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Dr.Brijesh Kumar Tripathi
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Dr.Brijesh Kumar Tripathi's Page

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Dr.Brijesh Kumar Tripathi commented on Dr.Brijesh Kumar Tripathi's blog post मुक्त कथ्य
" मान.शिज्जु शकूर जी एवं आद. हर्ष जी आप दोनो का मेरी रचना पर मधुर टिप्पणी देने के लिए आभार  "
Wednesday
Dr.Brijesh Kumar Tripathi commented on Dr.Brijesh Kumar Tripathi's blog post वियोग-रस
" आदरणीय केवल प्रसाद जी,आदरणीया राजेश कुमारी जी आप दोनो का इस मधुर प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद एवम् आभार  "
Wednesday

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Dr.Brijesh Kumar Tripathi's blog post वियोग-रस
"अच्छी प्रस्तुति आद० ब्रिजेश जी  बहुत बहुत बधाई "
Tuesday
Dr.Brijesh Kumar Tripathi commented on Sulabh Agnihotri's blog post राम-रावण कथा (पूर्व-पीठिका) - 8
" आदरणीय सुलभ जी   आपका राम-रावण कथा अंक ८ पढ़ा,रोचकताबरकरार है किंतु मेरी जानकारी के अनुसार केकेयी राजा दशरथ की तीसरी और सबसे छोटी रानी थीसुमित्रा मझलीऔर कौशल्या सबसे बड़ी रानी थी .कृपया मेरी संदेह दूर करें.   "
Tuesday
Kewal Prasad commented on Dr.Brijesh Kumar Tripathi's blog post वियोग-रस
"बहुत ही सुंदर कहन और सलीके में कविता की चाशनी लबालब है...दिली बधाई कुबूल करें आदरणीय ब्रिजेश भाई जी, सादर"
Tuesday
Dr.Brijesh Kumar Tripathi posted a blog post

वियोग-रस

पलों को बीतने में लग रहीं सदियांबेक़रारी हो औ सुकूं आये कब हुआ है येहसीन पल भी ज़िन्दगी के नहीं कटते काटेऔर वो हैं क़ि रुक गए दहलीज़ पे आते आतेछा गए हैं वो ख़्वाब में क़हर बन केकि पलकें भी अब झुकाने में बहुत डर लगताउनके जाने की तारीख तो मुकम्मल लेकिनवो आंएगे कब इसका कहाँ पता चलता...आँख के आंसू सब बयां करते हैभरे गले से शब्द कहाँ झरा करते हैंये वफा थी न थी अब परवा कहाँ किसकोटूट कर दिल तो बस आहे भरा करते है....प्यार से लबरेज़ हैं शिकवे, इन्हें ज़ारी रखिये....खो न वो जाए कहीं अपनों मे, ख्य़ाल रखिये....ये…See More
Monday
Dr.Brijesh Kumar Tripathi commented on Sulabh Agnihotri's blog post राम-रावण कथा (पूर्व-पीठिका) - 7
"आदरणीय सुलभ जी, आपकी राम-रावण कथा के सभी अंक मैंने पढ़ी ....यह न केवल रोचक है वरन आगे के लिए उत्सुकता  बनाये रखती है , सभी पात्रों के साथ पूरा न्याय दिख रहा है . बधाई  "
Monday
Harash Mahajan commented on Dr.Brijesh Kumar Tripathi's blog post मुक्त कथ्य
"आ० Dr.Brijesh Kumar Tripathi जी बहुत ही सुंदर पेशकश !!सादर !!"
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on Dr.Brijesh Kumar Tripathi's blog post मुक्त कथ्य
"अच्छी रचना है आ. बृजेश त्रिपाठी जी"
Sunday
Dr.Brijesh Kumar Tripathi commented on Dr.Brijesh Kumar Tripathi's blog post मुक्त कथ्य
"आपकी मधुर प्रतिक्रिया का हृदय से अभारी हूँ बहन"
Sunday
pratibha pande commented on Dr.Brijesh Kumar Tripathi's blog post मुक्त कथ्य
"सुन्दर कथ्य का सम्प्रेषण है आपकी इस रचना में ,हार्दिक बधाई प्रेषित है आदरणीय डॉ ब्रिजेश कुमार  त्रिपाठी जी  सादर "
Sunday
Dr.Brijesh Kumar Tripathi posted a blog post

