग जलाती पेट को चूल्हा बुझता जाय बोरों सडे अनाज औ…"
Dec 18, 2012
Dr.Brijesh Kumar Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 26
"मेरे सभी सम्मानित मित्रों को एवं मेरी प्यारी बहनों को हाइकू पर मधुरतम प्रतिक्रिया देने के लिए ह्रदय से आभार  "
Dec 10, 2012
Dr.Brijesh Kumar Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 26
"मेरे सभी आदरणीय मित्र गणों को एवं स्नेह्युत बहनों को कह्मुकारियों पर स्नेहयुक्त प्रतिक्रिया देने हेतु सदर आभार"
Dec 10, 2012
Dr.Brijesh Kumar Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 26
"शिशिर को अपनी कमी पूरी करने हेतु बुलाते और तबतक अपनेही बल पर जीव जगत को कंपाते   हेमंत की कारगुजारियों का खूब शब्द चित्र आपने खींचा शन्नो बहन ...बधाई"
Dec 9, 2012
Dr.Brijesh Kumar Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 26
"शरद बीतते ही वह आता सबके मन को वह हर्षाता सी सी सब करते श्रीमंत क्या वह साजन? नहि हेमंत ...१ मन में वह विश्वास जगाता बड़े प्यार से वह सहलाता भीति-गरम का करता अंत क्या सखी साजन ? नहि हेमंत ...२ धूप भली सबके मन भाई सुन्दर लगती खूब रजाई मन में छिप कर…"
Dec 8, 2012
Dr.Brijesh Kumar Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 26
"सुमन बहन .. आम आदमी  जो गरीबी की सीमा के नीचे जीते हैं हर रोज़ बस खून के ही घूँट पीते है ठण्ड  बस उन्ही की हड्डियाँ गलाती है और गर्मियां उनकी झोपड़ियाँ जलाती है और बरसात बस उन्ही के घर गिराती है वे हरदम शांत रहते है किन्तु उनकी…"
Dec 8, 2012

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur
Native Place
Kanpur
Profession
Homoeopathic Physician
About me
Ypu will better Know

Dr.Brijesh Kumar Tripathi's Blog

शुभ विचार

Posted on December 18, 2012 at 7:30am 2 Comments

हरिगीतिका

क्षण मात्र भी बिन कर्म के कोई नहीं रहता कभी

सत्कर्म या दुष्कर्म में ही व्यस्त दीखते हैं सभी

तज स्वत्व व निज स्वार्थ को जो…

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फगुनाई गज़ल

Posted on March 8, 2012 at 8:00pm 3 Comments

फागुन बुला रहा मन खोले

मितवा आज किसी का होले

बौराई आमों की डालें

कोयल कुहू कुहू स्वर बोले

झूम रही खेतों में सरसों

हवा चल रही हौले…

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होली की मस्ती

Posted on March 8, 2012 at 3:00pm 1 Comment

बिना भंग की मस्ती छाई रे....   होली आई रे

आओ सारे लोग-लुगाई रे.....      होली आई रे

होली आई होली आई होली आई रे.....होली आई रे

 

 

सपा के सर पे ताज आज…

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कबूतरबाजों के पिंजरे से ....

Posted on November 29, 2011 at 8:00am 3 Comments

जो अपने इल्म-ओ-मेहनत से जहाँ सारा सजा देते

ये मेहनत गांव में करते तो घर अपना बना लेते ..१

 

भरम तो टूटते हैं तब वतन की याद  आती जब

अगर पैसे से मिलता तो सुकूँ थोडा मंगा लेते ...२

 

कहाँ मालूम था परदेस भी दर है जलालत का

नहीं तो हम कभी भी गांव से क्यों कर विदा लेते ?...३.

 

हंसी में इस तरह मायूसियत हरगिज़ नहीं होती

ज़रा अपने वतन की खिलखिलाहट को सजा लेते…

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Comment Wall (13 comments)

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At 5:59pm on January 1, 2011, Veerendra Jain said…
Wishing you a very Happy Birthday.... Tripathi sir...
At 1:17pm on January 1, 2011, Ravi Kumar Giri said…
janam din mubarak ho ,
At 9:23am on January 1, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 10:45pm on November 23, 2010, Lata R.Ojha said…
aap mitrmandali mein sarvpratham mitr hain bhai :) mitrta sweekar kijiye :)
At 2:17am on November 21, 2010, SARA MISRA said…
aapke aashirwaad aur sneh ki aakanchhi ..............SARA
At 12:46pm on October 21, 2010, Navin C. Chaturvedi said…
जी त्रिपाठी जी, अगली बार हम जब भी ऑनलाइन मिलते हैं, इस विषय पर बात करेंगे|
At 9:31am on September 19, 2010, Admin said…
सर नीचे दिये गये लिंक या तरही मुशायरा-३ जहा आपकी ग़ज़ल पोस्ट हुई है उसके ठीक नीचे आने वाली प्रतिक्रिया को आप पढ़ सकते है, आप सीधे भी तरही मुशायरा-३ मे पोस्ट कर सकते थे किन्तु आप के नहीं कर सकने के कारण मै पोस्ट कर दिया था,
किसी भी जानकारी के लिये आप का स्वागत है ,
http://www.openbooksonline.com/forum/topics/obo-3?id=5170231%3ATopic%3A19991&page=13#comments
At 11:17pm on September 18, 2010, Admin said…
आदरणीय डॉ ब्रिजेश कुमार त्रिपाठी जी, इस पोस्ट(जिंदगी में तुम्हारी कमी रह गयी.) को तरही मुशायरा -३ मे पोस्ट कर दिया गया है ,
http://www.openbooksonline.com/forum/topics/obo-3/showLastReply
At 8:40pm on September 15, 2010, Admin said…
आपका tarahi mushayarey key liyey भेजा गया पोस्ट जो नीचे लिखा हुआ है उसे मुशायरा मे पोस्ट कर दिया गया है जिसे आप नीचे के लिंक पर देख सकते है ....
http://openbooksonline.com/xn/detail/5170231:Comment:19883?xg_source=activity

दोस्तों नेट की खराबी के चलते मैं तरही मुशायरा में शामिल नहीं हो पाया लेकिन मेरी इसमें शामिल होने की बड़ी इच्छा थी चार लाइन पेश करना चाहता हूँ और लेट लतीफी की माफ़ी भी ...

जिनकी बातों से चिढ होती थी कभी
उन्ही को फर्शी सलाम बजाना है...
जिनके पीछे पड़े थे कभी पुलिस के दस्ते
उन्ही के कदमों में जा गिरा ज़माना है
At 10:29pm on July 15, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

 
 
 

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