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अलका ललित
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sunanda jha commented on अलका ललित's blog post कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन, (गीत) :अलका ललित
"वाहहहहह आदरणीया अलका जी सुन्दर गीत के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।"
Aug 13
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on अलका ललित's blog post कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन, (गीत) :अलका ललित
"आ०  अलका ललित जी , विहग का अर्थ गगनचर होता है  इस लिहाज से  संभव है  किसी ,  कोष में इसका एक अर्थ चंद्रमा भी हो  परन्तु यह अर्थ प्रचलन में नहीं है , अप्रचलित अर्थ  प्रयोग से बचना चाहिए . सादर ."
Aug 12
अलका ललित commented on अलका ललित's blog post कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन, (गीत) :अलका ललित
"जी आदरणीय Samar Kabeer ji , मार्गदर्शन  के लिए आभार ,सादर ।"
Aug 10
अलका ललित commented on KALPANA BHATT's blog post क्यों लिखूं कोई और कहानी (कविता)
"आदरणीया कल्पना जी , भाव  पूर्ण कविता के लिये आपको बधाइयाँ "
Aug 10
Samar kabeer commented on अलका ललित's blog post कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन, (गीत) :अलका ललित
"गूगल ने कई लोगों को ग़लत जानकारी देकर भटका दिया है,बहतर यही है कि कोई अच्छा शब्दकोष ख़रीद लें ।"
Aug 10
अलका ललित commented on अलका ललित's blog post कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन, (गीत) :अलका ललित
"आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी आपका धन्यवाद कि आपको मेरी रचना पसंद आई , सुधार की कोशिश जरूर करूंगी , आभार सादर । "
Aug 10
अलका ललित commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - रोशनी है अगर तेरे दिल में- ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय गिरिराज भंडारी जी, बेहद खूबसूरत गजल के लिए बहुत बधाई । सादर  ।"
Aug 10
अलका ललित commented on अलका ललित's blog post कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन, (गीत) :अलका ललित
"आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी ,बहुत बहुत आभार आपका ,मेरे अल्प ज्ञान व् बहुत सी त्रुटियों के बावजूद आपने मेरी रचना को सराहा। सभी शब्दों के अर्थ गूगल से देखे है... विहग पक्षी और चन्द्रमा दोनों दिखाया गया है। अभी बहुत सीखना है मुझे, पढ़ती हूँ पर…"
Aug 10
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on अलका ललित's blog post कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन, (गीत) :अलका ललित
"आद0 अलका जी सादर अभिवादन, अच्छा गीत लिखा है आपने। सरल सरस्, हाँ गोपाल नारायण जी के बातों से सहमत हूँ।आप इसे देखलें।सादर। बधाई इस रचना पर"
Aug 10
अलका ललित commented on अलका ललित's blog post कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन, (गीत) :अलका ललित
"आदरणीय Samar Kabeer जी आपका धन्यवाद कि आपको मेरी रचना पसंद आई , आभार सादर ।"
Aug 10
अलका ललित commented on अलका ललित's blog post कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन, (गीत) :अलका ललित
"आदरणीया KALPANA BHATT जी आपका धन्यवाद कि आपको मेरी रचना पसंद आई , आभार सादर ।"
Aug 10
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on अलका ललित's blog post कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन, (गीत) :अलका ललित
"आदरणीया विहग  चाँद  कैसे ? विहग तो पक्षी होता है  और छंद  न तो चौपई है और न चौपाई  किसलय पुंजित ह्रदय हुलसित(15 मात्राएँ उद्विग्न है संध्या तट कुसुमित----लय बाधित रे रीत मुक्त प्रीती बंधन-------- प्रीति -------------रीति…"
Aug 9
Samar kabeer commented on अलका ललित's blog post कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन, (गीत) :अलका ललित
"मोहतरमा यलक ललित जी आदाब,बढ़िया लगे आपके छन्द,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 9
KALPANA BHATT commented on अलका ललित's blog post कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन, (गीत) :अलका ललित
"सुंदर रचना हुई है आदरणीया अलका जी |"
Aug 8
अलका ललित commented on अलका ललित's blog post उल्फत न सही बैर निभाने के लिए आ.(समीक्षार्थ ग़ज़ल) :अलका ललित
"आदरनीय   गिरिराज भंडारी   जी   , गज़ल पर उपस्थिति और सराहना के लिये  आभार आपका।  सादर"
Aug 8
अलका ललित commented on अलका ललित's blog post उल्फत न सही बैर निभाने के लिए आ.(समीक्षार्थ ग़ज़ल) :अलका ललित
"आदरनीय   Nilesh Shevgaonkar  जी   , गज़ल पर उपस्थिति और सराहना के लिये  आभार आपका।  सादर"
Aug 8