मुक्त कथ्य

जबतक तलाश थी सहारे की ऐ नादां !तन्हा हमें यूँ छोड़, कारवां गुज़र गये...अब हम सहारा खुद के जब से बना किएहम एक हैं, पर देखो कन्धे अनेक हैंकागज़ की नाव की क्या थी बिसात, तैरेजबतक न हवाएं-लहरें हो साथ मेरेतिनके भी आंधियों मे वृक्षों से ऊपर लहरेंनामुमकिन होता मुमकिन, जब वक्त लेता फेरेरुक न पाया सफर ये चलता रहा है राहीपर साथ साथ बढ़ती राहों की भी लम्बाईकिससे करे वो शिकवे होनी कहाँ सुनवाईमंज़िल की दूरी रुक के कभी कम न होगी भाईअप्रकाशित एवं मौलिक डॉ. ब्रजेशSee More
Sunday
Dr.Brijesh Kumar Tripathi shared their blog post on Facebook
Apr 20
Dr.Brijesh Kumar Tripathi posted a blog post

अच्छे दिन

अच्छे दिन की यही तो शुरुआत हैसब बिज़ी ही रहें,खुशनुमा बात हैबात तन्हाइयों की चलाना नहीसब अंधेरे हो रुखसत, तो क्या बात है!!झटका बिजली का अबतक तो खाया नहीरोशनी है मुसलसल,बड़ी बात हैजिन्दगी के सबब, वे सिखाने चलेजो जिये ही नही,क्या अज़ब बात हैमुफलिसी जिन्द़गी की अमानत सहीनूर झांका कमश्कम शुरुआत हैफालतू जिन्दगी यूँ ही ढोते रहेएक मिशन अब मिला, खुशनुमा बात हैसंगदिल बिन हुये सब चलें संग संगआज सूरज से अपनी मुलाकात हैरोशनी हाथ है, जिन्दगी साथ हैअच्छे दिन की यही तो शुरुआत है।अप्रकाशित एवं मौलिकडॉ. बृजेशSee More
Apr 20
Dr.Brijesh Kumar Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-11
"बेरहम साथी वार्ड के बाहर कॉरिडोर में दर्द से चीखती वृद्धा। दो दिन पहले उसके अज्ञात परिजन उसे हॉस्पिटल छोड़ गए थे।फीमर के कम्पाउंड फ्रैक्चर का केस।चेहरे की शालीनता और विगत समृद्धता उसके दर्द को असीम बना रही थी।दवा को खरीदने में असमर्थ वृद्धा सरकारी…"
Feb 29
Dr.Brijesh Kumar Tripathi posted a blog post

एक दिन की लिली

एक दिन की लिली प्राणप्रण  से खिली जी भर कर बांटा महक जो भी उसे मिली छोटी सी ज़िन्दगी छोटी सी काया थोड़े से फूलों में जग को महकाया ज़िन्दगी सुहानी है मीठी कहानी है संघर्ष किये बिना लगती अनजानी है सुख-दुःख हैं दिन-रैना इनके बिन क्या कहना फीके सब खान-पान मिलेगा नही चैना जीवन है  एक दिन पल-क्षण हैं अनगिन एक पल की खुशबू में खिल जाता है जीवन आओ चलें साथ मिल जोड़ कर दिलों से दिल यह जहाँ हमारा है   रहना  है हिल-मिल [मौलिक एवं अप्रकाशित ]डॉ. बृजेश कुमार त्रिपाठी   See More
Aug 4, 2015

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur
Native Place
Kanpur
Profession
Homoeopathic Physician
About me
Ypu will better Know

Dr.Brijesh Kumar Tripathi's Blog

वियोग-रस

पलों को बीतने में लग रहीं सदियां

बेक़रारी हो औ सुकूं आये कब हुआ है ये

हसीन पल भी ज़िन्दगी के नहीं कटते काटे

और वो हैं क़ि रुक गए दहलीज़ पे आते आते

छा गए हैं वो ख़्वाब में क़हर बन के

कि पलकें भी अब झुकाने में बहुत डर लगता

उनके जाने की तारीख तो मुकम्मल लेकिन

वो आंएगे कब इसका कहाँ पता चलता...

आँख के आंसू सब बयां करते है

भरे गले से शब्द कहाँ झरा करते हैं

ये वफा थी न थी अब परवा कहाँ किसको

टूट कर दिल तो बस आहे…

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Posted on June 27, 2016 at 5:30pm — 3 Comments

मुक्त कथ्य

जबतक तलाश थी सहारे की ऐ नादां !

