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भोजपुरी साहित्य Discussions (250)

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अकिल अझुराइल

आम असो आइल बा  खूब बउराइल बा  काँच बने चटनी त  सतुआ घोराइल बा  मावस ना बारी मा  बिजुरी बराइल बा  हाथ, हाथी, सायकिल  सभे अगराइल बा  जाति…

Started by PRAMOD SRIVASTAVA

6 Oct 4, 2016
Reply by PRAMOD SRIVASTAVA

करकट नर-कट

आप   कहीं   माई कहीं   बापू सँगे लुगाई धोती हटि पतलून त  खदरा कमरि, रजाई  खदरा कमरि, रजाई बदल संस्कृति  परिपाटी  जाति पाति भेदे नही      प…

Started by PRAMOD SRIVASTAVA

4 Sep 23, 2016
Reply by PRAMOD SRIVASTAVA

लगाव गाँछि

आव अपना दुअरा लगाव गाँछि नीम क सुधरि जाई हावा पानी घरवा जमीन क पितरन के दिनवा भुलाई ना जुगाड़ से हरियाली  देत उनकर नाम दिन चीन्ह क  लरिक…

Started by PRAMOD SRIVASTAVA

3 Sep 23, 2016
Reply by PRAMOD SRIVASTAVA

गीत भोजपुरी

राजा जी की बगिया में, सुगवा सुगीनिया में-2 लागल बावे प्रेमवा के डोर, ए सुगी मार ना हनि हनि ठोर-2 फुलवा लोरहन गइलीं जनक-दुलारी। ओही बगिया प…

Started by रामबली गुप्ता

1 Sep 20, 2016
Reply by PRAMOD SRIVASTAVA

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भोजपुरी ग़ज़ल

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२ फलनवा बन गइल मुखिया रङाइल गोड़ माथा ले     [फलनवा - कोई ; रङाइल - रंगा हुआ ; गोड़ - पैर बनल खेला बिगाड़े के.. चिलनवा ठाढ़…

Started by Saurabh Pandey

3 Sep 20, 2016
Reply by PRAMOD SRIVASTAVA

प्रीत क पहुनवा

चिहुँकि उठिह  भोर भइला के पहिले  जब  देखिह सपनवा मिलनवा के  धीरज जनि छोड़िह  कदम जनि मोड़िह  परेम पग रहिया  खनकि उठिह  जस  गीत काढ़े कलाई…

Started by PRAMOD SRIVASTAVA

6 Sep 10, 2016
Reply by PRAMOD SRIVASTAVA

गर्मी के महीना

गर्मी के महीना में हमरा मन में इ बात उठेला कि हमनी का काहे ना हिल स्टेषन में पैदा भइली जां। ओहिजा हमनी का ना जायेके पड़ीत। एहिजे ठंडा के मज…

Started by indravidyavachaspatitiwari

2 Jul 22, 2016
Reply by KALPANA BHATT ('रौनक़')

शराबबंदी

मरदे! उ काहे गभुआइल बा लागता उ तनी भकुआइल बा। ठंढा पानी से पिआस जाई का? उ बोतल खातिर छुछुआइल बा। शराबबंदी के एलान का भइल ताड़ी तनी अधिके बउर…

Started by Manan Kumar singh

1 Jun 16, 2016
Reply by Manan Kumar singh

नवगीत - मोहित मिश्रा

पियवा गइलें परदेश राह ताकत बाडी सूनी अँखियाँ, बन गइले विधवा के भेष, पियवा गइलें परदेश। कह के त गइलें सैया कुछ दिन के काम बा, थोडे दिन के…

Started by Mohit mishra

3 May 19, 2016
Reply by Pawan Kumar

शाकाहारी स्वागत-भोजपुरी कविता

पाहुन जी चली मुँह हाथ धोइ गोड़ सोड़ पोंछी राउवे खातिर बनवले बानी करी बरी फुलौरी आ मोछी भात दाल आ तरकारि बा आलू कटहल के आम के चटनी भुजिया च…

Started by Mohit mishra

2 Mar 27, 2016
Reply by Mohit mishra

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Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
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Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

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Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

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Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
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"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
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Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
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सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
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