Profile Information

Gender
Female
City State
New Delhi
Native Place
New Delhi

अलका ललित's Blog

कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन, (गीत) :अलका ललित

16 मात्रा आधारित गीत (चोपाई छन्द आधारित )

*****

कोमल स्पंदन मन चिर उन्मन

रे स्याह भौंर गुंजन गुंजन

.

किसलय पुंजित ह्रदय हुलसित

उत्कंठा इंद्रजाल पुलकित

नित भोर भये चिर कोकिल-रव

मधु कुंज कुंज गुंजित कलरव

.

रे गंध युक्त मसिमय अंजन

रे स्याह भौंर गुंजन गुंजन

.

घनघोर घटा चितचोर विहग

नभ अंतःपुर द्युतिमान सुभग

अकलुष प्रदीप्त कोमल उज्ज्वल

तप नेह वेदना में प्रतिपल

.

रे स्वर्ण…

Continue

Posted on August 8, 2017 at 4:30pm — 12 Comments

उल्फत न सही बैर निभाने के लिए आ.(समीक्षार्थ ग़ज़ल) :अलका ललित

221 1221 1221 122

***

उल्फत न सही बैर निभाने के लिए आ

चाहत के अधूरे से फ़साने के लिए आ

.

चाहत भरी दस्तक भी सुनी थी कभी दिल ने

वीरानियों को फिर से बसाने के लिए आ

.

शब्दों की कमी तो मुझे हरदम ही रही है

खामोश ग़ज़ल कोई सुनाने के लिए आ

.

सागर ये गमों का कहीं तट तोड़ न जाए

ऐ राहते जां बांध बनाने के लिए आ

.

रौशन दरो दीवार है झिलमिल है सितारे 

ऐ चाँद मेरे मुझको…

Continue

Posted on May 8, 2017 at 4:00pm — 10 Comments

मीत बन जाइए....मनहरण घनाक्षरी...समीक्षार्थ..//अलका ललित

समीक्षार्थ

मनहरण घनाक्षरी ....(एक प्रयास)

***

 

आशा का प्रकाश कर

बांस को तराश कर

बांसुरी के सुर संग

गीत बन जाइए

.

हौसले पकड़ कर

आँधियाँ पछाड़ कर

बहती नदी सी इक

रीत बन जाइए

मछली पे आँख रहे

धरती पे पाँव रहे

आसमान छू के जरा

जीत बन जाइए

बहुत जीया है इस

दुनिया की सोच कर

अब अपने भी जरा

मीत बन…

Continue

Posted on April 17, 2017 at 6:30pm — 14 Comments

मनहरण घनाक्षरी...समीक्षार्थ..अबके चुनाव में...//अलका ललित

समीक्षार्थ

मनहरण घनाक्षरी ....(एक प्रयास)

***

भ्रष्टाचारियों से बड़ी

चोट खाई पीढ़ियों ने

चोट ये मिटानी होगी

अबकी चुनाव में  

.

दांव न लगाने देंगे

झूठे वादों का जी अब

हार भी चखानी होगी

अबकी  चुनाव में

.

मतदाता याद आए

पांच साल बाद जिसे

मात उसे खानी होगी

अबकी…

Continue

Posted on April 9, 2017 at 5:00pm — 6 Comments

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At 11:48pm on August 11, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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