तन्हा हमें यूँ छोड़, कारवां गुज़र गये...

अब हम सहारा खुद के जब से बना किए

हम एक हैं, पर देखो कन्धे अनेक हैं

कागज़ की नाव की क्या थी बिसात, तैरे

जबतक न हवाएं-लहरें हो साथ मेरे

तिनके भी आंधियों मे वृक्षों से ऊपर लहरें

नामुमकिन होता मुमकिन, जब वक्त लेता फेरे

रुक न पाया सफर ये चलता रहा है राही

पर साथ साथ बढ़ती राहों की भी लम्बाई

किससे करे वो शिकवे होनी कहाँ सुनवाई

मंज़िल की…

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Posted on June 26, 2016 at 1:00pm — 5 Comments

अच्छे दिन

अच्छे दिन की यही तो शुरुआत है

सब बिज़ी ही रहें,खुशनुमा बात है

बात तन्हाइयों की चलाना नही

सब अंधेरे हो रुखसत, तो क्या बात है!!

झटका बिजली का अबतक तो खाया नही

रोशनी है मुसलसल,बड़ी बात है

जिन्दगी के सबब, वे सिखाने चले

जो जिये ही नही,क्या अज़ब बात है

मुफलिसी जिन्द़गी की अमानत सही

नूर झांका कमश्कम शुरुआत है

फालतू जिन्दगी यूँ ही ढोते रहे

एक मिशन अब मिला, खुशनुमा बात है

संगदिल बिन हुये सब चलें संग संग

आज सूरज से अपनी मुलाकात है

रोशनी हाथ…

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Posted on April 20, 2016 at 10:39am

एक दिन की लिली

एक दिन की लिली …

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Posted on August 4, 2015 at 4:30pm

Comment Wall (12 comments)

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At 5:59pm on January 1, 2011, Veerendra Jain said…
Wishing you a very Happy Birthday.... Tripathi sir...
At 1:17pm on January 1, 2011, Rash Bihari Ravi said…
janam din mubarak ho ,
At 9:23am on January 1, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 10:45pm on November 23, 2010, Lata R.Ojha said…
aap mitrmandali mein sarvpratham mitr hain bhai :) mitrta sweekar kijiye :)
At 2:17am on November 21, 2010, SARA MISRA said…
aapke aashirwaad aur sneh ki aakanchhi ..............SARA
At 9:31am on September 19, 2010, Admin said…
सर नीचे दिये गये लिंक या तरही मुशायरा-३ जहा आपकी ग़ज़ल पोस्ट हुई है उसके ठीक नीचे आने वाली प्रतिक्रिया को आप पढ़ सकते है, आप सीधे भी तरही मुशायरा-३ मे पोस्ट कर सकते थे किन्तु आप के नहीं कर सकने के कारण मै पोस्ट कर दिया था,
किसी भी जानकारी के लिये आप का स्वागत है ,
http://www.openbooksonline.com/forum/topics/obo-3?id=5170231%3ATopic%3A19991&page=13#comments
At 11:17pm on September 18, 2010, Admin said…
आदरणीय डॉ ब्रिजेश कुमार त्रिपाठी जी, इस पोस्ट(जिंदगी में तुम्हारी कमी रह गयी.) को तरही मुशायरा -३ मे पोस्ट कर दिया गया है ,
http://www.openbooksonline.com/forum/topics/obo-3/showLastReply
At 8:40pm on September 15, 2010, Admin said…
आपका tarahi mushayarey key liyey भेजा गया पोस्ट जो नीचे लिखा हुआ है उसे मुशायरा मे पोस्ट कर दिया गया है जिसे आप नीचे के लिंक पर देख सकते है ....
http://openbooksonline.com/xn/detail/5170231:Comment:19883?xg_source=activity

दोस्तों नेट की खराबी के चलते मैं तरही मुशायरा में शामिल नहीं हो पाया लेकिन मेरी इसमें शामिल होने की बड़ी इच्छा थी चार लाइन पेश करना चाहता हूँ और लेट लतीफी की माफ़ी भी ...

जिनकी बातों से चिढ होती थी कभी
उन्ही को फर्शी सलाम बजाना है...
जिनके पीछे पड़े थे कभी पुलिस के दस्ते
उन्ही के कदमों में जा गिरा ज़माना है
At 10:29pm on July 15, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

At 12:33pm on July 15, 2010,
सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh
said…

 
 
 

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