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अकिल अझुराइलआम असो आइल बा खूब बउराइल बा काँच बने चटनी त सतुआ घोराइल बा मावस ना बारी मा बिजुरी बराइल बा हाथ, हाथी, सायकिल सभे अगराइल बा जाति… Started by PRAMOD SRIVASTAVA |
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Oct 4, 2016 Reply by PRAMOD SRIVASTAVA |
करकट नर-कटआप कहीं माई कहीं बापू सँगे लुगाई धोती हटि पतलून त खदरा कमरि, रजाई खदरा कमरि, रजाई बदल संस्कृति परिपाटी जाति पाति भेदे नही प… Started by PRAMOD SRIVASTAVA |
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Sep 23, 2016 Reply by PRAMOD SRIVASTAVA |
लगाव गाँछिआव अपना दुअरा लगाव गाँछि नीम क सुधरि जाई हावा पानी घरवा जमीन क पितरन के दिनवा भुलाई ना जुगाड़ से हरियाली देत उनकर नाम दिन चीन्ह क लरिक… Started by PRAMOD SRIVASTAVA |
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Sep 23, 2016 Reply by PRAMOD SRIVASTAVA |
गीत भोजपुरीराजा जी की बगिया में, सुगवा सुगीनिया में-2 लागल बावे प्रेमवा के डोर, ए सुगी मार ना हनि हनि ठोर-2 फुलवा लोरहन गइलीं जनक-दुलारी। ओही बगिया प… Started by रामबली गुप्ता |
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Sep 20, 2016 Reply by PRAMOD SRIVASTAVA |
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सदस्य टीम प्रबंधन भोजपुरी ग़ज़ल१२२२ १२२२ १२२२ १२२२ फलनवा बन गइल मुखिया रङाइल गोड़ माथा ले [फलनवा - कोई ; रङाइल - रंगा हुआ ; गोड़ - पैर बनल खेला बिगाड़े के.. चिलनवा ठाढ़… Started by Saurabh Pandey |
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Sep 20, 2016 Reply by PRAMOD SRIVASTAVA |
प्रीत क पहुनवाचिहुँकि उठिह भोर भइला के पहिले जब देखिह सपनवा मिलनवा के धीरज जनि छोड़िह कदम जनि मोड़िह परेम पग रहिया खनकि उठिह जस गीत काढ़े कलाई… Started by PRAMOD SRIVASTAVA |
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Sep 10, 2016 Reply by PRAMOD SRIVASTAVA |
गर्मी के महीनागर्मी के महीना में हमरा मन में इ बात उठेला कि हमनी का काहे ना हिल स्टेषन में पैदा भइली जां। ओहिजा हमनी का ना जायेके पड़ीत। एहिजे ठंडा के मज… Started by indravidyavachaspatitiwari |
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Jul 22, 2016 Reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') |
शराबबंदीमरदे! उ काहे गभुआइल बा लागता उ तनी भकुआइल बा। ठंढा पानी से पिआस जाई का? उ बोतल खातिर छुछुआइल बा। शराबबंदी के एलान का भइल ताड़ी तनी अधिके बउर… Started by Manan Kumar singh |
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Jun 16, 2016 Reply by Manan Kumar singh |
नवगीत - मोहित मिश्रापियवा गइलें परदेश राह ताकत बाडी सूनी अँखियाँ, बन गइले विधवा के भेष, पियवा गइलें परदेश। कह के त गइलें सैया कुछ दिन के काम बा, थोडे दिन के… Started by Mohit mishra |
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May 19, 2016 Reply by Pawan Kumar |
शाकाहारी स्वागत-भोजपुरी कवितापाहुन जी चली मुँह हाथ धोइ गोड़ सोड़ पोंछी राउवे खातिर बनवले बानी करी बरी फुलौरी आ मोछी भात दाल आ तरकारि बा आलू कटहल के आम के चटनी भुजिया च… Started by Mohit mishra |
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Mar 27, 2016 Reply by Mohit mishra |
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