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Abha saxena Doonwi
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Abha saxena Doonwi posted a blog post

ग़ज़ल: हर शख़्स ही लगा हमें तन्हा है रात को

२२१ २१२१ १२२१ २१२चंदा मेरी तलाश में निकला है रात को!शायद वो मेरी चाह में भटका है रात को !! होती है उम्र उतनी ही जितनी कि है लिखी!जलता दिया भी देखिये बुझता है रात को!! आँखों के डोरे कर रहे सब कुछ बयां यहाँ!लगता है तेरा ख्वाब भी उलझा है रात को!! दुनिया की भीड़ में मेरा दिन तो गुज़र गया!हर शख्स ही लगा हमें तनहा है रात को!! बदनामियों के डर से ही हम तो सिहर गए!हर ख्वाब जैसे अपना  ही रोया है रात को!! मेरी हसीन मह्ज़बीं शरमा के रह गयी!आगोश में लगा कोई सिमटा है रात को!! अप्रकाशित एवं मौलिक आभा सक्सेना…See More
49 minutes ago
Abha saxena Doonwi updated their profile
12 hours ago
Abha saxena Doonwi is now friends with श्याम किशोर सिंह 'करीब', पंकजोम " प्रेम " and अलका 'कृष्णांशी'
Jun 4, 2018

Profile Information

Gender
Female
City State
Dehradun Uttrakhand
Native Place
Aligarh
Profession
writer
About me
I believe in simple living and high thinking.

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ग़ज़ल: हर शख़्स ही लगा हमें तन्हा है रात को

२२१ २१२१ १२२१ २१२

चंदा मेरी तलाश में निकला है रात को!

शायद वो मेरी चाह में भटका है रात को !!

 

होती है उम्र उतनी ही जितनी कि है लिखी!

जलता दिया भी देखिये बुझता है रात को!!

 

आँखों के डोरे कर रहे सब कुछ बयां यहाँ!

लगता है तेरा ख्वाब भी उलझा है रात को!!

 

दुनिया की भीड़ में मेरा दिन तो गुज़र गया!

हर शख्स ही लगा हमें तनहा है रात को!!

 

बदनामियों के डर से ही हम तो सिहर गए!

हर ख्वाब जैसे अपना …

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Posted on July 15, 2019 at 10:00pm

हाथ में हाथ मिला कर देखो (ग़ज़ल)

२१२२ ११२२ २२

खुशनुमा ख्वाब सजा कर देखो,

रात में चाँद बुला कर देखो.

 

नींद आँखों में कहाँ है यारो,

सारे ग़म अपने भुला कर देखो.

 

नफरतें कर रहे हो क्यूँ मुझ से,

हाथ में हाथ मिला कर देखो.

 

तिश्नगी लव पे क्यूँ  तेरे छाई,

जाम हाथों से पिला कर देखो.

 

आज गर्दिश में है तेरी  ‘आभा’,

उस के ग़म दूर भगा कर देखो

 

 

....आभा 

अप्रकाशित एवं मौलिक 

Posted on November 7, 2016 at 10:32pm — 4 Comments

दिए कुछ आस के ...

दिए कुछ आस के ......

 

आँखों से झांक रहे

सपने विश्वास के

देहरी पर जल रहे

दिए कुछ आस के

 

नेह के भरोसे ही

कुछ रिश्ते जोड़े हैं

तुमने न जाने क्यूँ

अनुबंध सारे तोड़े हैं

मौन की पीडाएं ही

मुझको तो छलती हैं

पास तुम आते हो

दूरी तब ढलतीं हैं

सम्बन्ध ले आये हैं

रिश्ते कुछ पास के

देहरी पर जल रहे

दिए कुछ आस के |

 

 

नश्तर से चुभते हैं

धूप के सुनहरे…

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Posted on November 1, 2016 at 4:00pm — 2 Comments

दीपावली पर कुछ दोहे ...

धनतेरस के पर्व पर, कर लें कार्य महान|

निर्धन को बर्तन करें, दान आप श्री मान||

 

दीवाली लाये सदा, खुशियाँ अपरम्पार|

खील बताशे कह रहे, हम आये हैं द्वार||

 

लक्ष्मी और गणेश की, पूजा करिए साथ|

सब पर ही किरपा करें, मेरे भोले नाथ||

 

होई करवा चौथ का, लगे अनोखा मेल|

पर्वों की अब देखिये छूटी जाती रेल||

 

इस दीवाली लग रही, फीकी सी सब ओर|

सीमा पर प्रहरी तकें, एक सुहानी भोर||

 

डाल दिये झूले सभी मन…

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Posted on October 28, 2016 at 9:20am — 6 Comments

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At 7:21am on September 10, 2016, Abha saxena Doonwi said…

आदरणीया  kanta roy जी नमस्कार,

आपका शुभकामना सन्देश पढ़ा बहुत अच्छा लगा आपका मैं ह्रदय से हार्दिक अभिनन्दन करती हूँ ...

At 3:46pm on September 4, 2016, kanta roy said…
आपका "महीने का सक्रिय सदस्य"चुने जाना हम सबके लिये हर्ष का विषय है। बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीया आभा जी।
At 11:33pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया

श्रीमती आभा सक्सेना जी,

सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:08pm on August 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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